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इंजीनियर्स से बोले निगमाध्यक्ष- सीवर ठेकेदार की गुलामी छोड़ो, वरना मुंह काला कर लटकवा देंगे

4 वर्ष पहले
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निगम परिषद की बैठक में शुक्रवार को उस वक्त सन्नाटा छा गया, जब निगमाध्यक्ष राजबहादुर सिंह ने निगम के इंजीनियर व पीडीएमसी को दो टूक शब्दों में कह दिया कि आप लोग ठेकेदार की गुलामी कर रहे हो। क्या यहां सभी पार्षद झूठ बोल रहे हैं। आपकी सेहत खराब कर देंगे। गली-गली मुंह काला करा कर आप सभी को फांसी पर टंगवा देंगे। ये सागर है। निगमाध्यक्ष के इन तेवरों से ठेकेदार व अधिकारियों के चेहरे लाल पड़ गए। हुआ यह था कि ज्यादातर पार्षदों ने सीवर लाइन बिछाने में गड़बड़ी और दिक्कतों को लेकर परिषद में अपनी बात रखी थी। इसके बाद पीडीएमसी पुनीत बग्गा और निगम के ईई विजय दुबे व एई संजय तिवारी से जवाब मांगा गया। ये सभी जब ठेकेदार की पैरवी करने लगे तो निगमाध्यक्ष आपा खो बैठे। करीब 5 महीने बाद महापौर अभय दरे भी परिषद की बैठक में पहुंचे थे। वहीं निगम कमिश्नर अनुराग वर्मा की यह पहली बैठक थी। यहां बता दें कि दैनिक भास्कर ने सीवर लाइन बिछाने में तकनीकी खामियों को लगातार प्रकाशित किया था। जिस पर अब हर बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा की जा रही है।

नए कमिश्नर से हाथ मिलाते महापौर।

सीवर प्रोजेक्ट पर नगर निगम के इंजीनियरों को फटकार लगाते निगमाध्यक्ष।

Á शहर के नाले साफ नहीं हुए, शनिचरी वार्ड से नहीं हटाया पेड़। अधिकारियों के मोबाइल नंबर बदलने पर पार्षदों ने एतराज जताया। कहा कि कई अधिकारियों के नंबर लगते ही नहीं।

Áअंबेडकर वार्ड में पाइप लाइन बिछाने में देरी के बावजूद नागपुर की सेंट्रल इंडिया को नोटिस न देने पर सब इंजीनियर रामाधार तिवारी के खिलाफ कार्रवाई होगी। पार्षदों ने 2011 की जनगणना के अाधार पर अव्यवहारिक बताया। इससे वार्डों में सफाई नहीं हो पा रही है।

Á28 मार्च से लागू हुए मप्र आउटडोर विज्ञापन मीडिया नियम 2017 के तहत कार्रवाई करने, स्टार एडवरटाइजिंग को यूनीपोल होर्डिंग्स के संबंध में निर्णय नहीं हुआ। भयप्रद टैक्स का ठेके पर सहमति नहीं बनी। पहले किस वस्तु पर और किस दर से लगेगा कर बताना होगा।

Áवसुंधरा काम्पलेक्स फेस-4 के लिए नए सिरे से टेंडर बुलाने का निर्णय लिया गया। राजघाट बांध के लिए एलम खरीदी के निविदा मंजूर की गई। दैवेभो की दरों में वृद्धि के प्रस्ताव पास हुआ।

6.30 घंटे चली बैठक, पक्ष-विपक्ष में सामंजस्य तो निशाने पर रहे निगम के अफसर
परिषद की बैठक में पक्ष-विपक्ष के पार्षदों में अच्छा सामंजस्य दिखा। पिछले साल टैंकर से पानी सप्लाई के जिस बिल पर पार्षदों ने भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे। उस ठेकेदार का पेमेंट करने के लिए ना नुकुर करते हुए सहमति दे दी। निशाने पर केवल निगम के विभाग प्रमुख व इंजीनियर रहे।

999 पात्रों को आवास आवंटन जल्द, 190 अपात्रों की फिर होगी जांच

कंसल्टेंट अनुराग सोनी ने सदन को बताया कि राजीव आवास का पीएम आवास में मर्जिंग का यह एक अनोखा उदाहरण है। पहले आओ-पहले पाओ की तर्ज पर जमा कराई गई मार्जिन मनी के बाद स्लम बस्तियों का मामला फंस रहा था। जांच में पात्र पाए गए 999 लोगों को जल्द आवास देंगे। वहीं अपात्र पाए गए 190 लोगों की फिर से जांच कराएंगे। निगम कमिश्नर वर्मा ने कहा कि 30 साल से अधिक उम्र के अविवाहित को भी आवास दे सकते हैं।

पेमेंट रोका, जांच के लिए पार्षदों की 5 सदस्यीय कमेटी बनेगी

परिषद ने तय किया है कि सीवर प्रोजेक्ट की जांच के लिए पार्षदों की 5 सदस्यीय कमेटी बनाई जाएगी। ठेकेदार का पेमेंट रोका गया है। ईई दुबे ने कहा कि सारी योजनाएं मुझे क्यों थोपी जा रही है। दूसरे इंजीनियरों को भी काम बांटा जाए। जिस पर महापौर दरे ने सुझाव दिया कि अन्य विभागों से सीनियर इंजीनियर प्रतिनियुक्ति पर रखे जा सकते हैं और ठेकेदार पार्षदों को कॉन्फिडेंस में लेकर काम करें। अब तक ठेकेदार को 14 करोड़ 6 लाख का भुगतान हो चुका है।

बैठक में ये मुद्दे भी छाए रहे
जनता की समस्याएं लेकर अब रेग्युलर आऊंगा : दरे
5 माह के लंबे अंतराल के बाद महापौर अभय दरे का अचानक निगम परिषद की बैठक में आना पार्षदों और अधिकारियों के लिए किसी आश्चर्य से कम नहीं था। उन्हें सदन में आता देख लोग चौंक गए। जिन पार्षदों को उनके आने की जानकारी थी उन्होंने बैंच थपथपाकर उनकी अगवानी की। बाहर कुछ समर्थकों ने माला पहनाकर उनका स्वागत किया। बाद में कई तरह की चर्चाएं चलती रहीं। महापौर जहां इसे संगठन का इच्छा बता रहे हैं तो वहीं निगम एक्ट के तहत परिषद की बैठक से लगातार तीन बार अनुपस्थित रहने पर सदस्यता पर खतरा मंडराने का भी एक कारण माना जा रहा है। महापौर का कहना है कि अब मैं, रेग्युलर निगम आना शुरू करूंगा। जनता की समस्याओं को तो सुलझा सकता हूं।

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