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- शासकीय जमीन पर निर्माण सिद्ध हो तो उसे अवैध मानकर हटाएं
शासकीय जमीन पर निर्माण सिद्ध हो तो उसे अवैध मानकर हटाएं
यह अपर कलेक्टर कोर्ट का फैसला
> नागदा तहसीलदार द्वारा प्रकरण क्रमांक 08/अ-68/04-05 में 8 दिसंबर 2010 के पारित निर्णय का अवलोकन किया गया।
> जिसमें प्रथमदृष्टया तथ्य पाए गए कि तत्कालीन पटवारी फूलसिंह को शासन की ओर से साक्ष्य के लिए नियुक्त किया गया था।
> तहसील न्यायालय नागदा ने अनावेदक (ग्रेसिम इंड्रस्ट्रीज लिमिटेड) को जवाब, साक्ष्य दस्तावेज के लिए पर्याप्त अवसर दिए।
> आवेदक (ग्रेसिम इंड्रस्ट्रीज अपर कलेक्टर कोर्ट के लिए) चाहता तो स्वयं भी पूर्व में पारित आदेशों की प्रमाणित प्रतिलिपि प्राप्त कर अधीनस्थ न्यायालय (तहसील) के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए स्वतंत्र था।
> लेकिन प्रकरण में उन्होंने ये उक्त प्रमाण अधीनस्थ न्यायालय में प्रस्तुत करते हुए संभवत: प्रकरण को लंबित रखने के इरादे से अपर कलेक्टर न्यायालय में पुनरीक्षण आवेदन प्रस्तुत कर दिया।
> जिस पर पुनरीक्षण याचिका सारहीन होने से निरस्त की जाती है। एवं नागदा तहसील न्यायालय को यह निर्देश दिए जाते है कि वह प्रकरण में विधिवत पटवारी साक्ष्य लेकर प्रकरण का तत्काल समय-सीमा में निराकरण करें।
> यदि अनावेदक (ग्रेसिम इंड्रस्ट्रीज ) का अवैध आधिपत्य सिद्ध होता है तो उसे अवैध निर्माण मानकर तत्काल हटाया जाए। प्रकरण समाप्त किया जाता है।
नोट-अपर कलेक्टर कोर्ट के निर्णय के अनुसार)
भास्कर संवाददाता. उज्जैन
अपर कलेक्टर कोर्ट ने शनिवार को एक और निर्णय सुनाया। आदेश के तहत अपर कलेक्टर कोर्ट ने नागदा स्थित ग्रेसिम इंडस्ट्रीज लिमिटेड (बिरला ग्राम) की याचिका को सारहीन मानकर निरस्त कर दी। साथ ही नागदा तहसील न्यायालय को निर्देश दिए कि यदि निर्माण शासकीय जमीन पर पाए जाना सिद्ध होता है तो उसे अवैध मानकर हटाया जाए। गौरतलब है कि अपर कलेक्टर कोर्ट में 21 जनवरी 11 से एक याचिका विचाराधीन थी। यह याचिका ग्रेसिम इंड्रस्ट्रीज की ओर से अपर कलेक्टर कोर्ट में लगाई थी। करीब साढ़े तीन साल से उक्त याचिका विचाराधीन थी। जिसे गुरुवार को सारहीन मानते हुए निरस्त कर दिया गया।
यहहै मामला: नागदातहसील न्यायालय ने 8 दिसंबर 2010 को प्रकरण क्रमांक 08/अ-68/2004-05 में एक आदेश पारित किया था। इस आदेश से असंतुष्ट होकर ग्रेसिम इंडस्ट्रीज लिमिटेड बिरला ग्राम के सहायक प्रबंधक सावरमल जालवाल की ओर से पुनरीक्षण आवेदन अपर कलेक्टर कोर्ट में प्रस्तुत किया ग