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जन्मोत्सव में बधाइयां, क्षमावाणी में केश लोंच

रविवार को शहर में भक्ति रस की बहार रही। चकराघाट पर चल रही श्रीमद भागवत कथा में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के दौरान तालाब...

Dainik Bhaskar

Sep 11, 2017, 05:05 AM IST
जन्मोत्सव में बधाइयां, क्षमावाणी में केश लोंच
रविवार को शहर में भक्ति रस की बहार रही। चकराघाट पर चल रही श्रीमद भागवत कथा में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के दौरान तालाब में सजीव झांकी ने सभी का मन मोहा। तो इतवारी टौरी स्थित श्रीद्वारिकाधीश मंदिर में श्यामा-श्यामजी के जन्मोत्सव में फूल बंगला सजा। बधाइयां गाई गईं। जैन समाज द्वारा गणेश प्रसाद वर्णीजी की जयंती मनाई गई। इसी दौरान पद्माकर स्कूल में मुनिश्री विभंजन सागर ने केश लोंच किया। चकराघाट पर कथा वाचक विपिन बिहारीसाथीजी महाराज के सानिध्य में चल रही श्रीमद भागवत कथा में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के दौरान जो सजीव झांकी सजी, उसे जिसने भी देखता ही रह गया। तालाब से जब वासुदेव के वेश में जब झांकी सजाकर लोग निकले और उसमें शेषनाग का जो बैकग्राउंड दिखा, उसे हर किसी ने अपने मोबाइल के कैमरे और जेहन में कैद किया। वहीं इतवारी टौरी स्थित श्रीद्वारिकाधीश मंदिर में श्यामा-श्यामजी का जन्मोत्सव मनाया गया। बधाइयां गाई गईं तो फूल बंगला भी सजा। 56 भोग लगाए गए। वृंदावन एवं गोवर्धन से भागवताचार्य एवं भजन गायक कन्हैया लाल दीक्षित एवं बरसाना से दामोदर, डॉ. अंकलेश्वर दुबे आदि ने इसमें सहभागिता की।

सागर. श्रीद्वारिकाधीश मंदिर में श्यामा-श्यामजी का जन्मोत्सव पर फूल बंगला सजाया गया।

सामूहिक क्षमावाणी एवं सम्मान समारोह

उधर पद्माकर स्कूल परिसर में सकल जैन समाज सागर द्वारा सामूहिक क्षमा वाणी पर्व पर सम्मान समारोह हुआ। इसी मौके पर मुनिश्री विभंजन सागर महाराज का केश लोचन हुआ।

सफलता के लिए श्रम करना पड़ता है : मुनिश्री

क्षुल्लक गणेश प्रसाद वर्णी की 144वीं जन्म जयंती पर में वर्णी भवन मोराजी से गणेश बाल संस्कार केंद्र के बच्चों द्वारा नगर में प्रभात फेरी निकाली गई। डॉ. पन्नालाल जैन साहित्याचार्य स्मारक समिति द्वारा संस्था के दो बच्चों को अधिकतम सम्मानित किया। संचालन संस्था के मंत्री क्रांतकुमार सराफ ने किया। सभी वेदियों पर नई ध्वजा फहराई गईं। मुनिश्री भव्य सागर ने कहा कि सफलता पाने के लिए श्रम करना पड़ता है भाग्य तो सिर्फ लकीरें देता है, उसमें रंग तो हमें भरना पड़ता है। वर्णी जी ने भी बहुत श्रम किया और मात्र 1 रुपए का आधार लेकर 1903 में सबसे पहले विद्यालय की बनारस में स्थापना की। 1905 में मोराजी सागर में विद्यालय की स्थापना की।

वहीं दशलक्षण पर्व के समापन पर बाहुबली कॉलोनी स्थित दिगंबर जैन चंद्रप्रभ मंदिर से श्रीजी की शोभायात्रा नगर में निकली। समापन पर आर्यिका अनंतमति माताजी के मंगल प्रवचन हुए।

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