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खांसी का इलाज कराने आई प्रसूता की मौत

6 वर्ष पहले
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{ एक घंटे तक नहीं बताया कि प्रसूता की मौत हो गई है

{ स्वाइन फ्लू की आशंका, सैंपल जांच के लिए भेजे जाएंगे

हैल्थरिपोर्टर | सागर

पांचमाह की गर्भवती महिला को खांसी की शिकायत के चलते मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराना परिजनों काे इतना भारी पड़ गया कि घंटे भर में ही महिला की जान चली गई। परिजनों को इसकी जानकारी करीब एक घंटे बाद दी गई। परिजनों का आरोप है कि महिला को डॉक्टरों ने नहीं देखा और नर्सिंग स्टाफ ने इलाज में लापरवाही बरती। शाहगढ़ निवासी विजय सिंह राजपूत की प|ी सोनम (22) को पांच माह का गर्भ था। उसे दो-तीन दिन से खांसी चल रही थी। सुबह शाहगढ़ के सरकारी अस्पताल में दिखाया तो डॉक्टर ने सागर ले जाने की सलाह दी। विजय उनकी मां लक्ष्मीबाई, बड़े भाई नीरज जननी एक्सप्रेस से सोनम को लेकर सुबह करीब 7.15 बजे बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज पहुंचे। यहां कैजुअल्टी में परीक्षण के बाद महिला को प्रसूता इकाई में भर्ती करा दिया गया। इकाई में मौजूद स्टाफ ड्यूटी पर मौजूद जूनियर डॉक्टर ने सोनम का इलाज शुरू किया। नर्स ने उसे बाटल इंजेक्शन दिए। करीब 10 बजे डॉक्टरों ने कुछ पर्चे देकर दवा लाने का बोला। बाद में पता चला कि सोनम की मौत हो गई है। सोनम की साढ़े चार साल की बेटी भी है।

दोदिन पहले जांच कराई थी, सबकुछ ठीक था : सोनमके पति विजय राजपूत जेठ नीरज राजपूत ने बताया कि सोनम को खांसी के अलावा कोई तकलीफ नहीं थी। दो दिन पहले भी जांच कराई थी। सब कुछ ठीक-ठाक था।

मेडिकल कॅालेज में पहले तो कोई डॉक्टर ही नहीं मिला। नर्सों ने बाटल इंजेक्शन लगाए। तबियत बिगड़ने पर भी हमें नहीं बताया। नीरज के अनुसार नर्सों ने हमें बाहर कर दिया था। जब सोनम के पास जाने की बात कही तो कहा कि तुम्हारी मरीज सो रही है। परेशान मत करो और चिल्लाकर हमें बाहर भगा दिया। बाद में दूसरे लोगों ने बताया कि परिजनों को बुला लो। तुम्हारी बहू की तबियत ज्यादा खराब है। करीब 11 बजे बताया गया कि सोनम की मौत हो गई।

जान से खिलवाड़ करते हैं डॉक्टर

मामलेकी जानकारी लगने पर बंडा विधायक हरवंश सिंह राठौर बीएमसी अस्पताल पहुंचे और परिजनों से मामले की जानकारी ली। बाद में वे अधीक्षक डॉ. आरएस वर्मा से मिले और कहा कि आपके अस्पताल में हद से ज्यादा लापरवाही हो रही है। डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। खांसी से पीड़ित महिला की अचानक कैसे मौत हो गई। इसकी जांच कराई जाए। डॉ. वर्मा ने मामले में जांच का आश्वासन दिया है। बाद में श्री सिंह ने अस्पताल में मरीजों के इलाज में हो रही लापरवाही के संबंध में कमिश्नर आरके माथुर को भी जानकारी दी।

पोस्टमार्टम के बाद

स्थिति स्पष्ट होगी

इलाजके दौरान सोनम की मौत के बाद गर्माए मामले के बाद बीएमसी के डॉक्टरों की सलाह पर परिजन पोस्टमार्टम कराने के लिए तैयार हो गए। दोपहर में महिला के शव को जिला अस्पताल के पीछे स्थित पोस्टमार्टम हाउस पहुंचा दिया गया। पुलिस की कार्रवाई के दौरान सोनम के मायके पक्ष से कोई भी परिजन मौजूद नहीं था, इसलिए अब पोस्टमार्टम शुक्रवार सुबह किया जाएगा। जब मायके पक्ष से परिजन जाएंगे।

डॉक्टरों ने ही भर्ती किया था

Ãमहिलाको खांसी की शिकायत थी। लेबर रूम में मेडिसिन विभाग के जूनियर डॉक्टर सुयश सिंघई ने उसका चैकअप किया था। तत्काल इलाज शुरू कर दिया गया। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. शीला जैन भी पहुंच गई थी। उसे ऐसी कोई खास परेशानी भी नहीं थी। सोनम की मौत में शुरुआती तौर पर जो कारण निकल कर सामने आया है, उसमें उसकी श्वांस नली अवरुद्ध होना बताया गया है। हालांकि पोस्टमार्टम के बाद स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। डॉक्टर या नर्स ने तो इलाज शुरू कर दिया था। खांसी के इलाज में बाटल या इंजेक्शन लगाने से मौत कैसे हो सकती है। -डॉ. एसपी सिंह, सहायक अधीक्षक, बीएमसी, सागर

स्वाइनफ्लू के लिए सैंपल भेज रहे हैं

Ãमहिलाको पिछले कई दिनों से खांसी चल रही थी। निमोनिया की शिकायत का अंदेशा भी है। महिला के कल्चर और स्वाब का सैंपल सीएमएचओ के माध्यम से जांच के लिए जबलपुर भिजवा रहे हैं। महिला के भर्ती होने के बाद हमें जांचे कराने तक का मौका नहीं मिला। -डॉ. आरएस वर्मा, संयुक्त संचालक, बीएमसी सागर

{ एक घंटे तक नहीं बताया कि प्रसूता की मौत हो गई है

{ स्वाइन फ्लू की आशंका, सैंपल जांच के लिए भेजे जाएंगे

हैल्थरिपोर्टर | सागर

पांचमाह की गर्भवती महिला को खांसी की शिकायत के चलते मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराना परिजनों काे इतना भारी पड़ गया कि घंटे भर में ही महिला की जान चली गई। परिजनों को इसकी जानकारी करीब एक घंटे बाद दी गई। परिजनों का आरोप है कि महिला को डॉक्टरों ने नहीं देखा और नर्सिंग स्टाफ ने इलाज में लापरवाही बरती। शाहगढ़ निवासी विजय सिंह राजपूत की प|ी सोनम (22) को पांच माह का गर्भ था। उसे दो-तीन दिन से खांसी चल रही थी। सुबह शाहगढ़ के सरकारी अस्पताल में दिखाया तो डॉक्टर ने सागर ले जाने की सलाह दी। विजय उनकी मां लक्ष्मीबाई, बड़े भाई नीरज जननी एक्सप्रेस से सोनम को लेकर सुबह करीब 7.15 बजे बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज पहुंचे। यहां कैजुअल्टी में परीक्षण के बाद महिला को प्रसूता इकाई में भर्ती करा दिया गया। इकाई में मौजूद स्टाफ ड्यूटी पर मौजूद जूनियर डॉक्टर ने सोनम का इलाज शुरू किया। नर्स ने उसे बाटल इंजेक्शन दिए। करीब 10 बजे डॉक्टरों ने कुछ पर्चे देकर दवा लाने का बोला। बाद में पता चला कि सोनम की मौत हो गई है। सोनम की साढ़े चार साल की बेटी भी है।

दोदिन पहले जांच कराई थी, सबकुछ ठीक था : सोनमके पति विजय राजपूत जेठ नीरज राजपूत ने बताया कि सोनम को खांसी के अलावा कोई तकलीफ नहीं थी। दो दिन पहले भी जांच कराई थी। सब कुछ ठीक-ठाक था।

मेडिकल कॅालेज में पहले तो कोई डॉक्टर ही नहीं मिला। नर्सों ने बाटल इंजेक्शन लगाए। तबियत बिगड़ने पर भी हमें नहीं बताया। नीरज के अनुसार नर्सों ने हमें बाहर कर दिया था। जब सोनम के पास जाने की बात कही तो कहा कि तुम्हारी मरीज सो रही है। परेशान मत करो और चिल्लाकर हमें बाहर भगा दिया। बाद में दूसरे लोगों ने बताया कि परिजनों को बुला लो। तुम्हारी बहू की तबियत ज्यादा खराब है। करीब 11 बजे बताया गया कि सोनम की मौत हो गई।