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संयम, ईमानदारी से आगे बढ़ें न्यायिकजन: चीफ जस्टिस

5 वर्ष पहले
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\\\'किसी भी इंस्टीट्यूशन के लिए विश्वास बेहद अहम होता है। न्याय व्यवस्था से लोगों की आस्था और विश्वास जुड़ा है। यह एक दिन में नहीं बना और तब तक रहेगा, जब तक न्याय व्यवस्था है। यह हम सब को मिलकर तय करना है कि इसे आगे और ऊंचाइयों पर कैसे ले जाना है। सबसे बड़ी जिम्मेदारी इस क्षेत्र में आ रहे युवा वकीलों और जजों की है।\\\'

यह बात हाईकोर्ट जबलपुर के चीफ जस्टिस अजय मानिकराव खानविलकर ने कही। वे शनिवार को विश्वविद्यालय के स्वर्ण जयंती हॉल में \\\'न्याय प्रक्रिया को सशक्त करने के उपाय\\\' विषय पर आयोजित राज्य स्तरीय विधिक सेमिनार में बोल रहे थे। राज्य अधिवक्ता परिषद और जिला अधिवक्ता संघ के संयुक्त तत्वावधान में हुए इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि \\\'हम सभी के लिए यह चिंता का विषय होना चाहिए कि सौ में से सिर्फ 10 फीसदी विवादों के मामले ही कोर्ट तक पहुंच रहे हैं। 90 फीसदी लोग कोर्ट आते ही नहीं। ऐसा क्यों? यह बात सही है कि कोर्ट में जजों की कमी है। सरकारें भी इस बात को लेकर चिंतित हैं। कई संशोधन हाे रहे हैं। सवाल यह है कि इस कमी को दूर करने के लिए मैं इतने जज कहां से लाऊं। समस्या यह भी है कि अपने ही प्रदेश में जज बनने के लिए कितने लोग उत्सुक हैं। आज की तारीख में प्रदेश के वकीलों में पेशेंस नहीं है।\\\'

आज के लोगों में संयम की कमी : उन्होंने कहा कि ये मेरा घर है और मैं इस घर का मुखिया हूं। आज के लोगों में संयम की कमी हो गई है। लोग न्यायिक सेवा में आने के बाद कम समय में ही ज्यादा से ज्यादा भाैतिक संसाधन जोड़ना चाहते हैं। उनके अंदर इतना संयम नहीं कि 10 साल रुकें ईमानदारी से जियें। मुखिया होने के नाते मैं अपना फर्ज समझता हूं कि लोगों को उनके कर्तव्य और जिम्मेदारी याद दिलाऊं। न्याय व्यवस्था पर लोगों के विश्वास को कैसे बढ़ाया जाए यह हमें अपना कर्तव्य करने से पहले सोचना होगा। बात जल्द निर्णय की नहीं है। सही निर्णय और न्याय करने के लिए हमें खुद को सक्षम बनाना होगा। गल्तियां सभी जगह और सबसे होती हैं। हमें इस पर बहस करने के बजाय भविष्य कैसा हो इस पर चर्चा करना चाहिए। इसके लिए हमें तुम और मैं की बात छोड़, हम और आप की भाषा में बात करना होगी। न्याय व्यवस्था जजों और वकीलों की नहीं आम आदमी की जरूरत है। उनके लिए हमें इसे साफ-सुथरा और निष्पक्ष बनाना होगा। इसके लिए हर एक को निष्पक्ष रहना होगा।

राज्य स्तरीय विधिक सेमिनार को संबोधित करते जबलपुर हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधिपति अजय मानिकराव खानविलकर। राज्य स्तरीय विधिक सेमिनार में उपस्थित आमंत्रित अतिथि।

सागर में हाईकोर्ट की खंडपीठ खोलने की मांग
कार्यक्रम का संचालन करते हुए संघ के सचिव शिवदयाल बड़ोन्या ने चीफ जस्टिस खानविलकर से सागर में हाईकोर्ट की खंडपीठ खोलने की मांग की। संभागीय और जिला मुख्यालय होने के कारण यहां कई ऐसे मामले सामने आते हैं, जिनमें हाईकोर्ट से ही न्याय मिल सकता है। इसके लिए यहां के लोगों को करीब 200 किलोमीटर जबलपुर जाना पड़ता है। खंडपीठ सागर में खुलने से लोग काे सरलता और सुलभता से न्याय मिल सकेगा। चीफ जस्टिस ने मांग पर विचार करने का आश्वासन दिया है।

लाइब्रेरी के लिए योगदान पर वरिष्ठों का सम्मान
जिला अधिवक्ता संघ की लाइब्रेरी के लिए करीब 765 बहुमूल्य पुस्तकें देने पर कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल मैत्रा को स्मृति चिन्ह से सम्मानित किया गया। उनकी गैरमौजूदगी में यह सम्मान उनकी बड़ी बेटी निवेदिता मैत्रा और सुरभि बैनर्जी काे दिया गया। दरअसल मैत्रा उम्रदराज होने के कारण सेमिनार में नहीं आ सके थे। इस कारण उनकी बेटियों को यह सम्मान दिया गया। कार्यक्रम में जिला अधिवक्ता संघ द्वारा प्रकाशित की गई स्मारिका 2016 का विमोचन भी अतिथि न्यायाधीशों ने किया।

जस्टिस सेठ ने साझा किए अनुभव
हाईकोर्ट के पोर्टफोलियो जज एसके सेठ ने कहा कि न्याय व्यवस्था एक रथ है। पक्षकार इसके पहिए और जज सारथी हैं। इनके बीच जब तक सामंजस्य, निष्पक्षता और विश्वास बना रहेगा। न्याय की गाड़ी चलती रहेगी। सेमिनार को राज्य अधिवक्ता परिषद जबलपुर के उपाध्यक्ष दिनेश नारायण पाठक, राज्य अधिवक्ता परिषद जबलपुर की कार्यकारिणी समिति उपाध्यक्ष रश्मि ऋतु जैन, स्टेट बार काउंसिल सदस्य मृगेंद्र सिंह, जिला अधिवक्ता संघ अध्यक्ष लखनलाल राठौर, अधिवक्ता सतीशचंद्र रावत ने भी संबोधित किया। दूसरे सत्र में अधिवक्ता केवीएस ठाकुर, फ्रांसिस जेवियर, राजकुमार जैन, कमलेश नेमा सहित अन्य ने न्याय व्यवस्था को सशक्त बनाने पर मंथन किया। सेमिनार में जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिल वर्मा, रजिस्ट्रार प्रशांत कुमार, अधिवक्ता अरुण यादव, जितेंद्र सिंह, राजेश वैद्य, विजेंद्र चौहान, संगीता चौबे सहित संघ के सदस्य तथा वकील मौजूद थे।

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