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तीन माह बाद मेडिकल बोर्ड में क्यों बुलाया
दो डॉक्टर को ट्रेनिंग पर भेजा, ओपीडी में 500 मरीज
भासं. उज्जैन. जिलाअस्पताल की ओपीडी (बाह्य रोगी विभाग) में बुधवार सुबह उपचार के लिए पहुंचे मरीजों को इंतजार करना पड़ा। बुधवार को करीब 500 मरीज ओपीडी में थे। जिला अस्पताल प्रशासन द्वारा दो डॉक्टर्स को 10 दिन के लिए ट्रेनिंग पर भेजे जाने, एक डॉक्टर के अवकाश पर होने तथा दूसरे डॉक्टर के पास में एक साथ चार जिम्मेदारियां होने से यह स्थिति बनी। माधवनगर अस्पताल के डाॅक्टर की यहां ड्यूटी लगाई गई।
जिला अस्पताल की जनरल ओपीडी सुबह 8 से दोपहर 1 बजे शाम 5 से 6 बजे तक खुलती है। जनरल ओपीडी में क्लास टू डॉक्टर ड्यूटी करते हैं। अस्पताल प्रशासन के पास क्लास टू डॉक्टर 10 हैं, इनमें से डॉ.जीएस धवन डॉ.जितेंद्र शर्मा 22 सितंबर से 1 अक्टूबर तक केम हाॅस्पिटल मुंबई में डी-एडीशन की ट्रेनिंग पर भेजा है। वहीं हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ.अजय खरे अवकाश पर हैं तथा डॉ.सीएम त्रिपाठी को वार्ड में राउंड, डीवीडी वार्ड, कैंसर के रोगियों की कीमोथैरिपी डाइट आदि का जिम्मा अस्पताल प्रशासन ने सौंप रखा है। शेष 6 डॉक्टर की रोटेशन से ड्यूटी है। ऐसे में माधवनगर अस्पताल से मेडिकल आॅफिसर एनके पटेल की ड्यूटी जिला अस्पताल की ओपीडी में लगाई गई।
^मेरेपास ओपीडी के अलावा अन्य जिम्मेदारी भी है। मुझे उनके लिए भी जाना पड़ता है।\\\'\\\' डॉ.सीएम त्रिपाठी
^मेरीपदस्थापना माधवनगर अस्पताल में है। बुधवार को 500 मरीजों की ओपीडी थी। इतने मरीजों को देखने में समय लगता है।\\\'\\\' डॉ.एनकेपटेल
उज्जैन। छुट्टीपर जाने के तीन माह बाद मुझे मेडिकल बोर्ड में क्यों बुलाया जा रहा है। जिला अस्पताल प्रशासन ने 19 डॉक्टर की छुट्टी क्यों स्वीकृत कर दी, उसका क्या आधार था। ये सवाल जिला अस्पताल में पदस्थ डॉ.बीबी पुरोहित ने बुधवार को उठाए हैं। उन्होंने अस्पताल प्रशासन के निर्णय पर सवाल उठाते हुए हाईकोर्ट में जाने की चेतावनी दी है। उनका कहना है 28 सितंबर को मप्र चिकित्सा अधिकारी संघ की बैठक में यह मुद्दा उठाया जाएगा। उनके प्रकरण का निराकरण नहीं हुआ तो वे हाईकोर्ट तक जाएंगे। सिविल सर्जन डॉ.सीडी शर्मा इस बारे में कुछ भी कहने को तैयार नहीं है। ध्यान रहे डॉ.पुरोहित अचानक अवकाश पर चले गए थे, जिसके चलते उनकी सर्विस ब्रेक की डॉ.शर्मा ने अनुशंसा की है। इसके बाद से विवाद खड़ा हो गया है।