जेल में स्कूल : जेल में 8वीं तक की मान्यता के लिए शिक्षा विभाग को पत्र, चार घंटे की क्लास शुरू
उज्जैन। अब केंद्रीय जेल भैरवगढ़ में बंद अपराधियों को पढ़ाई करना पड़ेगी। अधिकारियों ने 360 बंदियों को प्राथमिक शिक्षा और 30 ग्रेजुएट कैदियों का एमबीए के लिए चयन किया और शिक्षा विभाग को जेल में आठवीं तक मान्यता के लिए पत्र लिखा है।
प्रदेश की सात केंद्रीय जेल में आठवीं तक पढ़ाई की सुविधा है लेकिन भैरवगढ़ जेल को मान्यता नहीं है। वहीं ग्रेजुएट कैदी भी आगे पढ़ाई जारी नहीं रख सकते थे। इसे देखते हुए जेल प्रशासन ने सभी बैरकों में शिक्षित कैदियों को अक्षर दूत बनाकर अन्य कैदियों को पढ़ाने की जिम्मेदारी सौंप दी। वहीं 360 निरक्षरों को चयनित कर उन्हें शिक्षित करने के लिए शिक्षक ओमप्रकाश पाठक ने जेल में चार घंटे क्लास लगाना शुरू कर दी है। साथ ही 30 ग्रेजुएट कैदियों को अंग्रेजी सिखाना शुरू कर दिया है। बाद में इन्हें जेल प्रशासन एमबीए कॉलेजों की फैकल्टी से लेक्चर दिलवाकर परीक्षा की तैयारी कराएगा।
बीपीपी से 12 वीं की तैयारी: जेल प्रशासन निरक्षरों को प्राथमिक शिक्षा के बाद 12वीं की डिग्री दिलवाएंगे। वहीं प्राथमिक परीक्षा के बाद कैदी बीपीपी (बैचलर प्रीपेट्री प्रोग्राम ) की परीक्षा देंगे और फिर इग्नू से ग्रेजुएशन कर सकेंगे।
जितनी पढ़ाई, उतनी सजा कम : जेल मैन्युअल में सजायाफ्ता कैदियों को पढ़ाई पर सजा में माफी का नियम है। इसके अनुसार तीसरी पास करने पर 10 दिन, 4थीं पर 20 दिन, पांचवीं से आठवीं तक में 30 दिन, 10वीं में 40 दिन, 12वीं में 50 दिन और डिग्री लेने पर 60 दिन की सजा में छूट मिलती है।
अंगूठा टेक आएगा, साइन सीखकर जाएगा :- जेल में कैदियों के अपराध का लेखा-जोखा रखने का नियम है। लेकिन अब अधिकारी जेल जाने पर अपराधी से उसकी शिक्षा के बारे में पूछ रहे है, जिससे कैदी को योग्यता के हिसाब से पढ़ाई करवा सके। अधिकारियों ने तय किया है कि निरक्षर अपराधी कुछ दिन के लिए जेल आएगा तो उसे भी सौ तक गिनती और साइन करना सिखा देंगे।
'' अपराध की सबसे बड़ी वजह अशिक्षा है। इसलिए कैदियों को शिक्षित करने की मुहिम शुरू की है, जिससे छूटने पर भी वे जीवन यापन कर सके। इसलिए शिक्षा विभाग को भी आठवीं तक की मान्यता देने के लिए पत्र लिखा है।'' गोपाल ताम्रकर, जेल अधीक्षक, केंद्रीय जेल भैरवगढ़