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बैंक ने नीलामी में बेचा पहले से बिका हुआ प्लाॅट

6 वर्ष पहले
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पहले से बिके हुए प्लाॅट पर दिया था कर्ज, नीलामी के बाद सामने आया दोहरी ठगी का मामला

सिटीरिपोर्टर | सागर

अगरआप बैंक अन्य या किसी संस्था से नीलामी के जरिए चल-अचल संपत्ति खरीद रहे हों तो पहले उसके स्वामित्व या वैधता संबंधी कागजातों की अच्छे से पड़ताल कर लें। ऐसा नहीं हो कि आप जो संपत्ति खरीद रहे हो, नीलामकर्ता संस्था के पास उसका वैधानिक स्वामित्व ही हो। शहर में एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जिसमें एक राष्ट्रीयकृत बैंक ने पहले तो बिके हुए प्लाॅट को गिरवी रखकर लोन दे दिया। जब लोन की वसूली नहीं हुई तो उसी प्लाॅट को नीलाम कर एक अन्य व्यक्ति को बेच दिया। अब ये खरीदार प्लाॅट पर कब्जा लेने नामांतरण कराने के लिए कभी बैंक तो कभी तहसीली के चक्कर काट रहा है।

बैंकने रखा था दो साल पहले बिका हुआ प्लाॅट गिरवी : मई2013 में इलाहाबाद बैंक की कटरा बाजार शाखा ने मकरोनिया निवासी राहुल पांडे को रजाखेड़ी स्थित 900 वर्गफुट का प्लाॅट नीलामी में बेचा। राहुल ने 4.32 लाख रुपए की अधिकतम बोली लगाकर बैंक यह प्लाॅट लिया। जब वह प्लाॅट के नामांतरण के लिए तहसील पहुंचे तो जानकारी मिली कि यह प्लाॅट 2004 के बाद अन्य व्यक्तियों को बेचा जा चुका है। और गहराई से जानकारी ली तो पता चला कि प्लाॅट को इलाहाबाद बैंक में गिरवी रखने वाले निकेश अनंदीकर ने इसे वर्ष 2004 में किसी अन्य व्यक्ति को बेच दिया था। इसके बाद उसने इस बिके हुए प्लाॅट पर बैंक से लोन ले लिया। पांडे के अनुसार बैंक प्रबंधन इस सब से अनजान बना रहा और बिना छानबीन किए मुझे बेच दिया।

बैंक की सांठ-गांठ के बिना ऐसा संभव नहीं है

Ãइसमामले में बैंक और लोन लेने वाले व्यक्ति की सांठ-गांठ साबित हो रही है। क्योंकि बैंक जब भी कोई प्रापर्टी लोन के लिए जमानत पर लेता है या गिरवी रखता है तो उसकी व्यापक स्तर पर जांच कराई जाती है। बहरहाल इस मामले में प्रभावित व्यक्ति को उपभोक्ता फोरम में बैंक के खिलाफ परिवाद पेश करना चाहिए। -एड. अजयदीप मिश्रा, उपभोक्ता मामलों के जानकार

यदि कब्जा नहीं दिला पाए तो राशि वापस कर दी जाएगी

इसप्रकरण के बारे में इलाहाबाद बैंक के सीनियर मैनेजर आरके सनोरिया का कहना है कि जोनल कार्यालय में विचाराधीन है। लोन देने गिरवी रखे गए प्लाॅट को नीलाम करने की प्रक्रिया मेरे कार्यकाल की नहीं है। हालांकि नियमानुसार बैंक अगर प्लाॅट पर कब्जा दिलाने में नाकाम रहता है तो खरीदार को नीलामी राशि वापस कर दी जाएगी। अनंदीकर इस घटनाक्रम के पहले से ही गायब हैं। इसलिए उसके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई करना नामुमकिन है।

दो साल से परेशान है युवक, बैंक नहीं दे रहा जवाब

राहुलके अनुसार वे इस प्लाॅट पर कब्जा लेने के लिए दो साल से बैंक के चक्कर काट रहे हैं। लेकिन बैंक प्रबंधन इस बारे में कोई ठोस जवाब नहीं दे रहा। जब भी जाओ तो एक ही जवाब मिलता है कि जांच की जा रही है। परेशान होकर पांडे ने इस बारे में बैंक लोकपाल से लेकर अन्य संस्थाओं तक के दरवाजे खटखटाए, लेकिन कुछ नहीं हुआ। उनका कहना है कि अब वे इस मामले में बैंक के खिलाफ कोर्ट केस करने जा रहे हैं।