- 2011 में बना था केस, अब तक हो चुकी हैं सात पेशियां, बच्ची को बताया था किराएदार
सागर | छह साल के बच्चे यशवंत को बिजली चोर बताने वाली बिजली कंपनी की एक और करतूत सामने आई है। कंपनी के अधिकारियों ने 2011 में 11 साल की बच्ची और उसके मृत दादा को बिजली चोरी के केस में फंसा दिया। कंपनी ने बच्ची को मकान का किराएदार बताकर कोर्ट में केस कर दिया। यह गरीब बच्ची तभी से न्याय की आस में कोर्ट के चक्कर काट रही है।
19 जून 2011 को सहायक यंत्री आरके गुप्ता टीम के साथ पीलीकोठी स्थित अहमद उर्फ पप्पू खान की झोपड़पट्टी में पहुंचे थे। टीम को जांच के बाद झोपड़ी में बिजली चोरी मिली। घर में 11 साल की नाजनी थी। टीम ने बच्ची से नाम पूछा तो उसने अपने घर का नाम साहिबा बताया।
कोर्ट नोटिस के बाद पता चला कि बिजली कंपनी ने अहमद, उनकी बेटी नाजनी उर्फ साहिबा और उनके मरहूम पिता कासिम खान को आरोपी बना दिया है। अप्रैल 2014 में कोर्ट की ओर से सभी का गिरफ्तारी वारंट भी जारी हो गया। नाजनी उसने पिता ने न्यायाधीश डीडी द्विवेदी की विशेष अदालत में जमानत कराई। अहमद नाजनी ने बताया कि अप्रैल से अब तक 7 पेशियां हो चुकी हैं। अगली पेशी 14 जुलाई को है।
पिता के मकान में बेटी किराएदार कैसे? : पंचनामा में साहिबा को किराएदार दर्शाया गया। इतना ही नहीं साहिबा के दादा कासिम खान को भी बिजली चोरी का आरोपी बनाया दिया। कासिम की मौत 1995 में ही हो चुकी थी। साहिबा के वकील राजू प्रजापति का कहना है कि बिजली कंपनी ने फर्जी तरीके से मामला बनाया है। केस बनाते समय यह तो देखना था कि किराएदार रहेगा कहां? कौन जिंदा है या मर गया?
साहिबा के पिता अमजद खान का कहना है 19 जून 2011 को मैं अपनी बीवी के साथ रिश्तेदार की तेरहवीं में कुरवाई गया था। साहिबा घर पर अकेली थी। हमारे मीटर में कोई गड़बड़ी नहीं थी। घर से बाजू को तार निकली थी। कंपनी के अधिकारियों ने असली आरोपी के बजाय हमें आरोपी बना दिया। साहिबा मानसिक रूप से परेशान हो चुकी है।
जांच कराएंगे : '' चूंकि मामला 2011 का है। यह मेरी जानकारी में नहीं था। मामले की जांच करवाई जाएगी।
'' पीके चौकसे, कार्यपालन यंत्री, सागर
अब नवमीं कक्षा में है साहिबा : जिस वक्त साहिबा पर मामला दर्ज हुआ, उस समय वह छठवीं कक्षा में थी। अब वह शहर के इमानुअल स्कूल में नवमीं कक्षा में पढ़ रही है। स्कूल के रिकॉर्ड में उसकी जन्मतिथि 30 दिसंबर 1999 दर्ज है। उसका कहना है कि कोर्ट के चक्कर काटते-काटते थक गई हूं। डर भी लगता है। अभी मेरे पढ़ाई-लिखाई के दिन हैं।