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मेडिकल कॉलेज में पहला शिशु ओपीडी गेट पर जन्मा

7 वर्ष पहले
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सागर। बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में प्रसव इकाई शुरू होने के एक दिन बाद शुक्रवार को यहां पहले शिशु ने जन्म लिया। ओपीडी के प्रवेश द्वार पर ही प्रसव हो गया। मौके पर मौजूद कर्मचारियों और नर्सिंग स्टाफ की तत्परता से कैजुअल्टी की ओपीडी में केस हैंडिल किया गया। हालांकि बच्चे को जिला अस्पताल के एसएनसीयू में रखा गया है। बंडा के जमुनिया गांव निवासी पन्नालाल की पत्नी लीलाबाई को परिजन सुबह करीब 12 बजे प्रसव के लिए मेडिकल कॉलेज लेकर आए थे। लीलाबाई ने जैसे ही कॉलेज में कदम रखा उसे प्रसव पीड़ा होने लगी। कुछ ही देर में ओपीडी गेट पर प्रसव हो गया।
हेल्प डेस्क पर मौजूद एमएसडब्ल्यू नीरज गोस्वामी ने टेबल पर बिछा चादर उठाकर महिला पर डाल दिया और मेट्रन श्रीमती गुलाब साहू को बुलवाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए मौके पर नर्सिंग स्टाफ और कर्मचारी चार स्ट्रेचर लेकर पहुंच गए। मेट्रन ने लीलाबाई नवजात को लेबर रूम के पास में स्थित कैजुअल्टी ओटी में भर्ती कराया। यहां स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. शीला जैन सहित आधा दर्जन स्टाफ ने केस हैंडिल किया। बच्चे को कुछ प्राब्लम होने पर आक्सीजन लगाई। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. आशीष जैन ने नवजात को जिला अस्पताल के एसएनसीयू में भर्ती करवाया है।
तत्काल मंगवाई दवाएं : अस्पताल प्रशासन ने आधी-अधूरी व्यवस्थाओं के साथ लेबर रूम शुरू कर दिया था। इसलिए पहले केस के लिए कैजुअल्टी में पहले से कोई तैयारी नहीं थी। केस की गंभीरता के चलते मेट्रन ने तत्काल खुद बाहर से कुछ इंजेक्शन जरूरी सामान की व्यवस्था की। हालांकि दोपहर तक लेबर रूम में सभी तरह की दवाएं, स्टाफ संसाधन उपलब्ध करा दिए गए।
जिलाअस्पताल फोन कर कहा- अब केस मत भेजो : बीएमसी में दोपहर बाद स्टाफ के हाथ-पांव फूलने लगे। कारण जिला अस्पताल से सुबह से लेकर दोपहर 2 बजे तक करीब 10 डिलीवरी के केस भेज दिए गए। इसमें एक महिला के गर्भ में बच्चा उल्टा था। इस कारण केस को वापस डफरिन अस्पताल भेज दिया गया।
इधर सागर के मढ़िया विट्ठलनगर निवासी राधाबाई पत्नी पवन पटेल, चिराई कोठी निवासी कल्पना का सामान्य प्रसव कराया गया था। तीनों प्रसूताओं ने स्वस्थ बच्चों को जन्म दिया। इसके अलावा दो महिलाओं को दोपहर तक प्रसव के लिए भर्ती किया गया था।
सभी केस जिला अस्पताल से भेजे जाने के कारण पहले दिन स्थिति बिगड़े इसलिए अस्पताल प्रबंधन ने सिविल सर्जन डफरिन अस्पताल के डॉक्टरों से बीएमसी में केस नहीं भेजने की बात कही। अस्पताल अधीक्षक डॉ. आरएस वर्मा का कहना था कि नया वार्ड या इकाई चालू करने में शुरूआत में कुछ दिक्कतें तो आती ही हैं।

बीएमसी में जन्मे पहले बच्चे का नाम रखा बुंदेलसिंह : बीएमसी में जन्मे पहले शिशु का नर्सिंग स्टाफ ने ही नामकरण किया। बच्चे का नाम बुंदेलसिंह रखा गया है। जब इसकी जानकारी परिजनों की दी तो वे भी खुश थे। पन्नालाल के अनुसार जब पता चला कि उसका बेटा बीएमसी में जन्म लेने वाला पहला बच्चा है तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा। बच्चे के नामकरण से भी वह खुश है।
नवजात के ताऊ गोविंद सिंह अहिरवार ने बताया कि बहू को जमुनिया गांव से 108 एंबुलेंस से जिला अस्पताल लाए थे। प्रसव का समय नजदीक होने के बाद भी डॉक्टरों ने बीएमसी भेज दिया। शुक्र रहा कि स्टाफ की तत्परता से उनकी बहू और बच्चा सकुशल है।
प्रसव इकाई का दूसरा दिन ।
(ओपीडी में मौजूद नर्सिंग स्टाफ की तत्परता से संभल गया मामला।)