- Hindi News
- अब निगम अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष के लिए जोड़ तोड़
अब निगम अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष के लिए जोड़-तोड़
नगरनिगम के महापौर और पार्षद तय होने के बाद अब निगम अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष के लिए राजनैतिक हल्कों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। विपक्षी दल कांग्रेस के 11 पार्षद जीते हैं। इनमें से सिविल लाइन से जीते अजय परमार सबसे वरिष्ठ हैं। वे चौथी बार पार्षद बने हैं तथा इसके पहले भी नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष रह चुके हैं। परमार का नेता प्रतिपक्ष बनना लगभग तय माना जा रहा है।
कांग्रेस के निवृतमान नेता प्रतिपक्ष चक्रेश सिंघई की प|ी संध्या सिंघई सहित कांग्रेस के सभी पार्षद पहली बार परिषद में पहुंचे हैं। निगम अध्यक्ष पद के लिए भाजपा के वरिष्ठ पार्षदों के नाम चर्चा में आए हैं। इनमें निवृतमान निगमाध्यक्ष विनोद तिवारी, राजबहादुर सिंह, नरेश यादव, राजेश केशरवानी आदि शामिल हैं। हालांकि अभी पार्टी के वरिष्ठ नेता दूसरे कामों में व्यस्त हैं और निगमाध्यक्ष के चुनाव के लिए भी बहुत समय है इसलिए इस पद के लिए कौन बाजी मारेगा अभी कहना मुश्किल है। जिले के दोनों मंत्रियों एवं शहर विधायक की सहमति जिसके पक्ष में होगी वही निगमाध्यक्ष की कुर्सी पर बैठ पाएगा, जो चार नाम फिलहाल उभरे हैं ये सभी तीन बार या उससे अधिक पार्षद बन चुके हैं। इन सभी का शहर विधायक शैलेंद्र जैन से राजनैतिक तालमेल बहुत अच्छा नहीं रहा है। इनमें से तिवारी एवं यादव को गोपाल भार्गव एवं राजबहादुर सिंह को भूपेंद्र सिंह का समर्थक माना जाता है। केशरवानी इन दिनों सांसद लक्ष्मीनारायण यादव से जुड़ गए हैं। राजबहादुर सिंह महापौर के टिकट के प्रबल दावेदार थे। इस कारण पार्टी की तरफ से निगमाध्यक्ष पद पर उनका एडजस्टमेंट किए जाने की चर्चाएं हैं। विधायक जैन के लिए समस्या यह है कि जीते हुए पार्षदों में उनके सभी समर्थक जूनियर हैं। सामान्यत: निगमाध्यक्ष पद के लिए किसी अनुभवी पार्षद को ही मौका दिया जाता है। इसके बावजूद वे अपनी तरफ से किसका नाम आगे बढ़ाते हैं, यह आने वाले कुछ दिनों में साफ हो पाएगा। जिनेश साहू एवं अनूप उर्मिल विधायक खेमे के हैं लेकिन दोनों खुद पहली बार पार्षद बने हैं। इसके पहले दोनों की प|ियां पार्षद थीं। इसके पहले महापौर पद अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित रहा इसलिए नगर निगम में जातीय गणित बैलेंस करने के लिहाज से निगमाध्यक्ष का पद उच्च वर्ग यानी ब्राम्हण को दिया जाता रहा है। वैसे इस बार भी महापौर पिछड़ा वर्ग से चुना गया है।