सागर। बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में गुरुवार से प्रसूती ईकाई प्रारंभ की जा रही है। कॉलेज खुलने के 5 साल बाद स्त्री रोग विभाग के तहत प्रसूति ईकाई शुरू की जा रही है। अस्पताल प्रबंधन करीब छह महीने से इसके प्रयास में जुटा हुआ था। मेडिकल कॉलेज में पहली बार गुरुवार से प्रसव कराए जा सकेंगे। पिछले दो दिन से अस्पताल प्रबंधन स्त्री रोग विभाग के लेबर रूम ओटी में तैयारियां करने में जुटा रहा। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमानुसार कॉलेज को स्थाई मान्यता के प्रसूति वार्ड लेबर रूम शुरू होना आवश्यक है।
इस कारण करीब छह महीने में तीन दफा लेबर रूम शुरू करने के प्रयास किए गए, लेकिन हर बार कुछ कुछ तकनीकी कारण बताकर स्त्रीरोग विभाग इसे टालता रहा। भास्कर ने "स्त्रीरोग विभाग ही नहीं चाहता कि लेबर रूम शुरू हो' शीर्षक से खबर प्रकाशित कर विभाग की हकीकत को उजागर किया।
आगामी दिनों में एमसीआई की टीम के निरीक्षण के पहले लेबर रूम प्रसूति वार्ड शुरू करने के लिए अस्पताल प्रबंधन के दबाव के बाद विभाग के अधिकारी लेबर रूम शुरू करने के लिए तैयार हो सके। इधर बीएमसी अधीक्षक सिविल सर्जन की इस मसले पर गत दिवस लंबी बैठक भी चली थी। इसके बाद जिला अस्पताल प्रबंधन बीएमसी में आपसी सहयोग से इसे शुरू करने पर सहमति बनी थी।
फिलहाल केवल सामान्य प्रसव होंगे: बीएमसी अस्पताल प्रबंधन के अनुसार गुरुवार से केवल लेबर रूम शुरू किया जा रहा है। शुरूआत में केवल यहां पर सामान्य प्रसव किए जा सकेंगे। टिपिकल मामलों एवं सीजर आदि के लिए प्रसूताओं को अभी भी जिला महिला अस्पताल (डफरिन) में ही भर्ती किया जाएगा। हालांकि एक से दो महीने के बीच व्यवस्थाएं पूरी होने के बाद कॉलेज में ही सामान्य प्रसव के साथ ऑपरेशन से प्रसव प्रारंभ किए जाएंगे।
य हदिक्कतें अभी भी आएंगी: मेडिकल कॉलेज में प्रसव तो शुरू किए जा रहे हैं, लेकिन कुछ तकनीकी व्यवहारिक परेशानी अभी भी सामने आएगी। इसमें सबसे बड़ी समस्या प्रसूताओं को लगने वाली दवाओं, फ्लूड, सिरिंज, इंजेक्शन, उपकरण की है। चूंकि करीब एक साल से कॉलेज में खरीदी बंद थी इस कारण फिलहाल सीमित मात्रा में दवाएं आर्डर की गई हैं। इसके अलावा 24 घंटे में इमरजेंसी ड्यूटी करने के लिए डॉक्टरों की समस्या भी बताई जा रही है। इसी तरह ट्रेंड नर्सिंग स्टाफ गायनी विभाग लेबर रूम के लिए ट्रेंड महिला जूनियर रेसिडेंट सीनियर रेसिडेंट डॉक्टरों का भी अभाव है।
सवाल यह भी उठाए जा रहे : बीएमसी में देर रात प्रसव के बाद यदि शिशु अंडर वेट रहता है तो उसे एसएनसीयू/ एनआईसीयू की सुविधा फिलहाल कॉलेज में नहीं है। प्रसव के तत्काल बाद शिशु का परीक्षण करने के लिए शिशु रोग विशेषज्ञ की भी जरूरत पड़ेगी। देर रात होने वाले प्रसव में यदि शिशु की क्रिटिकल स्थिति बनती है तो फिर डॉक्टर को कैसे बुलाएंगे। सेंट्रल ऑक्सीजन सप्लाई प्लांट भी फिलहाल बंद है। इनके अलावा एक और समस्या सामने आएगी जिसमें यदि महिला को भर्ती करने 8 से 12 घंटे बाद भी सामान्य प्रसव नहीं होता या बच्चा फंस गर्भ में फंस जाता है और तत्काल सीजर की आवश्यकता हो तो फिर क्या होगा।
लेबर रूम शुरू कर रहे हैं, समस्याएं भी सुलझा लेंगे
''गुरुवारसे लेबर रूम शुरू कर सामान्य प्रसव शुरू कर रहे हैं। शुरूआती तौर पर कुछ व्यवहारिक तकनीकी दिक्कतें तो आती ही हैं। हमारे पास विशेषज्ञ डॉक्टर हैं। क्रिटिकल स्थिति में डफरिन अस्पताल के सामंजस्य से केस हैंडिल करेंगे। हालांकि एक-दो महीने की बात है। हम सीजर भी शुरू करने जा रहे हैं।'' -डॉ. आरएस वर्मा, संयुक्त संचालक सह अधीक्षक, बीएमसी, सागर ।
बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज जिला महिला अस्पताल के सामंजस्य से शुरू हो रहा लेबर रूम
बीएमसी शुरू होने के 5 साल शुरू हो सकेगी प्रसूति सुविधा।
(इम्पैक्ट : 4 नवंबर को प्रकाशित खबर। )