(सागर . गोदाम खुलने के इंतजार में बाहर खड़े किसान।)
सागर। जिले में अब तक 12 हजार 463 टन यूरिया चुका है। पूरा यूरिया सागर के ही व्यापारियों और सोसायटी की गोदामों में रखा गया। बंटा भी। अब महज 937 टन यूरिया की ही आवश्यकता है। वहीं अधिकांश किसानों का कहना है कि उन्हें यूरिया मिला ही नहीं। जबकि पिछले वर्ष के मुकाबले इस साल गेहूं-चने का रकबा 50 हजार हैक्टेयर कम हो गया है।
मांग के मुकाबले यूरिया 2 हजार 436 टन ज्यादा आया है, तो फिर किसान परेशान क्यों? इतना सारा यूरिया गया कहां? किसानों का आरोप है कि दलालों की भेंट चढ़ गया। डेढ़ से दोगुना दामों में चंद धनाढ्य लोगों को यूरिया बेच दिया गया। मजबूर और लाचार किसान यूरिया लेने तो दूर उसके दर्शन करने तक को यहां-वहां भटक रहे हैं।
कृषि विभाग ने शहर में यह पता लगाने की कोशिश तक नहीं की है कि व्यापारियों का यूरिया कब, किस भाव से बेचा गया? यदि वे किसानों को यूरिया नहीं बेच रहे हैं तो कहां डंप कर रहे हैं? इसका जवाब भी किसी के पास नहीं है। आलम यह है कि इस वर्ष रवि फसल की बोवनी का जो टारगेट 502 लाख हैक्टेयर रखा गया था, वह सिर्फ 315 लाख हैक्टेयर तक ही पहुंच पाया है। इसमें अब ज्यादा वृद्धि की गुंजाइश भी नहीं है।
पिछले वर्ष से ज्यादा आया तो संकट क्यों?
जिलाविपणनअधिकारी एसएल धुर्वे के मुताबिक अब मांग और आपूर्ति में विशेष अंतर नहीं है। जिले में वर्ष 2011 से वर्ष 2013 तक हर साल 10 हजार टन यूरिया की खपत हुई है। इस बार तो रबी का रकबा भी कम है। यूरिया भी ज्यादा आया है, तो अब यूरिया का संकट क्यों है?
क्या कहते हैं जिम्मेदार
937टन की आवश्यकता है : उप संचालक कृषि एमएल चौहान की मानें तो कार्यालय के मुताबिक 13 हजार टन यूरिया की आवश्यकता है। इसमें से 12 हजार 463 टन यूरिया चुका है, जो सोसायटियों को 8128 टन और 4335 टन व्यापारियों को आवंटित हो चुका है। अब सिर्फ 937 टन की ही आवश्यकता है।
यूरिया चाहिए है तो दलालों से मिलो, 450 रुपए बोरी के भाव मिल ही जाएगा
किसानोंका कहना है कि नियमानुसार यूरिया की बोरी 290 रुपए में मिलना चाहिए। सोसायटी और एपी-एग्रो के गोदाम से हमें 290 रुपए में ही मिल तो जाता है, पर इस बार नहीं मिला। व्यापारियों के यहां भी ही सुनने को मिली है। भास्कर ने जब किसानों से पूछा कि कई किसानों को तो यूरिया मिल गया है, उन्हें कहां से मिला? बंडा तहसील के राख्शी गांव के भैयारामठाकुर तपाकसे बोल उठे- दलालों से। अभी भी मिल जाएगा पर 400 से 450 रुपए में। बात नहीं बनी तो 500 रुपए तक में। कई दलाल खुले आम गावों में जा-जाकर इस रेट पर यूरिया बेच भी रहे हैं। हम गरीब हैं, सो ले नहीं सकते। यूरिया डंप करके रखा गया है। इसे दलालों के द्वारा गांवों में बिकवाया जा रहा है।
कब बंट गया पता ही नहीं लगा : अधिकारियों के मुताबिक जिले की सोसायटियों में 8128 टन यूरिया भेजा गया है। पिछले पखवाड़े के ही भीतर 3800 टन यूरिया यहां आया है। ग्राम बरखुआ के किसान महाराजसिंह काकहना है कि यहां यूरिया अाया तो जरूर पर कब बंट गया, पता ही नहीं लगा। मुसीबत जहां की तहां बनी हुई है। कितना यूरिया किस सोसायटी में आया और किसे दिया, इसकी जानकारी तो समिति प्रबंधक देते हैं, ही सेल्समैन या अन्य जिम्मेदार।
किसी भी दुकान पर नहीं मिल रहा यूरिया : नगर की दुकानों पर यूरिया उपलब्ध नहीं है। किसी भी दाम पर। किसान मोल भाव करें या कुछ प्रलोभन दें। इससे बचने के लिए नगर की एक दुकान पर तो बाकायदा सूचना चस्पा कर दी गई है कि यूरिया नहीं है। बरोदा गांव से आए कृषक गुलाबचढ़ार नेबताया कि मैं हर एक व्यापारी के यहां यूरिया खरीदने गया, लेकिन सिर्फ यही जवाब मिला कि यूरिया नहीं है। जब रैक आएगा तब मिल पाएगा। यही उत्तर कई दिनों से हर एक को मिल रहा है।