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मेडिकल कॉलेज में रिकॉर्ड के इंतजार में नहीं खरीदी जरूरी दवाइयां

7 वर्ष पहले
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सागर। चिकित्साशिक्षा राज्य मंत्री एवं कमिश्नर के निर्देश के बाद भी बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में दवाओं की खरीदी नहीं की जा सकी। करीब एक साल से कॉलेज में दवाओं की खरीदी नहीं की गई है। वर्तमान में करीब 120 प्रकार की दवाओं का स्टॉक नहीं है।
बीएमसी में पिछले छह माह से दवाओं की कमी के चलते मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ओपीडी में डॉक्टरों द्वारा लिखी जाने वाली कुछ दवाओं को छोड़कर बाकी दवाइयां मरीजों को बाजार से खरीदना पड़ रही हैं। तीन महीने पहले करीब 80 से 90 प्रकार की दवाएं जिनमें इंजेक्शन, सीरप, टेबलेट का स्टॉक निल हो चुका था, जो दवाएं बची थीं वे भी लगभग खत्म हो गई हैं। बीएमसी अधिकारियों के मुताबिक वर्तमान में अस्पताल के दवा स्टोर में करीब 120 प्रकार की दवाएं नहीं हैं। जैसे-तैसे काम चल रहा है।

मंत्री तथा कमिश्नर दे चुके हैं निर्देश : पिछले महीने चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री शरद जैन की मौजूदगी में हुई बैठक के दौरान दवाओं की कमी का मामला उठा था। मंत्री ने प्राथमिकता से दवा खरीदी प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए थे। अफसरों ने बताया था कि दवाइयों की टेंडर प्रक्रिया की कमिश्नर कार्यालय से जांच चल रही है। सारा रिकॉर्ड जांच अधिकारी ने जब्त कर लिया था। इस कारण ऑर्डर नहीं कर पा रहे हैं। इस पर मंत्री ने रिकॉर्ड भी जल्द मिल जाने की बात कही थी। इसके बाद कॉलेज की एक्जीक्यूटिव कमेटी की बैठक में ईसी अध्यक्ष एवं प्रभारी कमिश्नर योगेंद्र शर्मा ने भी दवाइयों की खरीद करने के निर्देश दिए थे।

37की सूची, 27 उपलब्ध : राज्य सरकार की सरदार वल्लभ भाई पटेल नि:शुल्क औषधि वितरण योजना में अति आवश्यक दवाओं में 37 प्रकार की दवाइयों की सूची दी गई है। इसमें से वर्तमान में 10 तरह की दवाइयां अस्पताल में नहीं हैं। इनमें टेबलेट, सीरप शामिल हैं। केवल 25 तरह की दवाएं स्टॉक में मौजूद हैं। यदि आगामी दिनों में खरीदी नहीं की गई तो यह दवाएं भी खत्म हो जाएंगी। कुल मिलाकर दवाओं के मामले में बीएमसी की किसी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से भी बदतर स्थिति बन गई है। इस मामले में अस्पताल के अधीक्षक डॉ. आरएस वर्मा का कहना है कि यह सही है कि अस्पताल में दवाओं का काफी स्टॉक खत्म हो चुका है। दवाओं की खरीदी कॉलेज स्तर पर होती है। समय-समय पर हम डिमांड के साथ दवाओं के स्टॉक की जानकारी भी भेजते हैं। दवाओं की कमी से दिक्कत तो हो रही है।

इन बीमारियों की दवाएं नहीं हैं : सामान्य बीमारियां जिनमें शुगर, पेट से संबंधित रोग, गैस, दर्द निवारक, सर्दी-जुकाम, खांसी, किसी भी तरह की एलर्जी, नाक, कान, गले से संबंधित रोग, उल्टी-दस्त, मलेरिया, डायरिया, हृदय रोग, दिमागी बीमारी, त्वचा से संबंधित रोग, जोड़ों के दर्द, मस्तिष्क से संबंधित रोग, ओआरएस सहित अस्पताल के वार्डों में भर्ती मरीजों को लगने वाली बाटले, इंजेक्शन, एंटीबायोटिक्स, तथा अन्य सामान्य बीमारियों तथा गंभीर बीमारियों से संबंधित दवाएं कॉलेज में मौजूद नहीं हैं।

''दवाओं के मामले में टेंडर किए जा चुके हैं। कुछ शिकायतों के चलते कमिश्नर स्तर से टेंडर प्रक्रिया की जांच चल रही है। जांच अधिकारी ने क्रय शाखा का रिकॉर्ड जब्त किया है। रिकॉर्ड मिलने के तत्काल बाद खरीदी शुरू कर देंगे।'' -डॉ. एलपी वर्मा, डीनबीएमसी, सागर।
''टेंडरसे संबंधित जांच के लिए जो रिकॉर्ड जब्त किया गया था, उसमें से हमने जांच के लिए जरूरी दस्तावेजों से प्वाइंट्स नोट कर लिए हैं। रिकॉर्ड वापस ले जाने के लिए कॉलेज प्रबंधन को बता दिया था। रिकॉर्ड लेने कोई आया नहीं है। अभी फिर से उन्हें सूचना दे रहे हैं। ''-श्रीमती अर्चना सोलंकी, सिटीमजिस्ट्रेट एवं जांच अधिकारी, सागर।
चिकित्सा शिक्षा मंत्री के निर्देश पर भी अमल नहीं
- कॉलेजमें 120 प्रकार से ज्यादा की दवाइयों का टोटा।
- एकसाल से नहीं की गई है दवाइयों की खरीद ।
- बाजार से दवाइयां खरीदने मजबूर मरीज ।