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एनएसएस कैंप यानी जीवन जीने की कला का जरिया : आठया

5 वर्ष पहले
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एनएसएस कैंप जैसे माध्यम से जुड़कर हम बचपन से ही जीवन जीने की कला सीखते हैं। समाजसेवा और समाजोपयोगी काम करने से कौशल विकास होता है जो पूरी जिंदगी सहायक होता है। यह बात महुदरा गांव में सात दिन चले कॉलेज के एनएसएस कैंप के समापन पर अतिरिक्त संचालक सीडी आठ्या ने कही। उन्होंने कहा कि यहां कैडेट्स ने गुलदस्ता बनाना, हैंडपंप का प्लेटफॉर्म और चबूतरे बनाने जैसे काम किए हैं जो कौशल विकास की प्रतीक हैं। विशिष्ट अतिथि एसडीएम अविनाश रावत ने कहा जिले में आगामी दिनों में स्वच्छता महासंग्राम शुरु होने जा रहा है। कार्यक्रम अध्यक्ष एके पटैरिया ने कहा राष्टीय सेवा योजना युवाओं का देश का सबसे बड़ा संगठन है। प्रदेश में सबसे पहले मात्र दो विवि चयनित हुए थे जिनमें सागर विवि भी था। यहां 1969 में एनएसएस की शुरुआत हुई थी और करीब 400 कैडेटस थे। लेकिन अब 20 हजार से ज्यादा हैं। उन्होंने कहा कि व्यक्ति उम्र के अलावा विचार और उत्साह से भी युवा होता है अब 35 साल नहीं 60 साल तक का व्यक्ति युवा है। आप अपनी दिनचर्या तय करें और उसी के मुताबिक अपने काम करें तो सफलताएं मिलेगी। विधायक प्रतिनिधि देवराज सोनी ने कहा कि यहां मिली सीख को अपने जीवन में अनुसरण करें। प्राचार्य डॉ सुनीता दीवान ने प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। प्रतिभावान और उत्कृष्ठ कार्य करने वाले कैडेटस को सम्मानित किया। छात्र प्रांशु तिवारी और अनुज जैन ने गीत गाया। काजल सेठ चांदनी, प्रदीप दुबे, एके पटेल ने अनुभव बताए। संचालन डॉ मनोज जैन नपे किया। आभार डॉ प्रवीण श्रीवास्तव ने माना।

महंुदर गांव में एनएसएस शिविर के समापन पर संबोधित करते सीडी आठया।

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