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पिछले साल काम न करने वाले इस साल नहीं पढ़ा सकेंगे

4 वर्ष पहले
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सरकारी कॉलेजों के ऐसे सभी अतिथि विद्वानों के आमंत्रण पत्र निरस्त होंगे जिन्होंने सत्र 2016-17 में काम नहीं किया है लेकिन उससे पहले के अनुभव के आधार पर हाईकोर्ट का आदेश प्राप्त कर उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।

उच्च शिक्षा विभाग ने ऐसे अतिथि विद्वानों के आमंत्रण पत्र निरस्त करने के निर्देश कॉलेजों को दिए हैं। साथ ही उन विषयों के अतिथि विद्वानों को भी आमंत्रण पत्र जारी नहीं करने को कहा है जिनमें नियमित शिक्षक की पदस्थापना हो गई है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद सरकारी कॉलेजों में इस साल अतिथि विद्वानों की नियुक्ति को लेकर विवाद की स्थिति बनी हुई है। 900 से ज्यादा अतिथि विद्वानों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर पिछले साल की सेवाएं ही यथावत रखने की अपील की थी। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में अतिथि विद्वानों को राहत देते हुए राज्य सरकार से कहा था कि सत्र 2016-17 में जो अतिथि विद्वान जिस कॉलेज में सेवारत हैं उनकी सेवाएं नियमित भर्ती तक यथावत रखी जाए।

हाईकोर्ट के इस आदेश से अतिथि विद्वानों की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी तरह से गड़बड़ा गई है। कई कॉलेजों में एक ही विषय के लिए दो-दो अतिथि विद्वान आ गए हैं। किसी को कक्षाएं आधी मिल रही हैं तो कहीं एक भी कक्षा आवंटित नहीं की गई है। बताया जाता है कि कुछ ऐसे भी अतिथि विद्वानों ने हाईकोर्ट के आदेश के तहत कॉलेजों में उपस्थिति दर्ज करायी है जिन्होंने सत्र 2016-17 के बजाए उससे पहले के सालों में काम किया है। सागर जिले में ऐसे अतिथि विद्वानों की संख्या करीब 10 है। अब उनका रिकॉर्ड जांचा जा रहा है। जो इस श्रेणी में नहीं आएंगे, उनके आमंत्रण-पत्र निरस्त कर दिए जाएंगे।

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