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मेडिकल कॉलेज में दो साल के अंदर अस्तित्व में आ जाएगी वायरोलॉजी लैब

5 वर्ष पहले
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बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में आने वाले दो साल में प्रदेश स्तर की अत्याधुनिक वायरोलॉजी लैब अस्तित्व में आ जाएगी। शासन ने सागर और ग्वालियर में स्टेट लेवल की लैब स्वीकृत हुई है। जबकि प्रदेश के बाकी कॉलेजों में कॉलेज लेवल की वायरोलॉजी लैब बनेगी।

डीएमई भोपाल जीएस पटेल ने बताया कि चिकित्सा शिक्षा विभाग से लैब के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया था। प्रस्ताव स्वीकृत हो गया है। साथ ही लैब के लिए एमओयू भी साइन हो गए हैं। सागर और ग्वालियर के मेडिकल कॉलेज में स्टेट और बाकी कॉलेजों में कालेज लेवल की वायरोलॉजी लैब बनेगी। भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में नेशनल लेवल की लैब बन रही है। अगले दो साल में लैब बनकर तैयार हो जाएंगी। इन लैबों का जल्दी से जल्दी शुरू करने की योजना है। ताकि बुंदेलखंड सहित ग्वालियर के आसपास के इलाके के लोगों को वायरल बीमारियों की जांच के लिए भोपाल तथा अन्य शहरों में नहीं जाना पड़े। केंद्र और प्रदेश सरकार मिलकर इन लैबों की स्थापना करेगी। डीएमई के अनुसार स्टेट लेवल की एक वायरोलॉजी लैब खोलने में करीब 8 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। जबकि भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में 16 करोड़ रुपए की लागत से नेशनल लेवल की लैब तैयार कराई गई है।

सागर के मरीजों को यह फायदा मिलेगा : बीएमसी में वायरोलॉजी लैब खुलने के बाद स्वाइन फ्लू, डेंगू, इन्फ्लूएंजा, बर्ड फ्लू, इबोला, रैबीज वायरस, एचआईवी, रोटा वायरस, चिकनगुनिया सहित ऐसे तमाम रोगों का पता लगाने के लिए मरीजों को जांच कराने के लिए जबलपुर, ग्वालियर या भोपाल की लैबों में सेंपल नहीं भेजना पड़ेगा। अभी इन बीमारियों का पता लगाने के लिए सैंपल बाहर भेजे जाते हैं। इस कारण रिपोर्ट आने में दो से तीन दिन लग जाते हैं। सैंपल कलेक्ट करने और उसे सुरक्षित बाहर भेजने में भी काफी खतरा रहता है। लैब का फायदा सागर के अलावा छतरपुर, टीकमगढ़, दमोह जिलों के मरीजों को भी मिलेगा।

भोपाल की लैब तैयार

भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में नेशनल लेवल की वायरोलॉजी लैब तैयार हो चुकी है। निर्माण का काम पूरा हाे गया है। लैब के लिए मशीनों और अन्य सामग्री की खरीदी की जा रही है। इस साल यह लैब चालू हो जाएगी।

पहले से हैं प्रदेश में तीन लैब
प्रदेश के तीन शहरों में वायरोलॉजी लैब पहले से मौजूद हैं। इनमें ग्वालियर स्थित रक्षा विभाग की डीआरडी, जबलपुर स्थित पुरानी वायरोलॉजी लैब तथा पिछले साल अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल में स्वीकृत हुई लैब शामिल है। यह लैब वर्तमान में काम करने लगी है।

यह है वायरोलॉजी लैब
वायरोलॉजी लैब में ऐसी तमाम बीमारियाें की जांच की जाती है, जो वायरस से फैलती हैं। इन बीमारियों के मरीज से सैंपल लेकर वायरस के फैलने तथा उसको कंट्रोल करने के तरीके, उनका रेजिस्टेंट तथा किन दवाओं का उन पर असर होता है, आदि पर रिसर्च की जाती है। इससे उनका डायग्नोसिस बनाने में भी मदद मिलती है। इसमें ऐसे वायरस पर भी रिसर्च की जाती है, जिनकी दवा उपलब्ध नहीं है।

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