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सब्जी मंडी में एक भी सत्यापित मशीन नहीं, दुकानदार नापतौल विभाग ही नहीं जानते

5 वर्ष पहले
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व्यापारी तुला सत्यापन की कार्रवाई करने में नापतौल विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। शहर के 70 फीसदी व्यापारी बगैर नापतौल विभाग की सील के उपकरणों का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं जिनकी मशीनें सत्यापित हैं उन्होंने भी एक साल के बाद रिन्यूअल नहीं कराया। हैरानी की बात तो यह है कि जिस पुरानी गल्ला मंडी में सब्जी से लेकर अनाज तक सबसे ज्यादा नापतौल का काम होता है, वहां एक भी दुकानदार के पास नापतौल से सत्यापित उपकरण नहीं है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर विभाग के अफसर ऐसा क्या काम कर रहे हैं कि उन्हें अपना मूल काम करने तक की फुर्सत तक नहीं है। वहीं अफसरों की इस अनदेखी के कारण नापतौल के उपकरणों से छेड़खानी कर आम जनता को ठगने का व्यापार फलफूल रहा है।

बिना बिल की मशीनें बेचकर सील कर देते हैं गायब : नापतौल की सील गायब करने के इस खेल में सबसे अहम भूमिका शहर के उन व्यापारियों की है जो नापतौल के उपकरण बेचते हैं। नियमानुसार इन व्यापारियों को उपकरण बेचते समय उन पर सील की प्लेट और दुकानदार की जानकारी विभाग को देनी होती है। ऐसा करने पर व्यापारी को मशीन का पक्का बिल भी दुकानदार को देना पड़ता है। इसलिए ये दुकानदारों को बिना सील की मशीनें थमा देते हैं। इससे उन्हें विभाग की सिरदर्दी और टैक्स दोनों का फायदा होता है। लेकिन विभाग के अफसरों ने अब तक उपकरण बेचने वाले दुकानदारों पर कार्रवाई करना तो दूर इस मामले की पड़ताल तक नहीं की।

जिले में मौजूद लाखों मशीनों में से केवल 3294 मशीनें ही सत्यापित
नापतौल विभाग से मिली जानकारी के अनुसार शहर में नापतौल के लिए इस्तेमाल होने वाले हर उपकरण का तुला सत्यापन होना अनिवार्य है। इसकी वैधता केवल एक साल की होती है। विभाग द्वारा अप्रैल से नवंबर तक जिले में केवल 3294 मशीनें ही सत्यापित की गई हैं। जबकि इतनी मशीनें तो शहर की मंडियों में ही हैं। ऐसे में साफतौर पर जाहिर है कि हजारों दुकानदार बिना सत्यापन की मशीनें ही इस्तेमाल कर रहे हैं।

पुरानी गल्ला मंडी में मशीनों की जांच करते समय जब टीम ने व्यापारियों से बात की तो सामने आया कि उन्हें मशीनों पर लगने वाली सील की जानकारी ही नहीं है। वहीं उन्होंने जिस दुकान से उपकरण खरीदे हैं वहां से भी इसकी जानकारी नहीं दी गई। ऐसे में ये बिना सील के ही उपकरण इस्तेमाल कर रहे हैं।

हर साल कराना होता है सत्यापन, सौ से एक हजार रुपए तक लगता है शुल्क नापतौल विभाग द्वारा सत्यापित उपकरण की वैधता एक साल ही होती है। इसमें तीन-तीन महीने के हिसाब से साल को चार भागों ए,बी,सी और डी में बंटकर इनके साथ वर्ष लिखा जाता है। इलेक्ट्रॉनिक कांटे पर नाप तौल विभाग की मुहर लगवाने का शुल्क निर्धारित है। प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी के कांटोंं में लगभग 10 किलो तक 250 रु., 50 किलो तक 400 एवं एक टन तक 1000 रु. शुल्क लिया जाता है। तृतीय श्रेणी के कांटों के लिए 20 किलो तक 100 रु., 300 किलो तक 200 एवं 500 किलो तक 250 रुपए शुल्क निर्धारित हैं।

पुरानी गल्ला मंडी में बिना सत्यापन की मशीन से सब्जी तौलता दुकानदार।

हर साल कराना होता है सत्यापन

शहर में बिना सत्यापन के ही नापतौल उपकरण कैसे इस्तेमाल हो रहे हैं?
-हमें ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली है। आप बताएं कहां मशीनें सत्यापित नहीं हैं।

पुरानी गल्ला मंडी में एक भी दुकानदार के पास सत्यापित मशीन नहीं है?

-मंडी में मशीनों का सत्यापन कराने के लिए हमने मंडी सचिव को पत्र लिखा है। उनका सत्यापन जल्द ही हो जाएगा।

क्या विभाग के निरीक्षक सत्यापन की जांच करने के लिए दुकानों तक नहीं पहुंचते?

-निरीक्षक दुकानों पर जाते हैं और हमने इस साल कई कार्रवाई भी की हैं।

अब तक केवल 3294 उपकरण ही जिले में सत्यापित हैं, जिले के हिसाब से यह संख्या काफी कम है? ऐसा क्यों?

-मैंने संख्या की जांच नहीं की। मैं इसे देखकर ही बता सकूंगा।

शिवकुमार उइके, सहायक नित्रयंक नापतौल

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