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महाकाल कॉरिडोर की रिपोर्ट संभागायुक्त को पेश

7 वर्ष पहले
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भासं. उज्जैन। नगरनिगम के महाकाल वन प्रोजेक्ट के कॉरिडोर मार्ग (टनल) को लेकर उलझी गुत्थियां सुलझाने की कोशिश तेज हो गई है। निगमायुक्त मेला अधिकारी अविनाश लवानिया ने योजना की पूरी जानकारी संभागायुक्त रवींद्र पस्तौर और अपर कमिश्नर केसी जैन की जांच समिति को भेज दी है। संभागायुक्त का फैसला आने के बाद इसके निर्माण या हटाने को लेकर तस्वीर साफ होगी। लवानिया के अनुसार जो फैसला आएगा उसके अनुसार काम किया जाएगा।

महाकाल वन के महाकाल चौक प्रोजेक्ट में इस मार्ग का निर्माण होना है। कंसल्टेंट इसे डीपीआर में कॉरिडोर मार्ग बताते हैं और एमआईसी से इसकी मंजूरी होने का दावा किया जाता है। जबकि महापौर रामेश्वर अखंड की शिकायत में कहा गया है कि अधिकारियों ने एमआईसी की मंजूरी लिए बिना यह काम शुरू कर दिया। महापौर की शिकायत जैन जांच समिति में है। नगर निगम द्वारा जांच पूरी करने के लिए जांच समिति द्वारा चाहे गए दस्तावेज उपलब्ध करा दिए गए हैं। जांच समिति अपनी रिपोर्ट संभागायुक्त को प्रस्तुत करेगी। संभागायुक्त इसका फैसला सुनाएंगे।

जल्दीकाम शुरू होगा: निगमसूत्रों की मानें तो कॉरिडोर मार्ग का निर्माण जल्दी शुरू हो जाएगा। महाकाल वन के सभी काम जल्दी पूरे करने के लिए ठेकेदारों को ताकीद की गई है। इन्टरप्रिटेशन सेंटर का काम भी तेजी से हो रहा है। इस घटक के अन्य कामों में फूड जोन तैयार हो गया है जिसकी दुकानें आवंटित की जाना है। लैंड स्केपिंग, सुविधाघर का काम भी चल रहा है। निगम द्वारा पौधारोपण भी कराया गया है।

रामघाट का संरक्षण और सौंदर्यीकरण

सिंहस्थमें शाही स्नान का केंद्र रहने वाले रामघाट का पुरातत्व संरक्षण का काम चल रहा है। सिंहस्थ योजना में यहां सौंदर्यीकरण, लाइटिंग और जन सुविधा के काम भी होना है। लवानिया ने रामघाट का निरीक्षण करते हुए घाट के ऐसे हिस्सों को चिन्हित करने का कहा है जो सिंहस्थ की नजर से महत्वपूर्ण हैं। इसमें छोटा पुल से बड़े पुल होकर चक्रतीर्थ घाट तक का हिस्सा शामिल है। इस हिस्से में अभी कोई योजना नहीं है।