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68 प्रतिशत मामलों में आरोपी को सजा मिली

7 वर्ष पहले
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एफएसएल का प्रशिक्षण कार्यक्रम

व्यापमं फर्जीवाड़े से बढ़ाई न्यायधीशों की जानकारी

राज्यन्यायलयिक विज्ञान प्रयोगशाला में आयोजित विशेष प्रशिक्षण सत्र में जजों के लिए पीएमटी का फर्जीवाड़ा एक अहम सबक साबित हुआ। सोमवार को इस विशेष प्रशिक्षण सत्र के आखिरी दिन यहां के वैज्ञानिकों ने न्यायधीशों को बताया कि किस तरह दो छात्रों की फोटो में मिक्सिंग कर पीएमटी दिलाई गई लेकिन जैसे ही इस मामले की जांच एफएसएल सागर में की गई तो उनकी यह गड़बड़ी पकड़ में गई। न्याययिक अधिकारी प्रशिक्षण संस्थान जबलपुर एवं एफएसएल सागर के संयुक्त तत्वावधान में यहां तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया था।

फोटोमार्फिंग की बारीकियों को बताया : सत्रके दौरान वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी एवं फोरेन्सिक फोटो फेशियल विशेषज्ञ राज श्रीवास्तव केसी शर्मा ने जजों को बताया कि किसी भी व्यक्ति के फोटो का मिलान उसके चेहरे पर अलग-अलग हिस्सों का वैज्ञानिक रूप से माप लेकर किया जाता है। इस काम में कई बार दिक्कत तब आती है, जब छात्र अपना पुराना फोटो लगा देते हैं। हालांकि छात्र का वर्तमान फोटो मिलने पर उसके बारे में लगभग 99 प्रतिशत सही रिजल्ट हासिल किया जा सकता है। इस दौरान दोनों वैज्ञानिकों ने जजों को फोटो को मिलाने की विभिन्न पद्धतियों को बारे में बताया। वैज्ञानिक श्रीवासतव ने बताया कि राज्य की इस लैब ने देश में फोटो मार्फिंग के सबसे ज्यादा प्रकरण हैंडल किए हैं, जिनमें सटीक अभिमत भी दिया गया।

कारके भीतर फांसी लगाकर आत्महत्या के बारे में बताया : प्रशिक्षणसत्र में शामिल इंदौर स्थित क्षेत्रीय प्रयोगशाला के वरिष्ठ अपराध घटनास्थल विशेषज्ञ डाॅ. सुधीरकांत शर्मा ने जजों को अलग अलग अपराध के घटनास्थल की वैज्ञानिक विवेचना को रोचक अंदाज में बताया। उन्होंने एक कार के अन्दर सीट बेल्ट का उपयोग कर लगाई गई फाॅसी के प्रकरण का उल्लेख किया। यह पुलिस अन्वेषकों के लिए एक पहेली बन गया था। पहली नजर में सारे साक्ष्य इस बात का इशारा कर रहे थे कि किसी ने सीट बेल्ट से गला घोंट कर उस व्यक्ति की हत्या की है। डाॅ. शर्मा ने बताया कि मैंने घटनास्थल और शव की सूक्ष्म वैज्ञानिक विवेचना की। इसमें विभिन्न तथ्यों और साक्ष्यों को शामिल करते हुए यह सिद़्ध किया कि यह कार के भीतर फांसी लगाकर आत्महत्या करने का अनूठा मामला है। अगले विशेषज्ञ के रूप मे