स्टेट बार काउंसिल के अध्यक्ष बने राजेश पांडे के परिजनों में खुशी की लहर।
सागर। राजेश पांडे की उपलब्धि से परिवारजन बेहद खुश हैं। उनके पिता सेवानिवृत्त शिक्षक 80 वर्षीय रामकुमार पांडे ने बेटे की जीत को बुंदेलखंड की जीत बताया है। मां सावित्री पांडे ने कहा कि आर्थिक स्थिति कमजोर रहने के बाद भी बेटा इस ऊंचाई पर पहुंचेगा, यह कभी सोचा नहीं था।
राजेश की पत्नी श्रीमती रचना का कहना है कि जिसकी नीयत साफ रहती है, कुदरत उसे बरकत देती है। बस कुछ ऐसा ही पति के साथ हुआ है। राजेश के दो बच्चे युगश्रेष्ठ तथा ईशान हैंं। जीत की खबर मिलते ही पूरा परिवार पहलवान बब्बा मंदिर गया। राजेश के बड़े भाई बसंत सतलज बिजली कंपनी नई दिल्ली में मैनेजर हैं। छोटे भाई दिनेश एक्सीलेंस कॉलेज में कार्यरत हैं।
अध्यक्ष बनने के बाद प्राथमिकताएं : अध्यक्ष चुने जाने के बाद राजेश पांडे ने भास्कर से कहा कि प्रदेश के वकीलों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा। बुजुर्ग वकीलों के लिए पेंशन योजना लागू कराई जाएगी। नए वकीलों के लिए ट्रेनिंग सेंटर खोले जाएंगे।
प्रदेश के सभी न्यायालयों में वकीलों के बैठने की बेहतर व्यवस्था कराई जाएगी। ऐसे लॉ कॉलेज जो मानकों पर खरे नहीं उतर रहे हैं, उन्हें बंद कराने के लिए मोर्चा खोला जाएगा। एडवोकेट कॉलोनी बनाए जाने के संबंध में प्रदेश सरकार से बातचीत की जाएगी। वकीलों के निधन पर उनके आश्रितों को 5 लाख रुपए तक की सहायता देने के प्रयास किए जाएंगे।
अब तक का सफरनामा : राजेश पांडे लगातार तीन साल से स्टेट बार कौंसिल के सदस्य निर्वाचित हो रहे हैं। वे पहली बार 2004 में सदस्य चुने गए। इसके बाद 2008, 2014 में भी सदस्य निर्वाचित हुए। उन्होंने 1988 में लॉ किया था। इसके बाद जिला कोर्ट में प्रैक्टिस करने लगे। इसी दौरान अधिवक्ता संघ के कार्यकारिणी सदस्य चुने गए। 1991 1992 में भी सदस्य पद पर निर्वाचित हुए। 1990 में संघ के सह सचिव चुने गए।