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सागर के जत्थे को जिस लंगर में रोका गया था, वहीं आ गई थी हमले की शिकार बस

4 वर्ष पहले
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अमरनाथ यात्रा : तीसरे जत्थे के चार सदस्य लौटे वापस, सभी ने साझा किए यात्रा के अनुभव

भास्कर संवाददाता | सागर

अमरनाथ यात्रा पर गए सागर के तीसरे जत्थे के लोगों का लौटना शुरु हो गया था। वैसे तो सभी को एक साथ लौटकर आना था, लेकिन हमले के कारण कुछ लोगों ने अन्य जगह घूमने का कार्यक्रम निरस्त कर वापस लौटने का प्लान बना लिया। जिन चार लोगों को तत्काल रिजर्वेशन मिल गया वो वापस लौट आए। कुछ लोग दिल्ली में भी रुक गए हैं। अन्य लोगों ने शनिवार को जम्मू में ट्रेन पकड़ी।

सागर वापस लौटे पूर्व पार्षद कैलाश चाैरसिया ने बताया कि 10 जुलाई को हमें शाम करीब 5 बजे श्रीनगर से अमरनाथ को निकलना था। राज्य परिवहन की बस भी बुक कर ली थी, लेकिन शॉपिंग आदि में एक घंटा लग गया। बस जैसे ही चली तो जिस जगह हमला हुआ था, उससे 19-20 किलोमीटर पहले मेेरे पास सागर से भैया की कॉल आई कि रास्ते में आतंकी हमला हो गया है। इसी बीच आर्मी ने हमारी बस किनारे लगवा ली। बाद में वापस हमें श्रीनगर लाया गया। यहां बड़े लंगर में सबके रुकने की व्यवस्था थी। जिस पर आतंकियों का कहर बरपा था, वह भी रात में हमारे लंगर के पास ही आ गई। कांच टूटे हुए थे। दूसरे दिन करीब 100 बसों के साथ बेहद कड़ी सुरक्षा में हमें अमरनाथ ले जाया गया। इस हमले को छोड़ दो तो पूरी यात्रा बेहद यादगार रही। आर्मी ने सुरक्षा व्यवस्था इतनी कड़ी और मुस्तैद कर रखी हैं कि कोई चिंता नहीं।

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