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निगम के पास नहीं जीआईएस सर्वे का डाटा, ठेकेदार को 45 लाख 17 हजार का भुगतान
शहर के आधे वार्डों में हुआ था अाधा-अधूरा सर्वे
ठेकेदार ने पेेमेंट लिया पर निगम को नहीं दिया डाटा
राजकुमार प्रजापति | सागर
साल 2007 में नगर निगम द्वारा अर्बन प्लानिंग व सैटेलाइट इमैज के जरिए संपत्तिकर के निर्धारण के उद्देश्य से जीआईएस सर्वे कराया था। इस काम को करने वाली कंपनी आभा कंसल्टेंसी ने शहर के आधे वार्डों का ही आधा-अधूरा सर्वे करने के बाद अधिकारियों से सेटिंग कर तीन किश्तों में 45 लाख 17 हजार रुपए का भुगतान ले लिया। आज भी निगम के पास सर्वे का कोई डाटा उपलब्ध नहीं है। सर्वे में गड़बड़झाला करने वाली इसी कंसल्टेंट कंपनी ने राजीव आवास व हाउसिंग फॉर ऑल की डीपीआर भी तैयार की है। इनमें भी कई गंभीर खामियां हैं।
सागर की आभा कंसल्टेंसी ने एसजीएस इंफोटेक गुड़गांव की कंपनी के सहयोग से जीआईएस सर्वे के लिए निविदा डाली थी। यह पूरा काम करीब 67 लाख से 5 साल में पूरा होना था। कंपनी के पास न तो कोई एक्सपर्ट थे न ही सैटेलाइट इमैज। निगम के अधिकारियों को टैक्नीकल ज्ञान न होने के कारण कंपनी ने गूगल अर्थ की इमैज से सर्वे शुरू कर दिया। 2007 में केवल 8 वार्डों का डाटा कलेक्शन हुआ था। कंपनी के पास सॉफ्टवेयर इंप्लीमेंट ट्रेनिंग की कोई सुविधा नहीं थी। समयावधि में यह काम पूरा नहीं किया गया।
संपत्तिकर के निर्धारण के लिए नहीं मिला डाटा : पिछले साल निगम ने संपत्तिकर के निर्धारण के लिए जीआईएस सर्वे का डाटा तलाशा, लेकिन नहीं मिला। जीआईएस एक्सपर्ट ने इस संबंध में निगम कमिश्नर को पत्र लिखकर जानकारी दी कि डाटा की डीवीडी संबंधित कंपनी के ही पास है। वह निगम को उपलब्ध नहीं कराई गई। कुछ वार्डों के सर्वे फार्म ही निगम में रखे हुए हैं।
निगम का भ्रष्टाचार
अधिकारियों ने गलत मेप पर कर दिया पेमेंट
सर्वे करने वाले कंसल्टेंट अनुराग सोनी की निगम के तत्कालीन अधिकारियों से तगड़ी सेटिंग थी। पूर्व निगम कमिश्नर एसबी सिंह के कार्यकाल में गलत मेप पर सर्वे के बावजूद उसे भुगतान कर दिया गया। भुगतान को लेकर विधानसभा तक मामला पहुंच गया। लगातार आपत्तियों के बाद कंसल्टेंट ने सैटेलाइट इमैज मंगा ली थी, लेकिन सर्वे आज तक पूरा नहीं हुआ न ही उसका कोई रिकॉर्ड निगम के पास है।
सर्वे पूरा नहीं किया तो रोक देंगे राजीव अावास, हाउसिंग फॉर आल का पेमेंट
महापौर अभय दरे का कहना है कि आभा कंसल्टेंसी को जीआईएस सर्वे को पूरा करने व निगम को इसका शत प्रतिशत डाटा उपलब्ध कराने को कहा है। यदि कंपनी ने सर्वे पूरा नहीं किया तो उसका राजीव आवास तथा हाउसिंग फॉर ऑल योजना की डीपीआर का पेमेंट रोक देंगे। निगम कमिश्नर कौशलेंद्र विक्रम सिंह का कहना है कि कंपनी के पास कुछ डाटा है। कंसल्टेंट से उनकी इस संबंध में बात हुई है।
कुछ लोग नहीं चाहते कि सर्वे के आधार पर कर निर्धारण हो
कंसल्टेंट अनुराग सोनी का कहना है कि उनकी कंपनी ने जीआईएस सर्वे का काम पूरी ईमानदारी के साथ किया है। इसी के आधार पर उन्हें आगे काम मिला। मैं सभी 48 वार्डों के सर्वे का पूरा डाटा उपलब्ध करा सकता हूं। सर्वे का अभी कुछ भुगतान भी बाकी है। सर्वे सैटेलाइट इमैज के जरिए ही कराया गया था। कुछ लोग नहीं चाहते थे कि जीआईएस सर्वे के अाधार पर संपत्तिकर का निर्धारण हो, इसलिए डाटा में खामियां गिनाने लगे।
कब-कब हुआ भुगतान
वर्ष 2007 13,94,616
वर्ष 2008 21,72,580
वर्ष 2009 9,50,000