उज्जैन। विक्रम विवि मामले में मुख्य आरोपियों को जेल पहुंचाने के बाद पुलिस अब वीडियो फुटेज से मौके पर मौजूद अधिकारी-कर्मचारी की पहचान कर उन्हें गवाह बनाएगी। पुलिस आरोपियों पर शिकंजा कसने के लिए धारा बढाने पर भी विचार कर रही है।
पुलिस के अनुसार यूनिवर्सिटी में तोड़फोड़ और कुलपति प्रो. जवाहर लाल कौल से विहिप और बजरंग दल के लोगों द्वारा अभद्रता करते समय मौके पर कई प्रोफेसर और कर्मचारी मौजूद थे। वे उपद्रवियों को पहचानते थे, फिर भी अज्ञात लोगों पर केस दर्ज करवाया था।
नतीजतन वीडियो फुटेज से शिनाख्त करने के बाद आरोपियों को पकड़ा जा सका। मामले में अब तक गवाह सामने नहीं आए हैं, इसलिए वीडियो फुटेज से घटना के चश्मदीद रहे प्रोफेसर और कर्मचारियों की पहचान कर नोटिस जारी करेंगे, जिससे कि बयान दर्ज कर सकें।
घटना के दौरान मौके पर प्रभारी कुलसचिव डॉ. डीके बग्गा, डॉ. राकेश ढंड, डॉ. दर्शन दुबे, कर्मचारी शिशिर श्रीवास्तव, राजेश ठाकुर दो-तीन अन्य लोग थे। प्रो. ढंड ने रिपोर्ट की थी।
एसपीने कहा और आरोपी पकड़ो- पुलिसने वीडियो फुटेज के आधार पर दो दर्जन उपद्रवियों द्वारा घटना करना माना था। 18 लोगों की शिनाख्त हुई लेकिन गिरफ्तारी 15 आरोपियों की ही हो सकी। गुरुवार को एसपी अनुराग ने सीएसपी विजय डावर और टीआई आरके सिंह को तीन और आरोपियों को भी पकड़ने के निर्देश दिए।
संघकार्यकर्ताओं पर रोक लगाने की मांग: भोपाल। राष्ट्रीय सेक्युलर मंच ने उज्जैन के कुलपति के कमरे में हंगामा करने वाले राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यकर्ताओं पर रोक लगाने और जिम्मेदार लोगों को गिरफ्तार करने की मांग की है। मंच के संयोजक एलएस हरदेनिया ने गृह मंत्री बाबूलाल गौर को पत्र लिखकर वास्तविकता पता लगाने की मांग भी की है।
'' घटनास्थल पर मौजूद लोगों को फुटेज से पहचान कर बयान देने के लिए तलब करेंगे। धारा बढ़ाने के संबंध में विचार कर रहे है।'' विजय डावर, सीएसपी
मामला विक्रम विश्वविद्यालय में तोड़फोड़ का: केस में बढ़ सकती है धारा
बढ़ सकती धारा 452 : पुलिसके अनुसार मामले में धारा 353, 332, 147,148 427 में केस दर्ज है। इसमें धारा 452 भी बढ़ सकती है। इस संबंध में कानूनविदों से राय के बाद निर्णय होगा। याद रहे धारा 452 मारपीट, हमला या रास्ता रोकने, जबरन घर में घुसने पर लगती है। इसमें सात साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
घटनाक्रम विश्वविद्यालय की आंतरिक राजनीति का हिस्सा
उज्जैन। विक्रमविवि में सोमवार को हुई घटना में विवि के गलियारों में इस बात को लेकर चर्चा है कि पूरा घटनाक्रम विवि की आंतरिक राजनीति का ही हिस्सा है। घटना के बाद प्रो. कौल की तबीयत बिगड़ गई थी आैर उन्हें आईसीयू में दाखिल करना पड़ा था। विवि में चर्चा है कि पूरी घटना पूर्व नियोजित थी आैर इसके पीछे विवि के ही कुछ लोग जुड़े हैं, जिनका मकसद विवि में अराजकता का माहौल उत्पन्न कर धारा-52 लगाने का प्रयास करना था लेकिन मामला इतना बढ़ा कि उनकी यह बाजी उलटी पड़ गई आैर कुल का पूरा कुनबा प्रो. कौल के समर्थन में उतर आया।
घटनाक्रम में जिन नामों को लेकर विवि में चर्चा है वे दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सरोकार रखते हैं। इनके अलावा ऐसे छात्रनेताओं के नाम भी चर्चा में हैं, जो किसी किसी तरह विवि अधिकारियों पर दबाव बनाकर लाभ उठाने के प्रयास में हैं।
''ऐसी उम्मीद नहीं है कि घटनाक्रम के पीछे विवि के किसी सदस्य का हाथ हो। पुलिस को निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाना चाहिए। साथ ही मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।'' प्रो.एसके मिश्रा, अध्यक्षविक्रम विवि शिक्षक संघ ।