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अब भोपाल में रहेंगे, बेटियों का ब्याह करेंगे

7 वर्ष पहले
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सागर। प्रशासनिक सेवा में आए अभी एक ही साल हुआ था। 1984 में भोपाल गैस त्रासदी हो गई। उस समय शर्माजी बतौर डिप्टी कलेक्टर भोपाल में पदस्थ थे। आदेश हुआ कि आपको अस्पताल पहुंचना है और मृतकों की सूची बनानी है। वे पहुंचे और एक के बाद एक 237 शवों के माथे पर चस्पा नामों की सूची बनाई। लौटकर आए तो मन कुछ बोझिल था। विचलित थे, लेकिन अगले दिन ही वह वापस गैस राहत कार्य में जुट गए। यह एक ऐसा उदाहरण है, जो बताता है कि बड़े से बड़े संकट के समय उनका व्यक्तित्व कार्यक्षमता निखरती जाती है।
शर्माजी से मेरी मुलाकात पढ़ाई के दौरान हुई। बात आगे बढ़ी तो हम दोनों पारिवारिक सहमति से सन 1978 में विवाह के बंधन में बंध गए। आगे चलकर दो बच्चियां शिवांगी सुकृति का जन्म हुआ। इस दौरान हम लोगों ने फैसला किया बाहर का प्रशासन आप संभालें। घर की जिम्मेदारी मेरी रहेगी। 1999 में उन्हें आईएएस अवार्ड हो गया।
फिलहाल दोनों बेटियां उच्च शिक्षा प्राप्त कर विदेश में जॉब कर रही हैं। शर्माजी की रुचि बात करें, तो उन्हें व्यायाम से बड़ा लगाव है। घर में हों या बाहर दोनों समय एक्सरसाइज के बिना नहीं रहते। कुकिंग का बड़ा शौक है। फ्री टाइम में अपना पसंदीदा पुलाव जरूर बनाते हैं। बतौर कलेक्टर सागर के बारे में जब कभी चर्चा हुई तो उन्होंने जवाब दिया कि इस जिले के लिए हमेशा संवेदनशील कलेक्टर की जरूरत रहेगी।
स्वयं की उपलब्धि की बात करो तो उनका कहना रहता है कि मेरा इस जिले से हमेशा जीवंत संपर्क रहा। उसका नतीजा है कि दो बड़े चुनाव विधानसभा 2013 लोकसभा चुनाव 2014 शांतिपूर्ण ढंग से निपटा सका। रिटायरमेंट के बाद का प्लान है कि हम दोनों भोपाल में रहेंगे। बेटियों का विवाह करेंगे, क्योंकि व्यस्तता के चलते पता ही नहीं चला कि बेटियां कब विवाह योग्य हो गईं।

शख्सियत -रिटायमेंट की पूर्व संध्या पर प्रभारी कमिश्नर योगेंद्र शर्मा की पत्नी श्रीमती पूर्णिमा शर्मा ने जैसा दैनिक भास्कर को बताया।

(कलेक्टर योंगेंद्र शर्मा अपनी पत्नी श्रीमती पूर्णिमा और दोनों बेटियों के साथ।)