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घर से कोचिंग निकले थे, विवि जंगल में पकड़े छात्र-छात्राएं

5 वर्ष पहले
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प्रॉक्टोरियल बोर्ड ने जैसे ही छात्र-छात्राओं को पकड़ा तो वह रोने लगे। काफी पूछताछ के बाद उन्होंने यह बताया कि वे कहां पढ़ते हैं। कुछ देर बाद अभिभावकों के नाम व नंबर भी दिए। अभिभावकों के सामने भी सभी रोते रहे, ज्यादा कुछ नहीं कहा। बोर्ड द्वारा पूछने पर एक छात्र ने सिर्फ इतना बताया कि चॉकलेट खिलाने हम यहां आए थे। इससे ज्यादा कोई कुछ नहीं बोल सका।

सुरक्षाकर्मियों की भूमिका पर सवाल : विश्वविद्यालय में लाखों रुपए खर्च कर लगाई गई राज्य औद्योगिक सुरक्षा बलों की भूमिका एवं उनकी कर्तव्य निष्ठा पर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। अजनबी विद्यार्थी बिना अनुमति के कैंपस के अंदर रोज आते-जाते रहे और गेट पर मौजूद जवानों को कुछ पता ही नहीं लगा। इससे पहले भी कैंपस के घरों में चोरी, जंगल एवं विभागों के सामने से चंदन के पेड़ों की कटाई जैसी घटनाएं हो चुकी हैं।

भास्कर संवाददाता | सागर

डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय कैंपस के जंगल में बुधवार को स्कूली छात्र-छात्राओं को पकड़ा गया है। कक्षा 10वीं एवं 12वीं में पढ़ने वाले दो छात्र एवं दो छात्राएं घर में कोचिंग और प्रैक्टिकल का बोलकर निकले थे। प्रॉक्टोरियल बोर्ड ने इन्हें पकड़कर न सिर्फ उन्हें नैतिकता का पाठ पढ़ाया, बल्कि मौके पर ही अभिभावकों को बुलाकर उनके सुपुर्द कर दिया। इसके बाद यह छात्र-छात्राएं बोल तो कुछ नहीं सके, पर रो-रो कर अपने आसुंओं से यह जरूर बयां कर दिया कि उन्होंने न सिर्फ बढ़ी गलती की है, बल्कि अपने अभिभावकों के भरोसे को भी तोड़ा है। प्रॉक्टर प्रो. एपी दुबे ने बताया कि चेतावनी देकर उन्हें अभिभावकों के सुपुर्द कर दिया गया था।

रोजाना एक से दो घंटे रुकते थे : यह छात्र और छात्राएं अक्सर यहां आया करते थे। आए दिन दोपहर में उनकी गाडिय़ां कैंपस में खड़ी दिखती थीं। कैंपस में रहने वालों ने ही इस बात को नोटिस किया और प्रॉक्टोरियल बोर्ड में सूचना दी। इसके बाद इन पर विशेष ध्यान रखा गया। बुधवार को दोपहर में जैसे ही यह लोग आए तो सूचना पाकर मौके पर पहुंचे प्रॉक्टर एवं अन्य सदस्यों ने उन्हें पकड़ लिया। एक छात्र और छात्रा तो तुरंत पकड़ में आ गए, पर दूसरे अपने जूते-चप्पल छोड़कर नाले में घुस गए, जिन्हें कुछ ही देर में पकड़ लिया गया।

स्कूल अलग, कोचिंग में साथ : पकड़ी गई छात्राओं में से एक इंग्लिश मीडियम तो दूसरी हिंदी मीडियम स्कूल की थी। छात्र भी अलग-अलग स्कूलों के थे। बताया गया है कि यह एक ही कोचिंग में आते हैं। रोजाना कोचिंग और स्कूल से गोल मारकर यह विवि आते थे।

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