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रोजाना 5 लाख से ज्यादा मजदूरों का रोजगार प्रभावित

5 वर्ष पहले
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मनरेगा के संविदा अधिकारी और कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने का खामियाजा प्रदेश के मजदूर वर्ग को भुगतना पड़ रहा है।

योजना का काम ठप होने से प्रदेश में राेजाना करीब 5 लाख जाॅबकार्डधारी परिवारों को रोजगार नहीं मिल पा रहा है। आगे भी हड़ताल जारी रही तो ग्रामीण अंचलों के मजदूर वर्ग पर इसका बुरा असर पड़ेगा। सबसे ज्यादा प्रभावित सूखा घोषित किए गए जिलों के ग्रामीण होंगे। मनरेगा पोर्टल पद दर्ज आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में जनवरी माह में औसतन रोजाना करीब 11 लाख जाॅबकार्डधारी परिवारों को रोजगार दिया गया था। फरवरी माह में 1 दिन की अधिकारियों, कर्मचारियों एवं रोजगार सहायकों की हड़ताल से यह आंकड़ा लगभग 6 लाख 98 हजार 928 पर आ गया है। हड़ताल जारी रही तो करीब 5 से 6 लाख जॉबकार्डधारियों की संख्या रोजाना पोर्टल से कम होती जाएगी।

14 फरवरी तक लाखों परिवारों को नहीं मिल सकेगा रोजगार : जानकारी के अनुसार यदि हड़ताल 14 फरवरी से आगे बढ़ती है तो यह यह आंकड़ा पोर्टल पर और नीचे चला जाएगा। मसलन प्रतिदिन करीब 3 लाख मजदूर ही योजना के तहत मजदूरी करते ही दिखाई देंगे।

कई बार उठा चुके हैं मांग : संविदा अधिकारी, कर्मचारियों और रोजगार सहायकों ने नई संविदा नीति 2015 को निरस्त करने की कई बार मांग उठाई है।

ज्ञापन सहित अन्य माध्यमों से नियमितीकरण की मांग भी प्रशासन से की है। इन मांगों को लेकर 27 जनवरी को जिला मुख्यालय और 1 फरवरी को हजारों कर्मचारी मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपने भोपाल पहुंचे थे। इसके बाद भी शासन ने कर्मचारियों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया है। लिहाजा यह कर्मचारी 8 से 14 फरवरी तक कलमबंद हड़ताल पर चले गए हैं।

हड़ताल से अन्य योजनाओं के काम भी प्रभावित : मनरेगा अधिकारी, कर्मचारी एवं ग्राम रोजगार संगठन के प्रदेश अध्यक्ष रोशन सिंह परमार ने बताया कि हड़ताल से मनरेगा सहित अन्य योजनाआें के काम भी प्रभावित हो रहे हैं। इनमें एसएसएसएम, समग्र, जनसंख्या पोर्टल, इंदिराआवास, मुख्यमंत्री आवास मिशन, पंचायत दर्पण, पेंशन, जन्म एवं मृत्यु पंजीयन, एसबीएम शौचालय मध्यान्ह भोजन शामिल हैं। मांगे नहीं माने जाने पर 25 फरवरी से पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के संविदा अधिकारी, कर्मचारी एवं ग्राम रोजगार सहायक अनिश्चित कालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।

150 दिन के रोजगार का क्या होगा ?
प्रदेश के कई जिलों की तहसीलें सूखाग्रस्त घोषित की गई हैं। इन तहसीलों की ग्राम पंचायतों में एक वित्तीय वर्ष में 100 की जगह 150 दिन का रोजगार दिए जाने का निर्णय भारत सरकार ने लिया है। इस संबंध में राज्य की मनरेगा परिषद ने भी सभी जिलों के कलेक्टरों को निर्देश जारी किए हैं। राज्य शासन की कर्मचारी विरोधी नीति के कारण मनरेगा के संविदा कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं। हड़ताल आगे बढ़ी तो केंद्र सरकार की यह मंशा भी प्रभावित हो सकती है।

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