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वाटर सप्लाई व सीवर प्रोजेक्ट भी निगम के हाथ से गए अधिकारों में कटौती को लेकर मुख्यमंत्री से मिलेंगे मेयर
स्मार्ट सिटी के बाद सीवर व वाटर सप्लाई प्रोजेक्ट को काम कंपनी के हवाले करने से निगम का नहीं रहेगा कोई हस्तक्षेप
भास्कर संवाददाता | सागर
केंद्र व राज्य सरकार ने नगर सरकार के अधिकारों में कटौती कर दी है । शहर से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट में निगम का कोई दखल नहीं रहेगा। सरकार ने सीवर व वाटर सप्लाई प्रोजेक्ट मप्र अर्बन डवलपमेंट कंपनी को दे दिए हैं। इन कार्यों के लिए विदेशों से मिलने वाली कर्ज की राशि अब इस कंपनी को मिलेगी। इससे पहले पहले स्मार्ट सिटी के लिए बनी स्पेशल परपज व्हीकल (एसपीवी) में भी महापौर को स्थान नहीं दिया गया था। महापौर अभय दरे का कहना है कि योजनाओं में जनप्रतिनिधियों को साथ नहीं लिया गया तो इनके क्रियान्वयन में व्यवहारिक दिक्कतें आएंगी। 18 फरवरी के बाद महापौरों का दल मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से चर्चा कर अपनी बात रखेगा। हाल ही में पकैबिनेट ने नगरीय विकास एवं पर्यावरण विभाग के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसमें वाटर सप्लाई व सीवर प्रोजेक्ट्स के सभी काम निगम से छीन लिए गए हैं। विदेशी कर्ज से होने वाले इन कार्यों के वित्तीय अधिकार अब मप्र अर्बन डवलपमेंट कंपनी को दे दिए गए हैं। अब इस नए आदेश के बाद से मेयर और पार्षदों के सामने विकास कार्य कराने की समस्या तो खड़ी होगी। वहीं जनता की भी परेशानियां बढ़ेंगी। जनता किसी भी कार्य या उसमें गड़बड़ी की शिकायत के लिए पहले अपने क्षेत्र के पार्षद या फिर मेयर के पास जाती है, लेकिन इन दोनों को ही ऐसा कोई अधिकार नहीं दिया गया। जिसका उपयोग कर वे जनता को न्याय दिला सकें।
एमआईसी के अधिकार भी सीमित
वर्ष 1992 में सरकार ने संविधान में 74 वां संशोधन करते हुए नगरीय निकाय एवं जनप्रतिनिधियों को नगर सरकार का रूप दे दिया था। संशोधन के बाद कई विभागों को ननि में मर्ज कर दिया गया। फिर नगर सरकार का कार्यकाल 5 वर्ष तय हुआ। केंद्र व राज्य सरकारें लगातार संशोधन की अनदेखी कर नगर सरकार की अवधारणा खत्म कर रही हैं। राज्य सरकार ने मेयर निगम परिषद व मेयर इन कौंसिल को यूं तो बड़ी जिम्मेदार दिखाया है, लेकिन इनके पास ऐसा कोई अधिकार नहीं है कि वे किसी भी आदेश या योजना का क्रियान्वयन करा सकें। विकास कार्य एवं प्रशासनिक मामले में परिषद को नीति निर्धारण करने का तो अधिकार है। मेयर सिर्फ निगम कमिश्नर को पत्र भेज सकते हैं और किसी समस्या व अधिकारी पर कार्रवाई करना निगम कमिश्नर पर निर्भर है।