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आसमान में उड़ते पैरा मोटर ग्लाइडर्स ने रोम-रोम में भरा रोमांच

5 वर्ष पहले
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सागर। पीठ पर लदी मशीन में बड़े कूलर जैसी पंखी। जैसे ही स्टार्ट हुई। कौतुहल से लोग देखने लगे। इस बीच इन कूलरनुमा पंखियों से कुछ मीटर पीछे लगे पैराशूट में हवा भर गई। इस मशीन को लादे भारतीय सेना का जांबाज जवान कुछ कदम आगे बढ़ा। पैराशूूट ऊपर की तरफ आया। फिर तो उसने करीब दो वर्ग किमी के मैदान के चारों ओर आसमान में यूं चक्कर लगाए कि जिसने भी देखा उसके रोम-रोम में रोमांच भर गया।
गुरुवार को ये हवाई करतब सेना के ‘हॉक हिल’ एरिया में पैरा मोटर एक्सपिडीशन के तहत अागरा से आए एक विशेष ट्रुप ने दिखाए। ये ट्रुप जबलपुर में कोर ऑफ सिग्नल के 105वें स्थापना दिवस में शामिल होने जा रहा था। रेस्ट के लिए सागर में रुका तो सागर स्थित 36 सिग्नल रेजीमेंट के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल आर. जयदीप ने यहां भी एक प्रदर्शन का अनुरोध किया था।

100 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से उड़ता है पैरा मोटर ग्लाइडर

पैरा मोटर ग्लाइडर टीम के लीडर ने बताया कि आसमान में उड़ने की ये टेक्निक भारत में साल 1996 में आई। इसके लिए सेना द्वारा एक ट्रेनिंग एकेडमी आगरा में शुरू की गई। इस टैक्निक के जरिए जवान 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से एक बार में 300 किमी तक की उड़ान भर सकते हैं। पैरा मोटर में हवाई जहाज वाला ईधन लगता है।
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