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बालक आदिकुमार के जन्म पर हुईं बधाईंयां, अभिषेक में झूमे श्रद्धालु

5 वर्ष पहले
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संत शिरेामणि जैनाचार्य विद्यासागर महाराज के ससंघ सानिध्य में टडा़ में चल रहे श्री मज्ज्रिेंद्र जिनविंब पंच कल्याणक गजरथ महोत्सव के तहत सोमवार को तीर्थंकर बालक आदिकुमार के जन्म पर जमकर बधाईयां हुई। दोपहर में ऐरावत हाथी पर आदिकुमार को विराजमान कर पांडुक शिला पर प्रथम अभिषेक हुआ।

पंच कल्याणक में सुबह सवा 6 बजे तीर्थंकर बालक आदिकुमार का जन्म हुआ। जन्म के बाद इंद्र इंद्राणियों द्वारा बधाईयां प्रस्तुत की गई। दोपहर में ऐरावत पर आदिकुमार को विराजमान कर पांडुक शिला पर प्रथम अभिषेक सौधर्म इंद्र विवेक मोदी द्वारा प्रथम अभिषेक किया गया। उसके पश्चात शचि इंद्राणी प्रियंका मोदी द्वारा आदिकुमार को वस्त आभूषण पहनाए गए। भगवान के पिता नाभिराय बने जिनेंद्र गोयल और कुबेर बने संजय चौधरी ने भी पांडुक शिला पर सौधर्म इंद्र के साथ आदिकुमार का अभिषेक किया। दोपहर में मुनिश्री योगसागर महाराज और मुनिश्री श्रमासागर महाराज के मंगल प्रवचन हुए। टडा़ में नव निर्मित जिनालय में अपरांह में खड्गासन चौबीसी की मूर्तियों को विराजमान कराया गया और मूलनायक भगवान महावीर स्वामी की प्रतिमा पद्मासन में विराजमान है।

महोत्सव में आज होगा तप कल्याणक :

मुनि सेवा समिति के सदस्य मुकेश जैन ढाना ने बताया कि मंगलवार को तप कल्याणक मनाया जाएगा। सुबह पात्र शुत्रि नित्य पूजा, जन्म कल्याणक पूजा, आचार्यश्री का पूजन एवं प्रवचन होंगे। सुबह 9.30 बजे आदिकुमार का पाणिग्रहण संस्कार होगा। दोपहर में महाराज नाभिराय का दरबार में आदिकुमार का राज्य अभिषेक राजतिलक और राज्य व्यवस्था सौंपी जाएगी। 32 मुकुटबद्ध राजाओं द्वारा भेंट के बाद नीलांजना नृत्य होगा। जिसके पश्चात वैराग्योत्पत्ति लोकांतिक देवों द्वारा स्तवन, दीक्षा वन प्रस्थान, तप कल्याणक क्रियाएं होगी। दोपहर में आचार्यश्री के प्रवचन होंगे।

वात्सल्य सम्यक दर्शन का अंग होता है : आर्यिका तपोमति माताजी
सागर। आचार्यश्री का जब पदार्पण होता है तो उस समय नर नारी का मन प्रफुल्लित होता है। शिल्पी ने मूर्ति तो बना दी पर भगवंत तो आचार्यों के द्वारा दी जाती है सूर्यमंत्र द्वारा। संतों में वात्सल्य प्रेम होता है जो सम्यक दर्शन का वात्सल्य अंग है। यह बात आर्यिका तपोमति माताजी ने दो संघों के मिलन के दौरान सोमवार को अंकुर कॉलोनी में आयोजित धर्मसभा में कही। उन्होंने कहा जब साधरमी का मिलन होता है तो रोमांचित क्षण होते है। रोम-रोम पुलकित होता है। आचार्य उमा स्वामी स्वामी ने तत्वार्थ सूत्र में लिखा है वन्दे तद्गुण लब्धे, आप के पास जो भी गुण है। मुझे भी प्राप्त हों। राही शब्द विलोम रूप से हीरा होता है। जो संयम का राह चलता है वो होता है हीरा ये है। आर्यिका वृषभमति माता जी ने कहा कि दीक्षा नहीं ले पाए कोई बात नहीं पर दीक्षा उत्सव मना लेना। आर्यिका तपोमति माताजी 30 दीक्षा दिवस अंकुर कालोनी में मनाया जाएगा।

टड़ा में चल रहे पंचकल्याणक महोत्सव में बधाईयां गाती समाज की महिलाएं।

इनसेट : पांडुक शिला पर आदिकुमार का प्रथम अभिषेक करते भक्तजन।

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