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शिक्षा नीित ऐसी हो, जहां अधिकारी आैर मजदूर के बच्चे एक साथ पढ़ सकंे
शिक्षानीति ऐसी होना चाहिए जिसमें बड़े अधिकारियों आैर मजदूर के बच्चे साथ-साथ पढ़ सकें। जब उच्च अधिकारियों का बच्चा उस स्कूल में जाएगा, जिसमें मजदूर के बच्चे पढ़ते हैं तो शिक्षा का स्तर अपने आप ही सुधर जाएगा।
विक्रम विवि के स्वर्ण जयंती हॉल में स्वतंत्र भारत के शिक्षा आयोगों की अनुशंसाएं, क्रियान्वयन एवं प्रासंगिकता विषय पर आयोजित दो दिनी राष्ट्रीय संविमर्श के समापन पर रविवार शाम यह बात मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) नईदिल्ली के चेयरमैन प्रो. वेदप्रकाश ने कही। विशिष्ट अतिथि स्कूल शिक्षा मंत्री पारस जैन, विधायक डॉ. मोहन यादव एवं मेपकॉस्ट भोपाल के महानिदेशक डॉ. पीके वर्मा थे। अध्यक्षता कार्यवाहक कुलपति डॉ. महेंद्र सिंह हाड़ा ने की। कार्यक्रम को शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास नईदिल्ली के राष्ट्रीय सचिव अतुल कोठारी सहित अन्य अतिथियों ने भी संबोधित किया। इस मौके पर राष्ट्रभाषा हिंदी शिक्षा आैर संस्कृति नामक पुस्तक का भी विमोचन किया गया। अतिथि परिचय प्रो. तपन चौरे ने दिया। दो दिनी संविमर्श का प्रतिवेदन डॉ. उमेश कुमार सिंह ने प्रस्तुत किया। संचालन कुलानुशासक डॉ. शैलेंद्र शर्मा ने किया। आभार डॉ. प्रेमलता चुटैल ने माना। विक्रम विवि एवं शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास नईदिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में यूजीसी आैर मेपकॉस्ट के सहयोग से दो दिनी राष्ट्रीय संविमर्श का आयोजन हुआ। समारोह से पहले सुबह तकनीकी सत्र हुए।
कार्यक्रम को संबोधित करते प्रो. वेदप्रकाश एवं मंचासीन अन्य अतिथि
गिर रहा शिक्षा का स्तर
स्कूलशिक्षा मंत्री पारस जैन ने कहा शिक्षा का स्तर दिन-ब-दिन गिर रहा है। इस पर अब तक किसी ने ध्यान नहीं दिया है। स्कूलों में 5वीं आैर 8वीं से बोर्ड परीक्षाएं हटा दी गई। यह विद्यार्थियों की नींव कमजोर करने जैसा है। अगर शिक्षा के लिए नया आयोग बनाया जाएगा तो मप्र सरकार उसका पूरा समर्थन करेगी।