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श्री दिगंबर जैन महिलाश्रम में 76 वर्ष से दी जा रही बारहवीं तक मुफ्त शिक्षा

Sagar News - 600 रुपए में जैन समाज की छात्राआें के लिए छात्रावास और कक्षा पहली से बारहवीं तक जैन के अलावा किसी भी समाज की छात्रा के...

Dainik Bhaskar

Jan 18, 2016, 12:00 PM IST
श्री दिगंबर जैन महिलाश्रम में 76 वर्ष से दी जा रही बारहवीं तक मुफ्त शिक्षा
600 रुपए में जैन समाज की छात्राआें के लिए छात्रावास और कक्षा पहली से बारहवीं तक जैन के अलावा किसी भी समाज की छात्रा के लिए निशुल्क शिक्षा की व्यवस्था है। महंगाई के इस दौर में यह बड़ी मदद है। लक्ष्मीपुरा वार्ड में स्थित श्री दिगंबर जैन महिलाश्रम में करीब 475 छात्राओं को निशुल्क शिक्षा दी जा रही हैं। इनमें से करीब 160 छात्राएं हॉस्टल में भी रहती हैं। श्री दिगंबर जैन महिलाश्रम की स्थापना लक्ष्मीपुरा वार्ड में परम पूज्य संत श्री 105 गणेश प्रसाद जी वर्णी की प्ररेणा से सन् 1939 में की गई थी। उद्घाटन हरियाणा की विधायक श्रीमति लेखावती ने किया था। पहले ट्रस्ट के अध्यक्ष शिवप्रसाद मलैया थे। संस्था का उद्देश्य असहाय एवं ग्रामीण क्षेत्र की आर्थिक रूप से कमजोर बालिकाओं को शिक्षित एवं स्वावलंबी बनाना व महिला सशक्तिकरण को बढ़ाना है।

कमजाेर छात्राओं को कोचिंग की व्यवस्था : जैन समाज के अल्पसंख्यक में शामिल होने के बाद से आश्रम में पढ़ने वाली 65 छात्राओं के लिए छात्रवृत्ति भी मिलती हैं। श्री दिगंबर जैन महिलाश्रम में कमजोर छात्राओं के लिए टीचर बुलाकर अलग से कोचिंग की व्यवस्था की जाती है। छात्राओं का स्वास्थ्य ठीक रहे, इसलिए समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण होता है। इसके अलावा बीमार होने पर छात्राओं का इलाज ट्रस्ट की ओर से निशुल्क कराया जा रहा है। महिलाश्रम में 20 शिक्षिकाएं, 3 सुरक्षाकर्मी, 3 प्यून और खाना बनाने के लिए छह महिलाएं कार्यरत हैं। इसके अलावा कम्प्यूटर लैब, प्रैक्टिकल लैब और लाइब्रेरी की भी सुविधा छात्राओं के लिए उपलब्ध है।

सागर. महिला आश्रम के छात्रावास में एक साथ भोजन करती छात्राएं।

ट्रस्ट व प्रबंध कार्यकारिणी करती है संचालन

श्री दिगंबर जैन महिलाश्रम का संचालन शुरुआत से ही ट्रस्ट व प्रबंध कार्यकारिणी द्वारा होता आ रहा है। ट्रस्ट के चुनाव हर तीन साल में होते हैं। वर्तमान में प्रबंध कार्यकारिणी के अध्यक्ष कैलाश सिंघई (दाऊ) हैं। ट्रस्ट के अध्यक्ष सेठ प्रेमचंद जैन, अधिष्ठाता डॉ जीवन लाल जैन, उपाध्यक्ष अजीत मलैया व अशोक बहेरिया आदि हैं। अध्यक्ष कैलाश सिंघई ने बताया कि बिल्डिंग में और निर्माण के लिए हम प्रयासरत् हैं। जिससे यहां पढ़ने वाली छात्राओं की संख्या में इजाफा हो सके। इसके अलावा रसोई गैस और लाइट की खपत को कम करने के लिए सोलर ऊर्जा का उपयोग करने पर विचार किया जा रहा है।

छात्रावास व स्कूल में एडमिशन के लिए पहले आवेदन बुलाए जाते हैं। इसके बाद इंटरव्यू के आधार पर एडमिशन लिस्ट तैयारी की जाती है।

भवन में पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर भी है

महिलाश्रम के साथ-साथ भवन में पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर भी है, जिसका संचालन भी ट्रस्ट व प्रबंध कार्यकारिणी समिति द्वारा किया जाता है। यहां संस्था के छात्रावास में रहने वाली जैन समाज की बालिकाओं को बालबोध से लेकर मोक्ष शास्त्र, पुरुषार्थ सिद्धि उपाय, छहढाला आदि ग्रंथों का अध्ययन कराया जाता है।

ऐसे होते हैं एडमिशन

ये रही संस्था की

पूर्व छात्राएं

संस्था की पूर्व छात्राएं योग्य विदुषी बनकर आत्मकल्याण एवं समाजसेवा कर रही हैं। इनमें पूज्य श्री 105 विशुद्धमति माताजी (सांसारिक नाम सुमित्राबाई), पूज्य श्री 105 विनयमति माताजी (सांसारिक नाम ब्र. पं. राजमति बाई), पूज्य श्री 105 कनकमति माताजी (सांसारिक नाम ब्र. चिरोजा बाई), पूज्य 105 श्रद्धामति माताजी, पूज्य श्री 105 उपशांतमति माताजी, आर्यिका र| पूज्य श्री 105 दृढमति माताजी आदि शामिल है। इसके अलावा एक संस्था की पूर्व छात्रा विमला जैन मप्र उच्च न्यायालय जबलपुर की रिटायर्ड न्यायाधिपति व रिटायर्ड आईएएस सुरेश जैन की प|ी हंै।

महिलाश्रम में सीखा स्वाबलंबन

पूर्व न्यायाधीश विमला जैन ने बताया कि मैंने छठवीं से लेकर आठवीं तक की शिक्षा श्री दिगंबर जैन महिलाश्रम में प्राप्त की है। उस समय हमें सुमित्राबाई पढ़ाती थी जो बाद में पूज्य श्री 105 विशुद्धमति माताजी बनी। जिस समय हम स्कूल में पढ़़ते थे, हमें अपने हाथों से पानी भरना पड़ता था व बड़ी छात्राओं के साथ रोटियां बनानी पड़ती थी। इस समय जो सीख मिली, उससे मैं स्वाबलंबी बनी। जो मुझे जीवन भर काम में अाया।

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