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एमसीआई का दौरा, मान्यता की उम्मीद

5 वर्ष पहले
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दिल्ली से मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) की दो सदस्यीय टीम बुधवार को सुबह करीब 9.30 बजे अचानक बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज पहुंच गई। दो हिस्सों में बंटी टीम ने अलग-अलग डीन ऑफिस, मेडिकल अस्पताल और कॉलेज से रूरल डेवलपमेंट सेंटर बंडा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का एक साथ निरीक्षण किया।

डीन ऑफिस और अस्पताल में दस्तावेज भी टीम ने खंगाले। टीम के अाने की सूचना डीएमई डॉ. जीएस पटेल ने एक दिन पहले ही बीएमसी के अफसरों को दे दी थी। लिहाजा रातों-रात निरीक्षण के लिए तैयारी कर ली गई थी। जरूरी कमियों को भी दूर कर लिया गया था। पहले ही एईआरबी से रेडिएशन के लिए ऑनलाइन आवेदन भी कर दिया गया था। अगले दिन सुबह तक कॉलेज टीम के निरीक्षण के लिए तैयार था। दो साल में टीम का बीएमसी में यह पांचवां दौरा है। चार मर्तबा टीम दौरा करने के बाद मान्यता देने से इंकार कर चुकी हैं। हालांकि इस बार कॉलेज प्रशासन को मान्यता मिलने की पूरी उम्मीद है।

टीम के सदस्य प्रोफेसर एसके चटर्जी तथा अल्फा तेज ने अस्पताल अधीक्षक डॉ. आरएस वर्मा तथा सहायक अधीक्षक डॉ. एसपी सिंह के साथ अस्पताल का निरीक्षण किया। इस दौरान अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाआें और आवश्यक संसाधनों का जायजा लिया गया। हड्‌डी रोग, प्रसूति, सर्जरी, ईएनटी, मेडिसिन, ओपीडी, ओटी काॅम्पलेक्स, केजुअल्टी, रेडियोलॉजी विभाग, वार्ड और सेंट्रल लैब में व्यवस्थाओं की जांच परख की गई। सुबह करीब 11 बजे टीम डीन ऑफिस पहुंची। यहां एनाटॉमी, माइक्रोबायोलॉजी विभाग, सेंट्रल लाइब्रेरी तथा पेथोलॉजी लैब का निरीक्षण किया। टीम ने डीन ऑफिस के कॉन्फ्रेंस हॉल में बीएमसी के प्रोफेसर्स, एसोसिएट प्रोफेसर्स, असिस्टेंट प्रोफेसर्स, एसआर, जेआर, सीएमओ, एमओ और अन्य कर्मचारियों की हेड काउंटिंग की। गैरमौजूद डॉक्टरों को फोन कर बुलाने में अफसर जुटे रहे। दोपहर करीब 3 बजे तक यह काम चलता रहा। कॉलेज, जिला अस्पताल तथा ग्रामीण अंचलों में पदस्थ डॉक्टर हेड काउंटिंग कराने के लिए कतार में खड़े नजर आए। सूने पड़े रहने वाले इस आॅफिस में भी काफी भीड़-भाड़ थी।

रिकॉल
साल 2015 में एमसीअाई की टीम बीएमसी का चार मर्तबा दौरा कर चुकी है। हर बार टीम ने कॉलेज को मान्यता देने से इंकार कर दिया। पहला दौरा टीम ने 2 मार्च 2015 को किया था। इस दौरे में 40 पेज की रिपोर्ट में टीम ने 22 बिंदुओं पर कमियां निकाली थीं। 27 अप्रैल 2015 को निरीक्षण किया था। 28 पेज की रिपोर्ट में टीम ने 15 बिंदुओं पर कमियां बताई थीं। हाईकोर्ट की फटकार पर 10 सितंबर और फिर 20 नवंबर को टीम कॉलेज का निरीक्षण करने आई थी। टीम ने दोनों ही बार कॉलेज में 13 बिंदुओं पर कमियां निकालकर मान्यता देने से साफ मना कर दिया था।

रातोंरात प्रमोट हुए 4 डॉक्टर
हेड काउंटिंग में एसोसिएट प्रोफेसर स्तर के डॉक्टरों की कमी नजर नहीं आए। इसलिए रातोंरात बीएमसी के चार असिस्टेंट प्रोफेसरों का प्रमोशन कर एसोसिएट प्रोफेसर बना दिया गया। इनमें फॉरेंसिक विभाग के डॉ. राजीव बांझल, पैथोलॉजी से डॉ. अमर गंगवानी, मेडिसिन विभाग से डॉ. अभय तिर्की तथा एनाटॉमी विभाग से सिद्धार्थ शंकर राय शामिल हैं। इनके आदेश बुधवार को एमसीआई की हेड काउंटिंग के दौरान जारी हो रहे थे।

सागर. बंुदेलखंड मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण करते एमसीआई टीम के सदस्य।

एक दिन पहले ही मिल गई थी सूचना, रातोंरात की गई थी दौरे की तैयारी
जिला अस्पताल से भी 58 डॉक्टर पहुंचे
फैकल्टी की कमी न हो इस लिहाज से जिला अस्पताल प्रबंधन ने भी अपने 47 डॉक्टर बीएमसी भेजे। सिविल सर्जन डॉ. इंद्राज सिंह बारी-बारी से डॉक्टरों को मेडिकल कॉलेज भेजते रहे। ताकि अस्पताल की व्यवस्थाएं भी न बिगड़ें और एमसीआई के सामने हेड-काउंटिंग भी हो जाए।

Ãइस बार हमने एमसीआई द्वारा बताई गई सारी कमियां दूर कर ली हैं। डेफिशियेंसी अब जीरो हो गई है। इस बार मान्यता मिलने की उम्मीद है। - डॉ. आरएस वर्मा, अधीक्षक बीएमसी अस्पताल, सागर

Ãहमने शुरू से ही कॉलेज को मान्यता दिलाने के पूरे प्रयास किए हैं। कॉलेज को मान्यता काफी पहले मिल जाना थी। यह बात अलग है कि कमियां दूर करने में वक्त लग गया। अब हम कमियां पूरी कर चुके हैं। इस बार कॉलेज को मान्यता मिल जाएगी। एमसीआई द्वारा बताई गई सीटी स्कैन, ह्यूमन रिसोर्स और फैकल्टी की कमी दूर करने के लिए 53 नए लोगों को नियुक्त किया गया है। 1 एक्स-रे मशीन के लिए एईआरबी मुंबई से लाइसेंस मिल गया है। दूसरी मशीन के लिए भी आवेदन किया है। इसे वहां से अप्रूव कर दिया गया है। शाम तक इसका लाइसेंस भी आ सकता है। - डॉ. जीएस पटेल, डीएमई, भोपाल

कब-कब किया एमसीआई ने बीएमसी का दौरा

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