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जल्द छापामार कार्रवाई होगी

7 वर्ष पहले
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(दीनदयालनगर स्थित वह मकान जहां 26 अगस्त की रात भभकी थी आग)
सागर। गैस रीफिलिंग की एक छोटी सी भूल परिवार की तबाही का कारण बन गई। उपनगर मकरोनिया के दीनदयाल नगर कॉलोनी में घर के अंदर गैस के रिसाव से भभकी आग में झुलसा पूरा परिवार ही खत्म हो गया। हादसे के दूसरे दिन महिला उसके दोनों बच्चों ने दम तोड़ दिया था। शहर के एक निजी अस्पताल में इलाज करा रहे परिवार के मुखिया को भी नहीं बचाया जा सका। उन्होंने मंगलवार सुबह अंतिम सांस ली। हादसे में जैन परिवार के अलावा उनका ड्राइवर भी झुलस गया था। हालांकि उसकी हालत खतरे से बाहर है।
26 अगस्त की रात दीनदयाल नगर कॉलोनी में स्वतंत्र जैन के घर से उठी आग की लपटें और उन लपटों के बीच फंसे पूरे परिवार के लोगों की चीख-पुकार का वह मंजर यहां लोग भूल नहीं पा रहे हैं। आग से झुलसी श्रीमती संध्या जैन और उनकी 13 वर्षीय पुत्री सुमी तथा 10 वर्षीय पुत्र राज जैन की सांसों की डोर 24 घंटे के अंदर टूट गई थी। स्वतंत्र उनके ड्राइवर बिंदू विश्वकर्मा का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा था। परिजनों ने बाद में स्वतंत्र को भाग्योदय अस्पताल में भर्ती करा दिया। यहां उनका उपचार किया जा रहा था। मंगलवार को सुबह करीब 7.45 बजे उन्होंने दम तोड़ दिया।

पत्नी-बच्चों की मौत की खबर नहीं दी थी: परसों रात ही उन्होंने रिश्तेदारों समाज के लोगों से काफी देर तक बात की और उनसे आशीर्वाद मांगा। उनकी हालत में लगातार सुधार हो रहा था। डॉक्टर कह रहे थे कि तीन-चार दिन में छुट्टी कर देंगे। उन्हें पत्नी संध्या बच्चों की मौत की खबर नहीं दी गई थी। अस्पताल आने के कारण शायद उन्हें खुद ही इस बात का अहसास हो गया था कि वे अब नहीं रहे। स्वतंत्र जैन मूलत: बंडा के रहने वाले थे। वे दीनदयाल नगर में सुशील जैन के मकान में किराए से रह रहे थे। पत्नी संध्या का मायका हटा में था। दोनों बच्चे रजाखेड़ी स्थित प्राइवेट अंकुर स्कूल में पढ़ रहे थे।
मंगलवार दोपहर घर के बाहर मातम छाया हुआ था। जैसे ही पीएम के बाद स्वतंत्र जैन का शव पहुंचा, रिश्तेदार और परिजन गहरे शोक में डूब गए।

''छोटे सिलेंडरों में गैस रीफिलिंग करने को कोई प्लांट नहीं होता कोई बड़ा उपकरण। एक नली और नाजल के जरिए एक से दूसरे सिलेंडर में गैस ट्रांसफर कर लेते हैं। किसी निश्चित स्थान पर भी गैस नहीं भरी जाती। लोग स्थान बदलते रहते हैं। हम जानकारी जुटा रहे हैं। जल्द छापामार कार्रवाई की जाएगी। -वीएस तोमर, खाद्य नियंत्रक

हमने सबकुछ खोया, किसी और पर आए ऐसी विपत्ति

बेटी ने किया था आगाह, पत्नी के दीपक जलाते ही जल उठा घर
''17 साल पहले सबसे बड़े बेटे को एक बीमारी ने हमसे छीन लिया था। इस हादसे में पुत्र, बहू और उनके दोनों बच्चों को खो दिया। भगवान किसी और को यह दिन दिखाए, यही प्रार्थना है। हम नहीं जानते कि घटना कैसे हुई, लेकिन इतना पता है कि गैस के रिसाव से आग भभकी थी। लोगों से आग्रह है कि गैस सिलेंडर के उपयोग में पूरी सावधानी बरतें। कहीं कोई चूक हो जाए। इस तरह किसी और का परिवार उजड़े।'' -स्वरूपचंद जैन, स्वतंत्रजैन के पिता

अस्पताल में इलाज के दौरान स्वतंत्र जैन से उनके परिजनों की घटनाक्रम को लेकर लगातार बात होती रही। उन्होंने बताया था कि उस रात वे हादसे के 15 मिनट पहले ही घर पहुंचे थे। बेटी सुमी कह रही थी कि पापा गैस की गंध रही है। उसकी बात सुनकर हम लोग सिलेंडर को देखने पहुंचे। इसी बीच अंदर पूजा वाले कमरे में पत्नी संध्या ने जैसे ही आरती के पहले दीपक जलाया पूरे घर में आग भभक उठी। आग इतनी तेज थी कि पत्नी बच्चों को बाहर निकालने में ड्राइवर और वे खुद झुलस गए। परिजनों के अनुसार इस हादसे में यदि कोई बच पाया है तो वह उनकी गाय और उसका बछड़ा है, जिसे दहलान से निकालते वक्त स्वतंत्र लपटों से घिर गया था।

दीनदयाल नगर में हुए हादसे के महीने भर पहले ही मनोरमा कॉलोनी में भी छोटे सिलेंडर पर खाना बनाते समय सिलेंडर फटने से युवक घायल हो गया था। पूर्व में गैस रीफिलिंग के दौरान कैंट थाना क्षेत्र में दो-तीन वाहन जल चुके हैं। बाहरी छात्र ज्यादातर ढाई से तीन किलो वाले इसी सिलेंडर के ऊपर लगे बर्नर चूल्हा पर ही खाना बनाते हैं। ऐसी शिकायतें मिलती रही हैं कि शहर के गोपालगंज, बड़ाबाजार, भगवानगंज, तिलकगंज और मकरोनिया में कई जगह छोटे सिलेंडरों में गैस रीफिलिंग का काम चल रहा है। खाद्य विभाग ऐसे हादसे रोकने के लिए अवैध रिफिलिंग के खिलाफ छापामार कार्रवाई करेगा।
भाई के यहां चूल्हों की रिपेयरिंग होती थी कि गैस रीफिलिंग
शांतिनगरकॉलोनी में रहने वाले स्वतंत्र के बड़े भाई राजेंद्र कुमार जैन ने बताया कि स्वतंत्र ने एक मालवाहक फाइनेंस कराया था। बिंदू उसी गाड़ी का ड्राइवर था। वे घर पर कम ही रुकते थे। आए दिन मैं स्वतंत्र के घर जाता था। कभी ऐसा प्रतीत नहीं हुआ कि यहां गैस रीफिलिंग जैसा कोई काम होता है। भाभी संध्या टिफिन सेंटर चलाने लगी थीं और फोटोकॉपी की दुकान भी थी। उनका कहना था कि भाई के घर गैस चूल्हों की रिपेयरिंग की जाती थी। छोटे सिलेंडर आस-पड़ोस में रहने वाले छात्रों के रखे हुए थे। वे शादी ब्याह में खाने का ऑर्डर भी लेते थे। बड़े सिलेंडर उसी काम के लिए स्टॉक में रखे हुए थे। वे खुद रिफिलिंग का काम नहीं करते थे।
तो टल जाता यह भीषण हादसा
भाई राजेंद्र जैन ने बताया कि उनके छोटे भाई स्वतंत्र के घर के पीछे के दरवाजे से पिछले साल चोर घुस आए थे और सामान ले गए थे। चोरों से बचाव के लिए उन्होंने दरवाजे खिड़की बंद करके दीवार उठवा दी थी। इससे घर में हवा का प्रवेश कम हो गया था। यदि दरवाजे खिड़की होते तो सिलेंडर से रिसी गैस घर के अंदर नहीं रह पाती और शायद यह हादसा टल जाता।
- गैस रिसाव से भभकी आग में झुलसे स्वतंत्र जैन ने भी दम तोड़ा ।

- पत्नी दोनों बच्चों की 20 दिन पहले ही हो चुकी थी मौत ।
हादसे में हताहत हुआ बंडा का जैन परिवार की तस्वीरें आगे हैं।