एक्सीडेंट की जांच करें तो और कुछ भी सामने आ सकता है
तीन दिन पहले श्री दादा दरबार मंदिर के पास एक्सीडेँट हुआ था। जिसमें मनीषा लोधी नाम की एक युवती की यात्री बस के पहिए के नीचे आने से मौके पर ही मौत हो गई थी। यह मामला संदेह की ओर मुड़ रहा है।
गोपालगंज थाना पुलिस अपनी रुटीन कार्यप्रणाली के अनुसार इस केस को एक्सीडेंट का केस मान रही है। जबकि इसके पीछे की जांच की जाए तो मामला शायद कुछ और निकले। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है। क्योंकि मृतका मनीषा व मोटर साइकिल चालक महेंद्र यादव दोनों एक फर्जीवाड़े में आरोपी हैं। कोर्ट में उनका मामला चल रहा है।
कलेक्टर के फर्जी दस्तखत और सील के जरिए नौकरी पाई थी
मामले की तह में जाने के लिए करीब डेढ़ साल पीछे जाना होगा। खेजरामाफी गांव की रहने वाली मनीषा पति गौतम लोधी ने अक्टूबर 2014 में राहतगढ़ जनपद पंचायत कार्यालय में क्लर्क के पद पर ज्वाइनिंग दी थी। बाद में वेरिफिकेशन किया गया तो मालूम हुआ कि मनीषा ने जो ज्वाइनिंग लैटर दिया था। उस पर तत्कालीन कलेक्टर के फर्जी साइन थे। सील भी नकली थी। इस मामले में कलेक्टर ने राहतगढ जनपद सीईओ सिकंदर खान से जवाब तलब किया था। जिसके बाद राहतगढ़ थाने में मनीषा के खिलाफ धारा 420 का केस दर्ज कराया था। इसके बाद मनीषा ने ऑफिस जाना छोड़ दिया। मई 2015 में पुलिस ने उसे रायसेन के जमुनिया गांव थाना दीवानगंज से गिरफ्तार किया था।
पूछताछ में उसने बताया था कि ये फर्जी लैटर उसे एसडीएम कार्यालय राहतगढ़ में कम्प्यूटर ऑपरेटर के पद पर काम करने वाले महेंद्र यादव ने दिया था। इसकी एवज में उसने मुझसे 1 लाख रुपए लेना तय किया था। जिसमें से कुछ राशि मैं उसे दे चुकी थी।
महेंद्र के बयान संदिग्ध हैं
इस केस में महेंद्र के बयान संदिग्ध हैं। क्योंकि वह बता रहा है कि मनीषा ने टॉयलेट जाने के लिए बाइक रुकवाई थी। जबकि जहां घटना हुई है वहां दोनों तरफ कम से कम 200 मीटर तक ऐसी कोई जगह नहीं है जहां कोई युवती टॉयलेट के लिए जा सके। रोड के दोनों तरफ लाइन से सटे मकान बने हैं। इसके अलावा बताया था कि वह मनीषा को शहर के मुख्य बस स्टैंड से लेकर आया था। जबकि पुलिस को बयानों में उसने बताया है कि वह मनीषा को राहतगढ़ से लेकर आया था।
Ãमनीषा और महेंद्र कोर्ट में किस केस की पेशी करने जा रहे थे। इसकी मुझे जानकारी नहीं थी। लेकिन अब इस बारे में महेंद्र से पूछताछ की जाएगी। ये बात सही है कि घटनास्थल पर टायलेट के लिए कोई जगह नहीं है। फिर महेंद्र ने ऐसा क्यों बताया। ड्राइवर के बयान सही मानें तो फिर महेंद्र ने झूठ क्यों बोला। मामले की जांच जारी है। जल्द सच सामने आ जाएगा। - एएसआई जब्बार खान, जांच अधिकारी, गोपालगंज थाना, सागर
मनीषा के इस खुलासे के बाद पुलिस ने महेंद्र को भी इस फर्जीवाड़े में सह-आरोपी बनाया था। केस में चालान पेश हो चुका था। जिसके बाद इस प्रकरण में जिला न्यायालय में सुनवाई चल रही थी। सोमवार को घटना वाले दिन भी इसी केस की पेशी के लिए दोनों कोर्ट जा रहे थे। जहां कथित एक्सीडेँट में मनीषा की मौत हो गई।
ड्राइवर और महेंद्र के बयानों में बहुत अंतर है : मनीषा की मौत के बाद गोपालगंज थाने में महेंद्र ने जो बयान दिया है। उसमें बताया है कि मैं मनीषा को मुख्य बस स्टैंड से मोटर साइकिल पर बैठाकर ले जा रहा था। तभी श्री दादा दरबार मंदिर से कुछ पहले मनीषा ने कहा कि मुझे टॉयलेट जाना है। मैंने गाड़ी रोक दी। इसी दौरान बस आ गई। मनीषा का पैर फिसला और वह उसके नीचे आ गई। इधर इस केस में गिरफ्तार किए गए बस ड्राइवर सुरेश शर्मा उम्र 37 साल निवासी राजा बिलहरा का कुछ और कहना है। उसने बताया कि मैं बस लेकर आ रहा था। रास्ता संकरा होने के कारण महेंद्र की मोटर साइकिल का एक पहिया रोड से नीचे उतर गया। जिससे उसका बैलेंस बिगड़ गया। मनीषा बस की तरफ गिरी। जिससे वह कुचल गई। महेंद्र दूसरी तरफ गिरा। इसलिए उसे ज्यादा चोट नहीं आई।
मनीषा के साथ महेंद्र को भी बनाया था सह-आरोपी