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मानव साक्ष्य की विश्वसनीयता कम हो रही है : डीजे
सागर. एफएसएलमें अपराध अन्वेषण में फोरेंसिक साक्ष्य की भूमिका पर आधारित विशिष्ट प्रशिक्षण कार्यक्रम शनिवार से शुरू हुआ। मुख्य अतिथि जिला एवं सत्र न्यायाधीश एचपी सिंह थे। उन्होंने कहा कि मानव साक्ष्य की विश्वसनीयता कम हो रही है। अपराधी नित नए और आधुनिक तकनीकों का प्रयोग करने लगे हैं। ऐसी स्थिति में न्यायपालिका का भरोसा अपराध के वैज्ञानिक विश्लेषण पर बढ़ता जा रहा है। डीजे ने कहा कि न्यायाधीश निर्णय देते समय फोरेंसिक रिपोर्ट पर पूरा भरोसा कर सकते हैं। एफएसएल के निदेशक एसके तिवारी ने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम का अंतिम बैच है। इसमें एक स्पेशल जज एवं 39 एडीजे स्तर के न्यायिक अधिकारी शामिल हुए हैं। प्रथम बैच जनवरी 2012 में शुरू हुआ था। इस अवसर पर वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. पंकज श्रीवास्तव, डॉ. एसएस ठाकुर, राज श्रीवास्तव आदि ने प्रजेंटेशन प्रस्तुत किए। संचालन डॉ.ज्योत्सना पांडे डॉ. स्वाति श्रीवास्तव ने किया। कार्यक्रम का समापन 22 सितंबर को होगा।