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लाइन परिचारकों की भर्ती : शक की सुई आला अफसरों पर

7 वर्ष पहले
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मप्रपूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के जबलपुर मुख्यालय से साल 2011-12 में की गई लाइन परिचारकों की संविदा भर्ती फर्जीवाड़े में अब शक की सुई कंपनी के आला अफसरों पर है। वह इसलिए कि बीते ढाई साल में किसी भी अधिकारी ने लाइन परिचारकों के डिप्लोमा, डिग्री सत्यापन कराने की जहमत नहीं उठाई। अब सारे दस्तावेज सर्किल कार्यालयों को भेज दिए। इसके बाद ही डिप्लोमा फर्जी होने का खुलासा हुआ है।

इस भर्ती में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद अधिकारी सकते में हैं। इनके मुताबिक जबलपुर मुख्यालय से ही डिग्री और डिप्लोमा सहित अन्य दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया होता तो फर्जीवाड़े का खुलासा उसी समय हो जाता। अधिकारी ढाई साल तक हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। जब तीन साल की संविदा अवधि समाप्त होने को चंद माह बचे तो अब दस्तावेजों का वेरिफिकेशन कराया जा रहा है। नियमानुसार किसी भी संस्थान, विभाग या कार्यालय में जिस स्तर से भर्ती प्रक्रिया होती है।

उसी स्तर से अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का मिलान और वेरिफिकेशन कराया जाता है। बिजली कंपनी के अफसरों ने इस नियम का पालन नहीं किया। भर्ती के समय केवल ओरिजनल दस्तावेजों से मिलान किया गया था। करीब ढाई साल बाद मुख्यालय ने सभी अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की मूल प्रति संबंधित संभागों के सर्किल कार्यालय को भेजकर सत्यापन कराने के निर्देश दिए हैं।

कोई समय-सीमा नहीं है

Ãसंविदालाइन परिचारकों की मार्कशीट, आईटीआई डिप्लोमा, जाति प्रमाण-पत्र आदि सभी दस्तावेज संबंधित जिलों की संस्थाओं को वेरिफिकेशन के लिए भेज दिए हैं। इसमें सत्यापन के लिए कोई समय-सीमा तय नहीं होती। कई संस्थाओं से विलंब से जवाब आता है। इस कारण कार्रवाई में देरी हो जाती है। -एसएस ठाकुर, सेक्शनऑफिसर, सीई कार्यालय, बिजली कंपनी सागर

फर्जीडिप्लोमाधारियों पर कार्रवाई होगी

Ãपहलेबिजली कंपनी का जबलपुर कार्यालय कर्मचारियों के दस्तावेजों का सत्यापन कराता था। बाद में पॉलिसी चेंज कर दी गई और सर्किल कार्यालय को सारे दस्तावेज भेज दिए गए हैं। कायदे से जबलपुर मुख्यालय को ही यह काम कराना था। सत्यापन करा रहे हैं, जिनके डिप्लोमा फर्जी पाए जाएंगे उन पर कार्रवाई की जाएगी। -प्रकाश कावड़े, चीफअभियंता, पूर्व क्षेत्र विवि कंपनी, सागर