बौद्धिक संपदा एवं संवर्धन के लिए सतत प्रयत्नशील रहें
स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय में बौद्धिक संपदा अधिकार और चुनौतियां विषय पर संगोष्ठी हुई। कुलाधिपति डॉ. अजय तिवारी ने कहा कि बौद्धिक संपदा एवं संवर्धन के लिए सतत प्रय|शील रहें। मुख्य अतिथि डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. पीपी सिंह ने कहा शिक्षा में आ रही गिरावट को दूर करने का प्रयास स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय कर रहा है। संस्थापक कुलपति डॉ. अनिल तिवारी ने कहा कि बौद्धिक संपदा कानून संबंधी जानकारी से अवगत कराने के लिए पुस्तक का निर्माण किया जाए। उपकुलपति डॉ. एनके थापक ने कार्यशाला की प्रस्तावना प्रस्तुत की। डॉ. सुनीला यादव ने कहा कि भय से दूर होकर, प्रशंसा प्रोत्साहन के साथ शिक्षा मिले तो बौद्धिक अधिकार सुविधाजनक रूप से प्राप्त हो सकेगा। क्योंकि व्यक्तिगत ज्ञान किसी भी अधिकार का मोहताज नहीं है। श्रीमती मोहनी दुबे ने विश्व व्यापार संगठन तथा विश्व बौद्धिक संपदा के बीच हुए संबंध का वर्णन किया। कार्यशाला में डॉ. जगदीश खोबरागड़े, डॉ. जीएस तिवारी, डॉ. रितु उमहिया, राजू श्रीवास्तव आदि ने विचार रखे। इसमें डॉ. मनीष मिश्र, डॉ. राजेश दुबे, डॉ. प्रमेश गौतम, डॉ. सुनीता जैन, डॉ. साधना अवस्थी, डॉ. आर्य जैन सहित विवि परिवार के सदस्य मौजूद थे। संचालन सहायक प्राध्यापक निशांत दुबे तथा आशुतोष शर्मा ने किया। आभार कुलसचिव केके श्रीवास्तव ने माना।