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मोक्ष मार्ग में स्थित जीव कभी आगम के विपरीत नहीं चलता : मुनिश्री

4 वर्ष पहले
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वर्णी भवन मोराजी में विराजमान मुनिश्री विभंजन सागर महाराज ने शुक्रवार को प्रवचनों में कहा कि जो जीव जिनेंद्र देव के द्वारा कहे गए तत्व को मतिज्ञान और श्रुतसागर के बल से स्वछंद होकर बोलता है वह मिथ्या दृष्टि होता है। सच्चे देव शास्त्र गुरू पर श्रद्धान नहीं करता। आगम की आज्ञा को नहीं मानता और अपने ज्ञान से अपनी इच्छा के अनुसार मनचाहा बोलता है, आगम के असत्य का जहर घोलता है। आगम में लिखे पर श्रद्धान करें।

मुनिश्री ने कहा कि जो आगम को नहीं मानता, वह जिनवाणी को नहीं सुनता, बल्कि हमेशा विपरीत बोलता है। जिसके कारण अनेक कर्मों का बंध करके मोक्ष मार्ग को बंद करके अनेक भव धारण करता है। मोक्ष मार्ग में स्थित जीव कभी आगम के विपरीत नहीं चलता है और न ही बोलता है। मुनिश्री ने बताया कि मिथ्या दृष्टि जीव तो तीर्थंकर भगवान के दर्शन कर भावना भी नहीं करता मिथ्या तत्व सदा कष्टदाई होता है।

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