सागर | कलेक्टोरेट की नई बिल्डिंग के लिए जिला प्रशासन ने दोबारा तैयारी शुरू की है। दिल्ली की एक आर्किटेक्ट फर्म से पीडब्ल्यूडी की पीआईयू शाखा ने नया नक्शा और डिजाइन तैयार कराया है। पुराने एसपी ऑफिस से पास खाली पड़े करीब 6 एकड़ के पठारी क्षेत्र में यह नया कॉम्पोजिट (समन्वित) कलेक्टोरेट डेवलप किया जाएगा।
डिजाइन-ड्राइंग के अनुसार नए परिसर की सभी बिल्डिंग्स ग्राउंड फ्लोर और दो मंजिला होंगी। भवन की लागत करीब 64 करोड़ रुपए आएगी। शासन इस प्रोजेक्ट के लिए पहले 17.58 करोड़ रुपए मंजूर कर चुका है, लेकिन अब भवन की संख्या एवं पहुंच मार्ग संशोधित होने के कारण यह लागत करीब चार गुना बढ़ गई है। पुराने प्रस्ताव में केवल कलेक्टोरेट में स्थित कार्यालयों को जगह दी जानी थी। नया प्रस्ताव कलेक्टर अशोक कुमार सिंह को औपचारिक रूप से दिखाया जा चुका है। कॉम्पोजिट बिल्डिंग के लिए चयनित भू-भाग में फिलहाल जिला खनिज शाखा का कार्यालय शुरू हो चुका है।
फोरलेन होगा पहुंच मार्ग : पीडब्ल्यूडी के अनुसार नई बिल्डिंग का डिजाइन कलेक्टर के अधीनस्थ आने वाले करीब 35 कार्यालयों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इन कार्यालयों तक पहुंचने के लिए डीजे बंगला से वीसी बंगला के बीच वाले मार्ग का चौड़ीकरण किया जाएगा। यह मार्ग 24 मीटर चौड़ा और फोरलेन पैटर्न पर बनेगा।
नई बिल्डिंग में मिलेगी इन 35 विभागों को जगह : कलेक्टर कार्यालय, जिला भू-अभिलेख शाखा, जिला निर्वाचन, नगर दंडाधिकारी, नजूल शाखा, एसडीएम, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, लोक सेवा की गांरटी अधिनियम, जिला बंदोबस्त, जिला कोषालय, रजिस्ट्रार, हाउसिंग बोर्ड, जिला रोजगार, आबकारी, आदिम जाति कल्याण, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, जिला व्यापार एवं उद्योग, कृषि, जिला शिक्षाधिकारी, जिला सतर्कता शाखा, जनसंपर्क। प्रपोजल के अनुसार इन सभी कार्यालय के बेसमेंट एवं शेड में वाहन पार्किंग की सुविधा होगी।
दूर-दराज और किराए के भवनों में चल रहे हैं ऑफिस
शहरमें कलेक्टोरेट परिसर की स्थापना आजादी के एक साल पहले 1946 में हुई थी। इसके बाद से परिक्षेत्र में इक्का-दुक्का भवनों को छोड़कर कोई नया भवन नहीं बना है। अंग्रेजों के जमाने में बने यह भवन अब जर्जर स्थिति में पहुंच चुके हैं। स्थिति यह है कि बारिश में यहां के अमूमन सभी कार्यालयों में पानी टपकने की स्थिति बन जाती है।
इसके अलावा सीधे आम नागरिकों से जुड़े सामाजिक न्याय, महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य, रोजगार, वाणिज्य एवं उद्योग, आदिम जाति कल्याण विभाग तथा तहसील ऑफिस एक-दूसरे से बहुत दूर-दूर हैं। इससे जहां नागरिकों को परेशानी होती है, वहीं जिला प्रशासन उनकी सही ढंग से मॉनीटरिंग नहीं कर पाता। यह सभी कार्यालय वर्तमान में किराए के भवन में चल रहे हैं। लिहाजा सरकार को हर महीने 5 से 7 लाख रुपए किराया निजी भवन स्वामियों को देना पड़ रहा है।
कलेक्टरकी अनुशंसा के बाद आगे भेजा जाएगा प्रस्ताव
''भवनका डीपीआर तैयार है। जिला प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद इस भवन के पुराने डिजाइन में परिवर्तन किया गया है। इससे लागत बढ़ी है। अब इस पूरे प्रोजेक्ट को कलेक्टर के समक्ष अनुशंसा के लिए रखा जाएगा। इसके बाद इसे ईएनसी पीआईयू (भवन) के समक्ष प्रशासकीय मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।'' -बीएस मरावी, ईई,पीआईयू डिविजन, पीडब्ल्यूडी, सागर
नया प्लान | कॉम्पोजिट कलेक्टोरेट बिल्डिंग के लिए नया प्रपोजल तैयार ।
- एकही जगह अधिकांश कार्यालय होने से नागरिकों को होगी सुविधा, मॉनीटरिंग भी सुधरेगी।
- प्रस्तावमंजूर हुआ तो डीजे बंगला से वीसी बंगला तक का रोड हो जाएगा फोरलेन।
(फाइल फोटाे वर्तमान कलेक्टोरेट)