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जीवन में कुछ हटकर करने वालों का सम्मान जरूरी
सम्मान अंतरंग भाव से करें : मुनिश्री वीरसागर
निजसंवाददाता| खुरई
प्राचीनजैन मंदिर में मुनिश्री वीरसागर महाराज ने कहा कि प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से जो व्यक्ति किसी भी सामाजिक, धार्मिक या अन्य किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्ट काम करता है तो उसका सम्मान सामूहिक रूप से जरूर होना चाहिए। ऐसा होने से उसका मनोबल तो बढ़ता ही है साथ ही देखने या सुनने, पढ़ने वाले व्यक्ति को प्रेरणा भी मिलती है। वास्तव में सम्मान अंतरंग भावों से होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सम्मान व्यक्ति का पैसा, प्रतीक चिन्ह या अन्य उपकरण देने से नहीं होता सम्मान तो भावों से होता है। कोई भी उत्कृष्ट काम करने वाला व्यक्ति सम्मान पाने की भावना से कोई काम नहीं करता वह तो उसका स्वभाव हुआ करता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में व्यक्ति के हद्य से करुणा भाव नदारद होता जा रहा है। व्यक्ति में तो वह आत्मीयता ही बची है और ही वह अंतरंग प्रेम ही बचा है। अधिकांश व्यक्ति स्वार्थ परक सेवा में तल्लीन नजर आते हैं।
सहयोगियोंका सम्मान
खुरई.मुनिश्री वीरसागर महाराज, मुनिश्री विशाल सागर महाराज, मुनिश्री धवलसागर महाराज के सानिध्य एवं बाल ब्रह्मचारी चिद्रुप भैया के मार्गदर्शन में होने वाले चातुर्मास कालीन बेला में अभी तक हुए समस्त कार्यक्रमों में विशेष सहयोग करने वाले, पर्युषण पर्व में अकथनीय तपश्चर्या करने वाले शिविरार्थियों, छहढाला एवं तत्वार्थ सूत्र की परीक्षा में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वालों का सम्मान समारोह आयोजित किया गया। सम्मान प्राप्त करने वालों में पर्युषण पर्व पर लगातार दस उपवास करने वाले महेन्द्र जैन, धर्मेन्द्र उजनेट, पदमचंद नारधा, डॉ. वीरेन्द्र जैन, अशोक नारधा, सुखलाल नारधा, संजय समैया, प्रवीण गढ़ौला, आलोक गढ़ौला, अक्षय रोकड़या, रतनचंद गल्लामंडी, पलाश खड्डर, श्रीमती सरिता जैन, श्रीमती सुषमा खड्डर, श्रीमती कुसम गढ़ौला, श्रीमती कमलाबाई उपभोक्ता, श्रीमती आभा खड्डर, श्रीमती मीना मिर्ची, श्रीमती प्रभा गुरहा प्रमुख हैं। मनीष सिंघई बड़े बल्लू को भी अपने जीवन में पहली बार नौ एकाशन एवं एक उपवास करने पर सम्मानित किया गया। समस्त शिविरार्थियों का सम्मान भी हुआ जिन्होंने लगातार दस दिनों तक अपने घर का त्याग कर मंदिर जी में ही तपश्चर्या की।
सम्मान समारोह के द्वितीय सत्र में छहढाला एवं तत्वार्थ सूत्र की परीक्षा में सर्वोच्च