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आग से झुलसी युवती के गर्भस्थ शिशु को भी खतरा
मां और बच्चे की जान बचाने की चुनौती
नगर संवाददाता. सागर
चिमनी की आग से झुलसी युवती और उसके गर्भ में पल रहे 8 माह के शिशु दोनों को खतरा बना हुआ है। जिला अस्पताल में सीमित साधनों के बीच दो जान बचाने की जद्दोजहद चल रही है। डॉक्टरों के सामने एक चुनौती यह है कि युवती गर्भवती होने के कारण उसे नार्मल सलाइन के तहत ग्लूकोज प्रोटीन कम मात्रा में ही दे पा रहे हैं। आमतौर पर आग से झुलसे मरीज के शरीर में इन तत्वों की कमी हो जाती है। इसलिए मरीज को रि-कवर करने के लिए उसे ज्यादा से ज्यादा ग्लूकोज प्रोटीन दिया जाता है।
शहर से सटे बम्होरी बीका गांव में शुक्रवार की सुबह 22 वर्षीय मनीषा पति कृष्णा अहिरवार 80-90 फीसदी झुलस गई थी। जानकारी के अनुसार घर के अंदर रखी चिमनी से प्लास्टिक की तिरपाल ने आग पकड़ ली थी, जिससे मनीषा के कपड़े जल गए। तब वह घर पर अकेली थी। पति कृष्णा ने बताया कि वह घर के पास कुएं पर था। चीख-पुकार सुनकर जब घर पहुंचा तो मनीषा आग लपटों से घिरी हुई थी। मैंने पानी से आग बुझाने की कोशिश की। कुछ देर बाद 108 एएलएस एंबुलेंस के डॉ. ऋषिराज चालक बाबूलाल अहिरवार ने मौके पर पहुंचे और इलाज शुरू करते हुए उसे जिला अस्पताल भिजवाया। पति कृष्णा ने बताया कि उनकी 2 साल पहले शादी हुई थी। मनीषा का मायका गढ़ाकोटा में है। वह मजदूरी करता है।
मांको बचाना हमारी प्राथमिकता
^मनीषाकी हालत बेहद नाजुक है। उसके गर्भस्थ शिशु को भी हर पल खतरा है। मां को बचाना हमारी प्राथमिकता है। इसी दिशा में इलाज चल रहा है। उसे इन्फेक्शन का भी खतरा है। -डॉ. अमिताभ जैन, प्रभारीसिविल सर्जन