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वैज्ञानिकों को भी संसद में मिले विचार प्रस्तुत करने का मौका
वैज्ञानिकउन्नति के दौर में वैज्ञानिकों को भी संसद में अपनी बात कहने का मौका मिलना चाहिए। वैज्ञानिक नए विचारों के साथ अपनी शोध को आगे बढ़ाएं आैर उसका उचित तरीके से प्रचार भी करें।
विक्रम विवि के स्वर्ण जयंती हाल में आयोजित वैज्ञानिक नवाचार एवं बौद्धिक संपदा कानून पर तीन दिनी अंतरराष्ट्रीय कांग्रेस के शुभारंभ पर यह बात गुरुवार दोपहर सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज न्यायमूर्ति ज्ञानसुधा मिश्रा ने मुख्य अतिथि के रूप में कही। स्वर्ण जयंती हॉल में आयोजित शुभारंभ समारोह की अध्यक्षता कुलपति प्रो. जवाहरलाल कौल ने की। अन्य अतिथियों के रूप में वरिष्ठ आईएएस सुधीर कुमार, पेटेंट डिजाइन (मुंबई) के उप नियंत्रक डॉ. राकेश कुमार, भारतीय उद्योग संगठन नईदिल्ली के वरिष्ठ सलाहकार राघवेंद्रलाल साहा एवं बैंक ऑफ इंडिया के जोनल मैनेजर एके पाठक मंचासीन थे। स्वागत भाषण सेमिनार के मुख्य समन्वयक प्रो. एमएस परिहार ने दिया। विधि क्षेत्र की मासिक शोध पत्रिका शोध मंदाकिनी आैर स्मारिका की सीडी का भी विमोचन किया गया। पत्रिका के प्रधान संपादक कुलपति प्रो. कौल एवं संपादक डॉ. निशा केवलिया हैं। संचालन डॉ. रूबल वर्मा ने किया एवं आभार आयोजन सचिव डॉ. अलका व्यास ने माना। कार्यक्रम में प्रभारी कुलसचिव डॉ. डीके बग्गा ने जस्टिस मिश्रा को स्मृति चिन्ह भेंट किया। तीन दिनी सेमिनार का आयोजन विक्रम विवि की ओर से मप्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद भोपाल और अभा विधि शिक्षक कांग्रेस के सहयोग से किया जा रहा है।
पढ़ेगए 10 रिसर्च पेपर: शलाकादीर्घा में दोपहर 2.30 बजे से प्रथम तकनीकी सत्र हुआ। अध्यक्षता राघवेंद्रलाल साहा (नईदिल्ली) ने की। इसमें राकेश कुमार (मुंबई), डॉ. अभय जेरे (पुणे) डॉ. एचएस चावला (इंदौर) के व्याख्यान हुए। तकनीकी सत्र में देशभर से आए 10 प्रोफेसर्स शोधार्थी ने शोधपत्रों का वाचन किया। सत्र का संचालन प्रो. एचएस राठौर ने किया।
केवलएक विदेशी प्रतिभागी
विविकी ओर से आयोजित किए जा रहे इस सेमिनार को अंतरराष्ट्रीय नाम दिया गया है लेकिन इसमें मात्र एक विदेशी प्रतिभागी सहभागिता कर रही है। ईरान से आई फातिमा इस्लामी ने बताया कि उन्होंने नईदिल्ली में अपना प्रोजेक्ट शैक्षणिक कार्य किया है। जिसके सुपरवाइजर कुलपति प्रो. कौल थे। सेमिनार में फातिमा का 20 सितंबर को व्याख्यान होगा। फातिमा के अलावा अन्य कोई विदेशी प्रोफेस