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प्राकृतिक चिकित्सा अपनाना बेहद जरूरी है : योगाचार्य

5 वर्ष पहले
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सागर | डाॅ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के योग अध्ययन विभाग के तत्वावधान में योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा पर आधारित 10 दिवसीय कार्यशाला का समापन रविवार को हुआ। मुख्य अतिथि हैदराबाद के योगाचार्य एनआर भार्गव ने कहा कि यह शरीर पंचतत्वों द्वारा ही निर्मित है जिसका उल्लेख रामचरित मानस में भी मिलता है। प्राकृतिक चिकित्सा का आधार ही ये पंचतत्व हैं, जिसे आधुनिक समय में मिटटी, जल, उपवास, वाष्प, मालिश एवं आहार चिकित्सा आदि के नामों से जाना जाता है। भारतीय संस्कृति में भी प्राकृतिक चिकित्सा की अनेक विधियां निहित हैं, जिसे आज पुनः अपनाने की अति आवश्यकता है। विभागाध्यक्ष प्रो. गणेश शंकर गिरी ने कार्यशाला का परिचय एवं उद्देश्य प्रस्तुत कर इसके विभिन्न आयामों को बताया। मुख्यवक्ता कैवल्यधाम योग संस्थान के डाॅ. निधीश यादव ने आयुर्वेद एवं योग का वैज्ञानिक आधार बताते हुए आज समाज में फैले रोग- मधुमेह, उच्च एवं निम्न रक्त चाप, अस्थमा एवं सरवाइकल आदि रोगों पर योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के प्रभाव को अनेक शोधों के माध्यम से बताया एवं उनके सरल ,समुचित आहार विहार , व्यायाम एवं प्राकृतिक चिकित्सा पर आधारित उपाय एवं विधियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। इस मौके पर वसंतोत्सव के उपलक्ष्य में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के तहत विभागीय छात्र ब्रजेश, अंकित एवं अंजली ने गीत संगीत के माध्यम से श्रोताओं का मन मोहा। संचालन डाॅं. अरुण कुमार साव ने किया। इस मौके पर पूरन पटेल, कृष्ण साहू, अतुल दुबे, अक्षय सिंह, निमिशा, गोपाल कृष्ण, डॉ. प्राची, री ना, रामलाल, गगन, रोशन, ख्याति, अंजली, पुष्पेंद्र, रूपसिंह, महेंद्र, दिनेश, नवीन कौशिक, शुभम, बृजेश, अंकित, डाॅ. सारिका आदि मौजूद थे।

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