उज्जैन। जिला अस्पताल में मरीजों को दवाइयां उपलब्ध कराने के लिए खोले गए दवाई वितरण केंद्र पर आवश्यक दवाइयां उपलब्ध नहीं है। एंटीबायोटिक, पेट रोग, उल्टी-दस्त एलर्जी की दवाइयां मरीजों को नहीं मिल पा रही हैं। डॉक्टर्स को बाजार की दवाइयां लिखने पर भी रोक लगा रखी है। ऐसे में मरीजों के सामने परेशानी यह है कि जो दवार्द डॉक्टर उन्हें लिख रहे हैं, वह दवाई सेंटर पर नहीं मिल पा रही है।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा माधवनगर अस्पताल, जीवाजीगंज अस्पताल जिला अस्पताल में दवाई वितरण केंद्र खोले गए हैं। यहां से मरीजों को 24 घंटे नि:शुल्क दवाइयां उपलब्ध करवाई जाती है। करीब दो माह से शासन से अनुबंधित कंपनी टीएमसी से दवाइयां सप्लाई नहीं हो रही हैं। अस्पताल प्रशासन भी बेबस है। वह स्थानीय स्तर पर दवाइयां नहीं खरीद पा रहा है। ऐसे में यहां दवाइयों की समस्या हो गई है।
मरीजों को सिप्रोफ्लेक्सिन एंटीबायोटिक, एलर्जी पेट तथा उल्टी-दस्त की दवाइयां नहीं मिल पा रही है। तो इनका सिरप है और इंजेक्शन टेबलेट। डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवाई लेने के लिए मरीज दवाई काउंटर पर जाता है तो यहां से उसे जवाब मिलता है कि यह दवाई उपलब्ध नहीं है। बताया जाता है कि 1 सितंबर से दवाइयों के नए टेंडर हुए हैं। जिला अस्पताल की ओर से दवाइयों के आॅर्डर भेजे गए हैं लेकिन यहां दवाइयां आने में समय लग जाएगा। दवाइयां नहीं मिल पाने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। डॉक्टर बाहर की दवाई नहीं लिख सकते। बाहर की दवाइयां लिखे जाने पर प्रतिबंध लगा हुआ है। ऐसे में मरीजों के सामने परेशानी यह है कि वह अपना उपचार कैसे करवाए।
''वितरणकेंद्रों पर दवाइयों की समस्या है। अनुबंधित कंपनी से दवाइयां नहीं रही है। दवाइयों के लिए आॅर्डर भेजे हैं।'' डॉ.डीपीएस गहरवार, प्रभारीसिविल सर्जन
ये दवाइयां नहीं
नाम उपयोग
सिप्रोप्रॉक्सिन एंटीबायोटिक ओंडेम उल्टी में
एसीलॉक एसिडिटी
बी काम्पलेक्स कमजोरी में
मल्टी विटामिन ------
डामपेरेकान उल्टी
मेट्रोजिल पेट रोग
डीएनएस/एनएस उल्टी-दस्त
एनपी एलर्जी
जिला अस्पताल में सफाई नहीं होने और पानी का भराव होने जैसी समस्याएं सीएम हेल्पलाइन तक पहंुची है। जिसमें बताया गया है कि अस्पताल परिसर में कीचड़ गंदगी फैली हुई है। सीवेज लाइन डाले जाने के दौरान खुदाई की गई थी, इस वजह से यहां पैबर ब्लॉक उखाड़ दिए गए थे। खुदाई के बाद से यहां मिट्टी फैली हुई है और बारिश में कीचड़ हो गया है। अस्पताल प्रशासन की ओर से स्पष्टीकरण भेजा गया है।
दवाइयों के पते नहीं 100 और बढ़ाई : स्वास्थ्य विभाग की ओर से दवाई वितरण केंद्रों पर 146 दवाइयों को अनिवार्य किया गया था। बाद में इसे बढ़ाकर 200 किया गया, अब दवाइयों की संख्या 300 की गई है। दवाई सेंटर्स पर यह हालत है कि यहां 100 दवाइयों की कमी है। अस्पताल प्रशासन की ओर से इन दवाइयों की उपलब्धता के लिए कई बार शासन को लिखा गया लेकिन दवाइयां नहीं भेजी जा रही है। स्थानीय स्तर पर भी दवाइयां नहीं खरीद पा रहे हैं।
फिनाइल की भी कमी कैसे हो सफाई : जिला अस्पताल में फर्श लेट-बाथ की सफाई पूरे समय होना चाहिए। इसके लिए फिनाइल का उपयोग किया जाता है। अस्पताल में इन दिनों फिनाइल ब्लीचिंग पाउडर की कमी है। ऐसे में सफाई को लेकर समस्या खड़ी हो गई है। इससे इन्फेक्शन होने का डर भी बना रहता है। इसके अलावा आईवी सेट भी नहीं है। इनका उपयोग बॉटल लगाने में किया जाता है। इस वजह से मरीजों के साथ स्टॉफ को भी परेशानी हो रही है।
स्ट्रेचरट्राली के पहिए टूटे, मरीजों को कैसे ले जाएं : जिलाअस्पताल में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। यहां स्ट्रेचर ट्राॅली के पहिए टूटे हुए हैं। ऐसे में मरीजों को यहां-वहां ले जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खासकर हड्डी से संबंधित मरीजों उनके परिजनों को ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल प्रशासन पहिए तक नहीं लगवा पा रहा है। वहीं आरएमओ, प्रसूतिगृह सिविल सर्जन कार्यालय की फोटो काॅपी मशीन खराब है। ऐसे में कर्मचारियों को काम में परेशानी हो रही है।
जिला अस्पताल के दवाई वितरण केंद्र पर दवाइयों का टोटा।
मरीजों को एंटीबायोटिक, पेट रोग एलर्जी की नहीं मिल रही दवाई ।
सफाई का मामला सीएम हेल्पलाइन तक पहुंचा।