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दुर्भाग्य है कि मेडिकल कॉलेज होते हुए भी मामूली मर्ज का इलाज नहीं मिल रहा
बीएमसी में सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक
भास्कर संवाददाता | सागर
बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज की दुदर्शा पर सागर सांसद लक्ष्मीनारायण यादव को कहना पड़ा कि यह इस शहर का दुर्भाग्य है कि मेडिकल कॉलेज हाेने के बावजूद लोगों को इलाज के लिए दूसरे शहरों में जाना पड़ रहा है। मामूली से मामूली मर्ज के मरीज को भी यहां के डॉक्टर दूसरे शहरों में रैफर कर रहे हैं। इनमें ऐसे लोग भी होते हैं, जिनके पास किराए तक के पैसे नहीं होते। उनकी मदद हमें करनी पड़ती है। बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए शासन ने शहर में बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज खोला है।
सांसद ने यह पीड़ा गुरुवार को बीएमसी के व्याख्यान कक्ष में जिला स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक के दौरान व्यक्त की। उन्होंने जिला अस्पताल की सुविधाओं को बीएमसी की अपेक्षा बेहतर बताया। साथ ही दोनों अस्पतालों के डॉक्टरों को सलाह दी कि जिन मरीजों का इलाज शहर में ही हो सकता है, उन्हें रैफर नहीं किया जाए। मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर जाएं। ऐसा प्रयास करना होगा। मेरी भी यही इच्छा और शासन की भी यही मंशा है। उन्होंने जिले के अस्पतालों के अधूरे कामों को पूरा कराने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजने की बात कही। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत हुई बैठक में जिले में परिवार नियोजन, पल्स पोलियो अभियान, मलेरिया, क्षय रोग, जननी सुरक्षा योजना, राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम, राज्य बीमारी सहायता योजना सहित अन्य योजनाओं के क्रियान्वयन पर चर्चा की गई। साथ ही कई निर्णय भी लिए गए।
कॉलेज की स्थिति अभी पैदा हुए बच्चे के समान : डीन
जहां कैंप लगें, वहां व्यवस्था अच्छी हो
उन्हाेंने डीपीएम शेखर श्रीवास्तव द्वारा पेश किए गए परिवार नियोजन कार्यक्रम के आंकड़ों को बेहतर बताते हुए जहां-जहां इसके कैंप लगाए जा रहे हैं, वहां अच्छी व्यवस्था करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने परिवार नियोजन एवं टीकाकरण के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में आशा कार्यकर्ता एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता दो महिलाएं तथा एक पटवारी या ग्राम सहायक की ड्यूटी लगाने के निर्देश बीएमओ को दिए। बैठक में सीएमएचओ डॉ. दिनेश कौशल, निगमायुक्त कौशलेंद्र विक्रम सिंह, सीएस डॉ. इंद्राज सिंह, डीन बीएमसी डॉ. जेएन सोनी, अस्पताल अधीक्षक डॉ. आरएस वर्मा, डॉ. मनीष जैन आदि मौजूद थे।
बीपीएम बोले : जिला स्तर से थोपते हैं काम
बैठक में 11 ब्लॉक से आए बीपीएम शेखर श्रीवास्तव द्वारा कई निर्माण कार्यों पर सवाल खड़े किए गए। बताया गया कि कई ऐसे निर्माण कार्य भी स्वीकृत कर दिए गए हैं, जिनकी जरूरत ही नहीं है। इनके बारे में बीपीएम स्तर से प्रस्ताव मंगाए ही नहीं गए। कलेक्टर विकास नरवाल को बताया गया कि काफी काम जिला मुख्यालय से स्वीकृत कर एस्टीमेट तक बना दिए गए हैं। कलेक्टर ने सभी काम प्रस्ताव के आधार पर स्वीकृत करने के निर्देश दिए। साथ जो गैरजरूरी काम स्वीकृत हुए हैं उनका भौतिक सत्यापन 15 दिन में रिपोर्ट सौंपने को कहा।
बजट बहाएं नहीं सदुपयोग करें : विधायक
विधायक शैलेन्द्र जैन ने कहा कि बजट किसी भी संस्था की उन्नति के लिए जरूरी होता है। देखने में आ रहा है कि बजट को अच्छे कामों में लगाने के बजाय दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों के आवास भवनों की स्थिति अच्छी नहीं है, जो काम नहीं हुए चिंताजनक है। उन्होंने बैठक के बाद अपने-अपने काम का आकलन करने पर जोर दिया। विधायक सुरखी पारुल साहू ने कहा कि राज्य शासन द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी समय पर जनप्रतिनिधियों को दी जाए। उन्होंने जननी सुरक्षा योजना की जानकारी तथा उपस्वास्थ्य केन्द्रों की निगरानी पर बल दिया । साथ ही वर्ष 2013 सेे अधूरे पड़े निर्माण कार्यों पर भी ध्यान देने को कहा।
लक्ष्मी नारायण यादव
बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में व्यवस्थाएं चौपट हैं। किसी ने किसी आधार पर यहां के डॉक्टर मामूली से मामूली बीमारी के मरीज काे टालने के चक्कर में रहते हैं। प्रदेश के दूसरे काॅलेजों में काफी भीड़-भाड़ रहती है। इसके बाद भी मरीज को इलाज मिल जाता है। हमारे यहां ऐसा नहीं है। फिर भी लाेगों को इलाज कराने के लिए बाहर या प्राइवेट अस्पतालों में जाना पड़ रहा है। मान्यता हासिल करने की तैयारियों पर क्या कहूं। यहां तो ये हालत है कि कई डिपार्टमेंट में नई अत्याधुनिक मशीनें आई हैं। लेकिन वे डिब्बा बंद रखी हैं। मेडिकल के डॉक्टर काम नहीं करना चाहते। जिस तरह से कॉलेज चल रहा है। साफ है कि शासन से जितना पैसा मेडिकल बनाने में खर्च किया, वह बर्बाद हो गया है।
मेडिकल कॉलेज बनाने में पैसा बर्बाद हुआ : सांसद
डॉ. जेएन सोनी
अभी कॉलेज को खुले सिर्फ 7 साल हुए हैं। कॉलेज की स्थिति पैदा हुए बच्चे के समान है। दूसरे कॉलेज लंबे समय से चल रहे हैं। वहां सुपर स्पेशिएलिटी डॉक्टर हैं। दो-दो-तीन-तीन विषयों में सुपर स्पेशिएलिटी डिग्री कोर्स हैं। परिस्थितियां काफी हद तक इन कॉलेजों के अनुकूल हो गई हैं। इसलिए वहां और हमारे कॉलेज में अंतर है। जैसे ही कॉलेज रन करने लगेगा। यहां भी बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने लगेंगी। कॉलेज में जीरो ईयर घोषित होने के लिए कौन जिम्मेदार है नहीं कह सकता। अभी मुझे यहां आए हुए एक-दो महीने हुए हैं। आप काफी समय से देख रहे हो। मैं इस विषय में ज्यादा कुछ नहीं बोलूंगा।