पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • अपने साथी कर्मचारियों का नाम तक नहीं बता पाए संभाग के सीएमएचओ

अपने साथी कर्मचारियों का नाम तक नहीं बता पाए संभाग के सीएमएचओ

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
सागर। संभाग के ज्यादातर सीएमएचओ अपने अधीनस्थ अफसरों कर्मचारियों का नाम तक नहीं जानते। यह हकीकत उस वक्त उजागर हुई, जब भोपाल से आए लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण विभाग के संचालक डॉ. पीएनएस चौहान ने उनसे पूछ लिया कि आप अपने स्टाफ को पहचानते हैं या नहीं। यह सवाल सुनकर सागर को छोड़कर बाकी जिलों को सीएमएचओ अपने साथ आए ब्लॉक कम्युनिटी मोबलाइजर(बीसीएम) में से अधिकांश के नाम नहीं बता पाए। एक सीएमएचओ ने तो केवल बीसीएम के सरनेम ही बताए।
यह वाकया बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के सेंट्रल लाइब्रेरी सभागार में संभागीय समीक्षा बैठक के दौरान सामने आया। 5 घंटे तक चली इस बैठक में डॉ. चौहान ने परिवार कल्याण कार्यक्रम के तहत एक-एक जिले की बारीकी से समीक्षा की। वरिष्ठ अधिकारी से लेकर बीसीएम तक संचालक अन्य अधिकारियों से नजरे चुराते नजर आए।
फील्ड में जाकर लोगों को प्रेरित करें: बैठक में खामियां सामने आने पर अमूमन सभी जिलों के अधिकारियों को डॉ. चौहान ने फटकार भी लगाई। उन्होंने कहा कि नसबंदी मामलों में लापरवाही नहीं चलेगी। आप लोग लक्ष्य से काफी पीछे हैं। इसके लिए फील्ड में जाकर हितग्राहियों को योजनाओं की जानकारी के साथ प्रेरित करें। बैठक में संभागीय संयुक्त संचालक डॉ. निधि व्यास, संचालनालय से आए कंसल्टेंट डॉ. जयदीप सिंह परिहार, डॉ. हर्षवर्धन, सागर के नए सीएमएचओ डॉ. एजी बिनचुनकर, पूर्व सीएमएचओ डॉ. आरसी जैन, सागर के सिविल सर्जन डॉ. अमिताभ जैन, डीपीएम कपिलदेव पराशर सहित सभी दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ जिलों के सीएमएचओ, सिविल सर्जन, डीपीपएम, बीसीएम सहित विभागीय स्टाफ मौजूद थे।

जिला अस्पताल का निरीक्षण किया: इससे पहले बुधवार को सुबह संचालक ने जिला अस्पताल, जिला महिला अस्पताल का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं में सुधार लाने, मरीजों को सुविधाएं दिलाने प्रोटोकॉल का पालन करने के निर्देश दिए। दोपहर में उन्होंने परिवार कल्याण कार्यक्रम की संभागीय समीक्षा बैठक ली।
डॉ. चौहान सुबह करीब 11 बजे जिला अस्पताल पहुंचे और ओपीडी का निरीक्षण किया। उन्होंने यहां पर पंजीयन काउंटर, कैजुअल्टी, दवा वितरण काउंटर, पैथालॉजी, ड्रेसिंग रूम, मलेरिया जांच केंद्र की व्यवस्थाएं देखी। इसके बाद वे जिला महिला अस्पताल (डफरिन) पहुंचे और यहां पर ओपीडी, प्रसव पूर्व कक्ष, प्रसूताओं की खून की जांच, वजन करने, एएनसी केस में दिए जा रहे इलाज, प्रसव के लिए उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली। वे अस्पताल में करीब 1 घंटे तक रुके।
निरीक्षण : स्वास्थ्य संचालक ने पूछा था कि अपने स्टॉफ को पहचानते हो कि नहीं।
(सागर| जिला अस्पताल के निरीक्षण के वक्त डॉक्टरों के साथ संचालक डॉ. चौहान।)