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जनता से ठगी कर भाग रहीं कंपनियां, पुलिस जांच करने तक को तैयार नहीं

5 वर्ष पहले
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किसी ने दो साल में पैसा दोगुना करने तो किसी ने सरकारी नौकरी का झांसा देकर ठगा
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श्रीकांत त्रिपाठी | सागर : 9713333078

शहर में घुसकर बाहरी कंपनियां और शातिर ठग खुलेआम जनता से धोखाधड़ी कर रहे हैं। कोई दो साल में पैसा दोगुना करने का प्रलोभन देता है तो कोई बेरोजगार युवाओं को नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठग जाता है। पिछले एक साल में धोखाधड़ी की कई ऐसी ही बड़ी वारदातें हुईं। इतना ही नहीं ठगों के रफूचक्कर होने से पहले ठगी की वारदातों के खुलासे भी किए गए, लेकिन इसके बाद ही ये आसानी से भाग निकले। वजह है पुलिस की सुस्ती। लाखों रुपए की ठगी के इन सभी मामलों में पुलिस के पास शिकायतें पहुंची, लेकिन कोई शिकायत पीडितों के बयान पर अटक गई तो कोई जांच पहले ही चरण में है। पुलिस की इस लापरवाही के चलते महीनों से केवल शिकायतकर्ता ही परेशान हो रहे है। ठग तो अब भी मजे में हैं।

जांच की स्थिति

कलेक्टर द्वारा तहसीलदार से मामले की जांच कराई गई थी। जांच रिपोर्ट में कंपनी गलत मिली। लेकिन इसके बाद भी अब तक इस मामले में कंपनी पर एफआईआर नहीं की गई।

ठगी कर चेन्नई की कंपनी गायब
चेन्नई की वाॅयलेट टेक्नोलॉजी नाम की मल्टी मोबाइल रीचार्ज कंपनी डिस्ट्रीब्यूटरशिप देने के बहाने से शहर के कई दुकानदारों से लाखों की ठगी कर भाग गई। ठगी के शिकार हुए दुकानदारों में से तीन ने 12 लाख रुपए की ठगी होने की शिकायत पुलिस से की थी।

भास्कर ने उजागर किया था मामला- दैनिक भास्कर ने इस मामले को 16 सितंबर के अंक में प्रकाशित कर उजागर किया था, लेकिन इसके बाद भी पुलिस ने ठगों को पकड़ने में कोई रुचि नहीं दिखाई।

जांच की स्थिति

अप्रैल माह में शिकायत देने के बाद सितंबर माह में पुलिस ने दुकानदारों के बयान लिए, लेकिन अब भी पुलिस ने न तो कंपनी में कोई बात की और न ही उनके खिलाफ मामला दर्ज नहीं किया।

यहां जांच ही शुरू नहीं हुई, मुंबई पुलिस दफ्तर भी सील कर गई
चार साल में दोगुना और छह साल में तीन गुना पैसा करने के जैसी आकर्षक स्कीमों के साथ लोगों को लखपति बनाने का सपने दिखाने वाली साई प्रसाद प्रॉपर्टीज लिमिटेड पिछले आठ सालों से शहर में प्रॉपर्टी डीलिंग की आड़ में चिटफंड कंपनी के रूप में काम कर रही थी। इस दौरान कंपनी ने प्रलोभन भरी स्कीमों के सहारे शहर के करीब 300 परिवारों को निशाना बनाया और लाखों रुपए हड़प कर चंपत हो गई। अब यह परिवार पिछले दो माह से कंपनी की शिकायत लेकर थाने और एसपी ऑफिस के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन पुलिस ने मामला दर्ज करना तो दूर कंपनी के दफ्तरों का मुआयना तक नहीं किया। जबकि हाल ही में इसी मामले को लेकर मुंबई क्राइम ब्रांच की टीम जिले में आई और बीना स्थित सांई प्रसाद के दफ्तर को सील कर सारे कागजात समेट कर ले गई।

भास्कर ने उजागर किया था मामला - 8 दिसंबर को दैनिक भास्कर ने यह मामला उजागर किया था। उस समय सागर से भले ही कंपनी भाग चुकी थी, लेकिन बीना का दफ्तर चालू था। वहीं शहर मेें कंपनी के कई एजेंट भी पॉलिसी बेचने में लगे हुए थे, लेकिन पुलिस की सुस्ती चलते सब गायब हो गए।

जांच की स्थिति

लेकिन इसके बाद से लेकर आज तक इस मामले में एफआईआर करना तो दूर पीड़ितों के बयान तक दर्ज नहीं किए गए।

भर्ती के नाम पर कर डाली थी ठगी
स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त संचालक कार्यालय में पदस्थ कंप्यूटर ऑपरेटर संतोष नामदेव ने फर्जी भर्ती परीक्षा आयोजित कर बेरोजगार युवकों को नौकरी दिलाने का झांसा दिया और करीब 25 युवकों से 50 लाख रुपए की धोखाधड़ी कर फरार हो गया।

भास्कर ने उजागर किया था मामला- दैनिक भास्कर ने 1 सितंबर के अंक में इस मामले को उजागर कर कंप्यूटर ऑपरेटर द्वारा किए गए फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया था।

जांच की स्थिति

इस मामले में कंप्यूटर ऑपरेटर पर मामला दर्ज करना तो दूर पीड़ितों के बयान तक नहीं हुए।

Á शहर में एक के बाद एक नई कंपनियां आकर ठगी की वारदात को अंजाम दे रही हैं, लेकिन पुलिस इन्हें पकड़ना तो दूर मामला तक दर्ज नहीं कर पा रही। ऐसा क्यों?

- जांच में समय लगता है। मैं इसे दिखवा लेता हूं।

Á ऐसी कैसी जांच कि तीन से चार माह होने के बाद भी शिकायतकर्ताओं के बयान भी नहीं लिए गए?

- बयान लिए गए होंगे। मैं पता कर लेता हूं।

Á साईं प्रसाद जैसी चिटफंड कंपनी जिसके फर्जीवाड़े का सच पूरे देश के सामने है उस पर भी मामला दर्ज नहीं किया गया। जबकि मुंबई से पुलिस ने आकर दफ्तर भी सील कर दिया।

- उस पर रायसेन में मामला दर्ज है। हम उनके साथ ही कोऑर्डिनेट कर रहे थे।

Á तो क्या यहां मामला दर्ज नहीं होगा?

- पीड़ितों के बयान में समय लग रहा है जल्द ही प्रकरण दर्ज कर लिया जाएगा।

सचिन अतुलकर, एसपी सागर

केस
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जांच में समय लगता है

मैं दिखवा लेता हूं

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