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इधर 32 सूत्रीय मांगों को लेकर काली पट्‌टी बांधकर किया काम

7 वर्ष पहले
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(महिला की मौत के बाद प्रसूितगृह में जमा आक्रोशित परिजन।)
उज्जैन। सख्याराजे प्रसूति गृह में गुरुवार को गर्भवती महिला की मौत हो गई। परिजनों ने उपचार में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। वे बोले इन्हें तो बस रुपए चाहिए। देवासगेट थाना पुलिस की समझाइश के बाद परिवार के लोग शव लेकर चले गए।
भूरीकुंवर पति देवेंद्रसिंह (20) निवासी तनोड़िया आगर को गुरुवार सुबह जननी एक्सप्रेस से तराना से सुबह 6.20 बजे सख्याराजे प्रसूतिगृह रैफर किया था। उसे आठ माह का गर्भ था। उसकी पहली डिलेवरी होना थी। प्रसूतिगृह में महिला का चार घंटे तक उपचार चलता रहा। महिला की गंभीर हालत के बारे में उसके परिजनों को बता दिया था। बताया जाता है कि उसे यहां से इंदौर रैफर करने की तैयारी थी कि सुबह 10.10 बजे उसकी मौत हो गई। इसके बाद परिजनों ने हंगामा कर दिया। शव को घर ले जाने के लिए उन्होंने अस्पताल प्रशासन से वाहन की मांग की तो अस्पताल प्रशासन ने यह कहते हुए इंकार कर दिया कि ऐसी कोई व्यवस्था अस्पताल में नहीं है।
जिला अस्पताल प्रशासन को घटना के बारे में लिखित में अवगत करा दिया है।
^महिलाकी हालत गंभीर थी, उसका ब्लड प्रेशर बहुत हाई था। उसके उपचार की हरसंभव कोशिश की गई। लापरवाही जैसी कोई बात नहीं। मेरे अलावा भी दूसरे डॉक्टर्स ने महिला को देखा था।'' डॉ.अनिताजोशी, ड्यूटी डॉक्टर
परिजनों ने लगाए इलाज में लापरवाही के आरोप, बोले-इनको तो बस रुपए चाहिए-
''प्रसूितगृहमें उपचार से पहले रुपए मांगे जाते हैं। सिविल सर्जन भी लोगों की नहीं सुनते। हमारे साथ भी यही सब हुआ।'' बलराम सिंह चौहान, मृतका का भाई।
स्टाफ नर्सों को वेतन नहीं और अस्पताल प्रशासन बोला-हम जिम्मेदार नहीं
उज्जैन। जिलाअस्पताल सख्याराजे प्रसूतिगृह में बाहर से पदस्थ 50 नई स्टाफ नर्सों को तीन माह से वेतन नहीं मिला है। ऐसे में नर्सों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल प्रशासन का तर्क है कि स्टॉफ नर्सों ने हाल ही में अपने दस्तावेज जमा करवाए हैं। वेतन नहीं मिल पाने के लिए अस्पताल स्तर पर कोई लापरवाही नहीं है। उनका परमानेंट एकाउंट नंबर मुंबई से नहीं आया है, इस वजह से जिला कोषालय से वेतन जारी नहीं हो पा रहा है।

अन्य जिलों से करीब 50 स्टॉफ नर्सों की यहां नवीन पदस्थापना हुई है। उन्हें जून, जुलाई अगस्त का वेतन नहीं मिल पाया है। यानी जब से उनकी पदस्थापना हुई है, तब से उन्हें वेतन नहीं मिला है। वेतन नहीं मिलने खासकर बाहरी होने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने इस बारे में अस्पताल प्रशासन को अवगत करा दिया है।
वहीं अस्पताल प्रशासन का कहना है कि नई स्टॉफ नर्सों का मुंबई में एनएसबीएल में रजिस्ट्रेशन होना है तथा वहां से उनका परमानेंट अकाउंट नंबर जारी होना है। यह नंबर जिला कोषालय में पहुंचने के बाद नर्सों को वेतन जारी हो सकेगा। जिला कोषालय एनएसबीएल के बीच प्रक्रिया पूरी होने के बाद आगे कार्रवाई हो सकेगी।
मई, जून जुलाई का वेतन भी 50 स्टॉफ नर्सों को भोपाल से बजट का आवंटन नहीं होने से नहीं मिल पाया था। बजट आवंटन के लिए स्वास्थ्य आयुक्त को तीन बार पत्र लिखे गए थे, उसके बाद बजट का आवंटन हो पाया था। इस बार वेतन नहीं मिल पाने का मामला स्वास्थ्य विभाग से संबंधित होकर एनएसबीएल जिला कोषालय के बीच का है।
''मुंबईमें एनएसबीएल में रजिस्ट्रेशन होने के बाद परमानेंट अकाउंट नंबर जारी होगा। यह नंबर जिला कोषालय में पहुंचने के बाद वेतन जारी हो सकेगा। वेतन नहीं मिल पाने के लिए अस्पताल प्रशासन जिम्मेदार नहीं है।'' डॉ.सीडी शर्मा, सिविल सर्जन

ग्रेड में संशोधन त्रिस्तरीय क्रमोन्नति वेतनमान की मांग को लेकर तृतीय वर्ग शा. कर्मचारी संघ के सदस्यों पदाधिकारियों ने गुरुवार को काली पट्टी बांधकर काम किया। उन्होंने जिला अस्पताल परिसर में नारेबाजी की। कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष मोतीलाल निर्मल ने बताया 32 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदेश में कर्मचारी संगठन सात चरण में आंदोलन कर रहे हैं। तीसरे चरण के आंदोलन के तहत कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर कार्य किया। जिले के कर्मचारियों ने मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया है।