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कम्प्यूटर खरीदी घोटाले में भी फंसे प्रो. गजभिए
सीबीआई ने प्रीलिमिनरी इंक्वारी दर्ज की
नगर संवाददाता ¿सागर
डॉ.हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय में हुई शिक्षक नियुक्ति घोटाले की जांच में जुटी सीबीआई टीम की जांच का दायरा बढ़ गया है। टीम ने अब खरीदी प्रक्रिया मामले में भी कार्रवाई शुरू कर दी है। सीबीआई सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सीबीआई ने विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी में हुई कंप्यूटर खरीदी मामले में विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. एनएस गजभिए सहित पर्चेस कमेटी में शामिल रहे लोगों के खिलाफ प्रीलिमिनरी इंक्वायरी दर्ज की है। यह एफआईआर की ही पहली स्टेज है। सीबीआई ने जांच में पाया है कि कंप्यूटर 31 मार्च 2009 में खरीदी होना बताया गया है। ऑर्डर से लेकर सप्लाई एवं पेमेंट का काम एक ही दिन में हुआ। जबकि इन पर निर्माण की स्लिप जून 2009 की लगी हुई है। इस प्रकार यह खरीदी प्रक्रिया पूरे नियमों को दरकिनार कर हुई थी और शर्तों का उल्लंघन किया गया। इंस्टालेशन होने के बाद इनका पेमेंट होना था, जबकि भुगतान 31 मार्च 2009 को ही कर दिया गया। डीवीडी राइटर के पैसों का भुगतान हुआ, जबकि सीडी राइटर लगवाए। इसमें भी पैसों की हेर-फेर की आशंका है। पूरी खरीदी प्रक्रिया करीब 78 लाख रुपए की थी। यह कंप्यूटर भोपाल की टौरस कंपनी ने सप्लाई किए थे। आरटीआई में मिली जानकारी के मुताबिक इस कंपनी से प्रो. गजभिए के कार्यकाल में 7 करोड़ 43 लाख रुपए की खरीदी हुई थी। प्रो. गजभिए के कार्यकाल में यह पहला बड़ा घोटाला हुआ था। उन्होंने मार्च माह में ही विश्वविद्यालय में ज्वाइन किया था, बाद में कुछ समय बाद जब आरटीआई में जानकारी उजागर हुई तो, इसी माह में यह बड़ा घोटाला भी सामने आया।
6मामले पहले से दर्ज
30मई को सीबीआई ने विश्वविद्यालय में छापा मारकर शिक्षक नियुक्ति घोटाले में पूर्व कुलपति प्रो. गजभिए सहित सिलेक्शन एवं रिक्रूटमेंट में शामिल रहे विश्वविद्यालय के 8 प्रोफेसर एवं 4 नवनियुक्त शिक्षकों पर एफआईआर दर्ज की थी। लाइब्रेरियन की नियुक्ति मामले में भी विजिटर नाॅमिनी सहित करीब 11 लोगों के खिलाफ पीई हुई। अब तक गजभिए के खिलाफ 6 मामले दर्ज हो चुके हैं।